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मांगों को लेकर ऊर्जा निगमों के खिलाफ लामबंद हुए संगठन
Updated Fri, 16 Jun 2017 09:03 PM IST
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गोरखपुर।
बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के सातवें वेतन पुनरीक्षण के लिए ऊर्जा निगमों ने अभी तक कोई सार्थक पहल नहीं की। इसके कारण विद्युत कर्मचारियों और अभियंताओं में आक्रोश है। इसके साथ ही अन्य लंबित मांगों को लेकर 17 संगठन एक साथ आ गए हैं। यह जानकारी विद्युत संविदा मजदूर संगठन के अध्यक्ष आरएस राय ने शुक्रवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें एक जनवरी 2016 से सातवें वेतन पुनरीक्षण का आदेश अविलंब जारी करने, छठवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को दूर करने, 14 जनवरी 2000 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों व अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू करने समेत सभी संविदा कर्मियों को ऊर्जा निगमों से सीधे भुगतान करने की मांग उठी थी। इन मांगों को यदि जल्द नहीं माना गया तो 29 जून से शक्ति भवन मुख्यालय, परियोजना मुख्यालयों व जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही छह जुलाई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन को 17 संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। प्रेसवार्ता के दौरान आठ संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के सातवें वेतन पुनरीक्षण के लिए ऊर्जा निगमों ने अभी तक कोई सार्थक पहल नहीं की। इसके कारण विद्युत कर्मचारियों और अभियंताओं में आक्रोश है। इसके साथ ही अन्य लंबित मांगों को लेकर 17 संगठन एक साथ आ गए हैं। यह जानकारी विद्युत संविदा मजदूर संगठन के अध्यक्ष आरएस राय ने शुक्रवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें एक जनवरी 2016 से सातवें वेतन पुनरीक्षण का आदेश अविलंब जारी करने, छठवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को दूर करने, 14 जनवरी 2000 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों व अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू करने समेत सभी संविदा कर्मियों को ऊर्जा निगमों से सीधे भुगतान करने की मांग उठी थी। इन मांगों को यदि जल्द नहीं माना गया तो 29 जून से शक्ति भवन मुख्यालय, परियोजना मुख्यालयों व जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही छह जुलाई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन को 17 संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। प्रेसवार्ता के दौरान आठ संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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