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एमएमएमयूटी में खुलेगा नेशनल रिसोर्स सेंटर
Updated Sat, 15 Dec 2018 12:49 AM IST
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एमएमएमयूटी में जल्द स्थापित होगा नेशनल रिसोर्स सेंटर
- नेशनल साइबर सेफ्टी सिक्योरिटी स्टैंडर्ड ने किया चयन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जल्द ही नेशनल रिसोर्स सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां साइबर क्राइम, सिक्योरिटी पर रिसर्च होंगे और छात्रों को जागरूक भी किया जाएगा। रिसोर्स सेंटर खोलने के लिए नेशनल साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी स्टैंडर्ड ने विश्वविद्यालय का चयन किया है।
नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड देश के उत्कृष्ट संस्थानों में इस तरह के सेंटर स्थापित करती है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों का गोपनीय ब्योरा और पेटेंट वाले रिसर्च को सुरक्षित रखना है ताकि ये गलत हाथा में न जाएं। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने बताया कि सेंटर स्थापित होने के बाद साइबर अटैक से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। विद्यार्थियों और शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी कि किस तरह से वे साइबर अटैक से बचें। इस पर शोध भी होंगे। इंटरनेट के खतरे, साइबर ट्रैप की जानकारी विद्यार्थियों-कर्मचारियों को दी जाएगी। विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय गोष्ठियों में सिक्योरिटी पर होने वाले कांफ्रेंस में प्रतिभाग का अवसर भी यहां के विद्यार्थियों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड का लोगो भी यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर प्रयोग किया जा सकता है। एक वर्ष में चार फेकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम भी बिना किसी शुल्क के यूनिवर्सिटी में आयोजित किए जाएंगे।
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- नेशनल साइबर सेफ्टी सिक्योरिटी स्टैंडर्ड ने किया चयन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जल्द ही नेशनल रिसोर्स सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां साइबर क्राइम, सिक्योरिटी पर रिसर्च होंगे और छात्रों को जागरूक भी किया जाएगा। रिसोर्स सेंटर खोलने के लिए नेशनल साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी स्टैंडर्ड ने विश्वविद्यालय का चयन किया है।
नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड देश के उत्कृष्ट संस्थानों में इस तरह के सेंटर स्थापित करती है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों का गोपनीय ब्योरा और पेटेंट वाले रिसर्च को सुरक्षित रखना है ताकि ये गलत हाथा में न जाएं। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने बताया कि सेंटर स्थापित होने के बाद साइबर अटैक से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। विद्यार्थियों और शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी कि किस तरह से वे साइबर अटैक से बचें। इस पर शोध भी होंगे। इंटरनेट के खतरे, साइबर ट्रैप की जानकारी विद्यार्थियों-कर्मचारियों को दी जाएगी। विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय गोष्ठियों में सिक्योरिटी पर होने वाले कांफ्रेंस में प्रतिभाग का अवसर भी यहां के विद्यार्थियों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड का लोगो भी यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर प्रयोग किया जा सकता है। एक वर्ष में चार फेकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम भी बिना किसी शुल्क के यूनिवर्सिटी में आयोजित किए जाएंगे।
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