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बाढ़ बचाव नाकाफी, अब जागा प्रशासन
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:24 AM IST
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महराजगंज। मौसम विभाग के भारी बारिश के पूर्वानुमान के साथ ही बाढ़ बचाव के प्रति प्रशासन की उदासीनता से जिले के लोग सहमे हुए हैं। नदियां भी तेवर में आनी शुरू हो गई हैं। तमाम तटबंध जर्जर हो चुके हैं लेकिन, मरम्मत के नाम पर महज खानापूरी से बंधे के किनारे बसे गांवों के लोगों के हलक सूख रहे हैं। फरेंदा क्षेत्र में राप्ती नदी के बेलसड़-रिगौली बांध, वनदेइया बांध, लेहड़ा-नगवा बांध व त्रिमुहानी बांध के किनारे बसे गांवों के लोग खौफजदा हैं। बंधे के दोनों तरफ जगह-जगह रेन कट और रैट होल तक भरे नहीं जा सके हैं। दूसरी ओर संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन सतर्कता का दावा कर रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारी संवेदनशील बंधों पर नजर रखे हुए हैं। जिला प्रशासन ने निचलौल, नौतनवा और सदर तहसील में अलर्ट जारी कर दिया है। सिंचाई विभाग के साथ ही प्रशासनिक टीम भी रोहिन, राप्ती, नारायणी, महाव और प्यास के संवेदनशील बंधों पर नजर रख रही है। विशेष रूप से नारायणी नदी के ए गैप, बी गैप को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। बाढ़ चौकियों को स्थापित करने के साथ ही बाढ़ राहत के लिए नोडल अधिकारी भी नामित कर दिए गए हैं।
इस बीच नेपाल में बारिश से नारायणी में बुधवार शाम की अपेक्षा गुरुवार सुबह 20 हजार एक सौ क्यूसेक पानी बढ़ गया। ऐसे में संवेदनशील ए गैप, बी गैप और नेपाल बांध पर दबाव बढ़ने लगा है। लेकिन सिंचाई विभाग ने अभी हालात सामान्य बताया है।
सहयोगी नदियां भी तेवर में दिखनी शुरू हो गई हैं। दो दिनों से आए मौसम में बदलाव के कारण जलस्तर में उतार-चढ़ाव आया है। 21 जून को नेपाल के पहाड़ों पर जोरदार बारिश हुई और भारतीय क्षेत्र के महाव में बाढ़ आ गई। एक साथ तीन स्थानों पर नाले का किनारा पलक झपकते ही पानी संग बह गया। इससे सैकड़ों किसानों की खेती पानी में डूब गई। दो जुलाई की सुबह अचानक महाव में एक बार फिर पानी बढ़ा और देखते ही देखते छितवनिया गांव के पास नाले का किनारा 30 मीटर तक बह गया। रही बात रोहिन, राप्ती, चंदन की तो इन नदियों में भी जलस्तर का काउंट-डाउन शुरू हो गया है।
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जिले में 30 बाढ़ राहत चौकियां स्थापित
महराजगंज। जनपद में 30 बाढ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। सदर तहसील क्षेत्र में 7, फरेंदा में 9, निचलौल में 8 और नौतनवां तहसील में 6 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं। इन बाढ़ राहत चौकियों के माध्यम से 260 गांवों को राहत पहुंचाई जाएगी। पशुपालन विभाग, राजस्व विभाग के कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी 35 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। जहां डाक्टर और कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ का प्रभाव होने पर संबधित कर्मी बाढ़ चौकी से सेवा देना शुरू करेंगे।
राहत कार्य के लिए नोडल अधिकारी नामित
महराजगंज। जिला प्रशासन की ओर से बाढ राहत कार्य को बेहतर ढंग से संचालन के लिए नोडल अधिकारी नामित कर दिया है। एडीएम आरपी कश्यप, एसडीएम सदर देवेश गुप्ता, एसडीएम फरेंदा गिरीशचंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम नौतनवां आलोक कुमार और एसडीएम निचलौल ज्ञानेश्वर प्रसाद नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं।
तहसील मुख्यालय पर बना कंट्रोल रूम
महराजगंज। बाढ़ के दौरान सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए कंट्रोल रूम की स्थापित कर दिया गया है। सदर, फरेंदा, नौतनवां और निचलौल तहसील मुख्यालय पर बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित है।
मौसम विभाग के चेतावनी के बाद जिले में बाढ़ राहत बचाव कार्य से जुडे़ समस्त कर्मियों और अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ राहत चौकियां और कंट्रोल रूम स्थापित है। यहां कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। सिंचाई विभाग को भी संवेदनशील बंधों की कड़ी निगरानी करने का निर्देश दे दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।
वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम महराजगंज
गुरुवार को यूं बढ़ा जलस्तर
नदी बुधवार का जलस्तर गुरुवार का जलस्तर
नारायणी 79700 99, 800
प्यास 99.20 मी. 99.20
महाव 5 फुट 3 फुट
राप्ती 76.860 मी. 77.250 मी.
रोहिन रतनपुर 319 अप 318 डाउन
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इस बीच नेपाल में बारिश से नारायणी में बुधवार शाम की अपेक्षा गुरुवार सुबह 20 हजार एक सौ क्यूसेक पानी बढ़ गया। ऐसे में संवेदनशील ए गैप, बी गैप और नेपाल बांध पर दबाव बढ़ने लगा है। लेकिन सिंचाई विभाग ने अभी हालात सामान्य बताया है।
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सहयोगी नदियां भी तेवर में दिखनी शुरू हो गई हैं। दो दिनों से आए मौसम में बदलाव के कारण जलस्तर में उतार-चढ़ाव आया है। 21 जून को नेपाल के पहाड़ों पर जोरदार बारिश हुई और भारतीय क्षेत्र के महाव में बाढ़ आ गई। एक साथ तीन स्थानों पर नाले का किनारा पलक झपकते ही पानी संग बह गया। इससे सैकड़ों किसानों की खेती पानी में डूब गई। दो जुलाई की सुबह अचानक महाव में एक बार फिर पानी बढ़ा और देखते ही देखते छितवनिया गांव के पास नाले का किनारा 30 मीटर तक बह गया। रही बात रोहिन, राप्ती, चंदन की तो इन नदियों में भी जलस्तर का काउंट-डाउन शुरू हो गया है।
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जिले में 30 बाढ़ राहत चौकियां स्थापित
महराजगंज। जनपद में 30 बाढ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। सदर तहसील क्षेत्र में 7, फरेंदा में 9, निचलौल में 8 और नौतनवां तहसील में 6 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं। इन बाढ़ राहत चौकियों के माध्यम से 260 गांवों को राहत पहुंचाई जाएगी। पशुपालन विभाग, राजस्व विभाग के कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी 35 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। जहां डाक्टर और कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ का प्रभाव होने पर संबधित कर्मी बाढ़ चौकी से सेवा देना शुरू करेंगे।
राहत कार्य के लिए नोडल अधिकारी नामित
महराजगंज। जिला प्रशासन की ओर से बाढ राहत कार्य को बेहतर ढंग से संचालन के लिए नोडल अधिकारी नामित कर दिया है। एडीएम आरपी कश्यप, एसडीएम सदर देवेश गुप्ता, एसडीएम फरेंदा गिरीशचंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम नौतनवां आलोक कुमार और एसडीएम निचलौल ज्ञानेश्वर प्रसाद नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं।
तहसील मुख्यालय पर बना कंट्रोल रूम
महराजगंज। बाढ़ के दौरान सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए कंट्रोल रूम की स्थापित कर दिया गया है। सदर, फरेंदा, नौतनवां और निचलौल तहसील मुख्यालय पर बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित है।
मौसम विभाग के चेतावनी के बाद जिले में बाढ़ राहत बचाव कार्य से जुडे़ समस्त कर्मियों और अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ राहत चौकियां और कंट्रोल रूम स्थापित है। यहां कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। सिंचाई विभाग को भी संवेदनशील बंधों की कड़ी निगरानी करने का निर्देश दे दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।
वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम महराजगंज
गुरुवार को यूं बढ़ा जलस्तर
नदी बुधवार का जलस्तर गुरुवार का जलस्तर
नारायणी 79700 99, 800
प्यास 99.20 मी. 99.20
महाव 5 फुट 3 फुट
राप्ती 76.860 मी. 77.250 मी.
रोहिन रतनपुर 319 अप 318 डाउन