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मांगों को लेकर आयुर्वेद चिकित्सकों ने किया प्रदर्शन
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:03 AM IST
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गोरखपुर।
नेशनल इंट्रीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के बैनर तले शुक्रवार को डॉक्टरों ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ. जेपी नारायण के नेतृत्व में डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
डॉ. जेपी नारायण कहा कि देश में डब्लूएचओ के मानक से पांच गुना अधिक आबादी पर एक चिकित्सक है। इसे देखते हुए सरकार को आयुष चिकित्सकों को भी एमबीबीएस के समान मान्यता देनी चाहिए। देश में भारतीय चिकित्सा पद्धति के विकास की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार को इसके लिए आगे आना चाहिए। इसके शिक्षण, शोध और प्रशिक्षण के लिए अलग इंतजाम किए जाएं। साथ ही आयुर्वेद परास्नातक पाठ्यक्रम में रेडियोलॉजी को शामिल किया जाए। आयुर्वेद व यूनानी पद्धति को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में एमबीबीएस डॉक्टरों के समान ही आयुष चिकित्सकों को वेतन देने की भी मांग की।
नेशनल इंट्रीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के बैनर तले शुक्रवार को डॉक्टरों ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ. जेपी नारायण के नेतृत्व में डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
डॉ. जेपी नारायण कहा कि देश में डब्लूएचओ के मानक से पांच गुना अधिक आबादी पर एक चिकित्सक है। इसे देखते हुए सरकार को आयुष चिकित्सकों को भी एमबीबीएस के समान मान्यता देनी चाहिए। देश में भारतीय चिकित्सा पद्धति के विकास की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार को इसके लिए आगे आना चाहिए। इसके शिक्षण, शोध और प्रशिक्षण के लिए अलग इंतजाम किए जाएं। साथ ही आयुर्वेद परास्नातक पाठ्यक्रम में रेडियोलॉजी को शामिल किया जाए। आयुर्वेद व यूनानी पद्धति को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में एमबीबीएस डॉक्टरों के समान ही आयुष चिकित्सकों को वेतन देने की भी मांग की।
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