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पुराने अध्यादेश से ही भरी जाएंगी गोरखपुर यूनिवर्सिटी की पीएचडी की सीटें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 09 Mar 2018 09:22 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में पीएचडी का दाखिला आठ साल पुराने अध्यादेश के मुताबिक ही होगा। इस फैसले को शुक्रवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में हरी झंडी मिल गई है। इस निर्णय से छह साल से ठप पड़े पीएचडी के रजिस्ट्रेशन की राह खुल गई है। खाली सीटों के सापेक्ष नेट, स्लेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों का प्रवेश वर्तमान में चल रहे शोध अध्यादेश के मुताबिक लिया जाएगा। अन्य अभ्यर्थियों का प्रवेश नए शोध अध्यादेश के मुताबिक लिया जाएगा। यह निर्णय शुक्रवार को कुलपति प्रो. वीके सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद ने वर्ष 1999 में शोध में पंजीयन के लिए रेट का अध्यादेश लागू किया था। इसमें नेट व स्लेट आदि पास अभ्यर्थियों को बिना रेट दिए शोध में पंजीयन कराने की छूट थी। बाद में शासन स्तर पर शिकायत होने के बाद नए अध्यादेश बनाने की जिम्मेदारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी को मिली। यूनिवर्सिटी ने कई उतार चढ़ाव के बाद उसे मंजूरी के लिए राजभवन को भेजा। राजभवन ने फीस निर्धारण में कुछ कमियां बताते हुए इसे वापस कर दिया। अब शासन से फीस लागू कराने के मामले में लंबा समय लगेगा। इसलिए ठप शोध फिर से शुरू कराने के लिए यूनिवर्सिटी ने पुराने अध्यादेश के अनुसार ही रेट कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शिक्षक श्री सम्मान से नवाजे गए प्रो. सेन गुप्ता को दो साल का सेवा विस्तार देने पर मुहर लगाई है।
इन पर भी हुई चर्चा
बीएड कोर्स दोबारा चलाने के लिए विद्यार्थी पीजी कॉलेज जगदीशपुर, किसान महाविद्यालय कुशीनगर और पूर्व में विधि कोर्स संचालित करने वाले रेडियंट कॉलेज ऑफ लॉ की जमा राशि दोबारा हासिल करने संबंधित अलग-अलग समितियां बनाई जाएंगी। पूर्वांचल संग्रहालय को यूनिवर्सिटी की संपत्ति में शामिल किया जाएगा।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद ने वर्ष 1999 में शोध में पंजीयन के लिए रेट का अध्यादेश लागू किया था। इसमें नेट व स्लेट आदि पास अभ्यर्थियों को बिना रेट दिए शोध में पंजीयन कराने की छूट थी। बाद में शासन स्तर पर शिकायत होने के बाद नए अध्यादेश बनाने की जिम्मेदारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी को मिली। यूनिवर्सिटी ने कई उतार चढ़ाव के बाद उसे मंजूरी के लिए राजभवन को भेजा। राजभवन ने फीस निर्धारण में कुछ कमियां बताते हुए इसे वापस कर दिया। अब शासन से फीस लागू कराने के मामले में लंबा समय लगेगा। इसलिए ठप शोध फिर से शुरू कराने के लिए यूनिवर्सिटी ने पुराने अध्यादेश के अनुसार ही रेट कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शिक्षक श्री सम्मान से नवाजे गए प्रो. सेन गुप्ता को दो साल का सेवा विस्तार देने पर मुहर लगाई है।
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बीएड कोर्स दोबारा चलाने के लिए विद्यार्थी पीजी कॉलेज जगदीशपुर, किसान महाविद्यालय कुशीनगर और पूर्व में विधि कोर्स संचालित करने वाले रेडियंट कॉलेज ऑफ लॉ की जमा राशि दोबारा हासिल करने संबंधित अलग-अलग समितियां बनाई जाएंगी। पूर्वांचल संग्रहालय को यूनिवर्सिटी की संपत्ति में शामिल किया जाएगा।
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