{"_id":"59fb779e4f1c1b9e678b9159","slug":"41509652382-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर की खादी की धूम विदेशों तक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर की खादी की धूम विदेशों तक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Nov 2017 01:28 AM IST
विज्ञापन
खादी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। निकाय चुनाव के मद्देनजर एक तरफ जहां खादी के पहनावे की मांग बढ़ गई है वहीं मुंबई, राजस्थान, दिल्ली के बाद गोरखपुर की खादी की चमक अब विदेशों में भी बढ़ने वाली है। इसके लिए गांधी आश्रम के क्षेत्रीय कार्यालय का राजस्थान खादी संघ से करार हुआ है। इसके तहत हाल ही में 18 लाख रुपये की खादी की सप्लाई जयपुर को की गई है। वहां से गोरखपुर की खादी फ्रांस, जर्मनी, साउथ अफ्रीका, जापान, इटली समेत अन्य कई मुल्कों में भेजी जाएगी।
क्षेत्रीय गांधी आश्रम कार्यालय गोलघर के सचिव विश्वेश्वर नाथ तिवारी ने बताया कि दो सालों से जयपुर स्थित राजस्थान खादी संघ को गोरखपुर की खादी की सप्लाई भेजी जा रही थी। यहां की खादी के सैंपल विदेशों में भी भेजे गए थे, जहां इसे बेहद पसंद किया गया। अब वहां से गोरखपुर की खादी की एडवांस बुकिंग हो रही है। इसके बाद ही राजस्थान खादी संघ ने बड़े पैमाने पर खादी की डिमांड की है।
गोलघर गांधी आश्रम से गोरखपुर, महराजगंज और देवरिया के करीब 2200 बुनकर जुड़े हुए हैं। हाथ से कती और बुनी होने से इसके दाम अन्य कपड़ों से महंगे होते हैं। प्राकृतिक धागे और रंग से बनी होने से ये हर मौसम में आरामदायक होती है। विदेशी कंपनियों के गांधी आश्रम के साथ हाथ मिलाने से खादी को नया रूप-रंग मिलेगा। इसके शौकीनों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन
क्षेत्रीय गांधी आश्रम कार्यालय गोलघर के सचिव विश्वेश्वर नाथ तिवारी ने बताया कि दो सालों से जयपुर स्थित राजस्थान खादी संघ को गोरखपुर की खादी की सप्लाई भेजी जा रही थी। यहां की खादी के सैंपल विदेशों में भी भेजे गए थे, जहां इसे बेहद पसंद किया गया। अब वहां से गोरखपुर की खादी की एडवांस बुकिंग हो रही है। इसके बाद ही राजस्थान खादी संघ ने बड़े पैमाने पर खादी की डिमांड की है।
विज्ञापन
गोलघर गांधी आश्रम से गोरखपुर, महराजगंज और देवरिया के करीब 2200 बुनकर जुड़े हुए हैं। हाथ से कती और बुनी होने से इसके दाम अन्य कपड़ों से महंगे होते हैं। प्राकृतिक धागे और रंग से बनी होने से ये हर मौसम में आरामदायक होती है। विदेशी कंपनियों के गांधी आश्रम के साथ हाथ मिलाने से खादी को नया रूप-रंग मिलेगा। इसके शौकीनों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन