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नाग देवता को दूध और लावा चढ़ा, सर्वमंगल की कामना
Updated Fri, 28 Jul 2017 08:04 PM IST
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नागपंचमी पर पूजा करते श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को परंपरागत ढंग से सर्वमंगल की कामना के साथ मनाया गया। इस दौरान घरों और मंदिरों में नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाकर पूजा की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता के दर्शन किए और श्रद्धा, भक्ति, हर्षोल्लास के बीच नागपंचमी पर्व को मनाया। कई घरों में महिलाओं ने कजरी भी गाई।
पूजा पाठ के लिए लोगों ने तड़के ही उठकर स्नान ध्यान किया। इसके उपरांत घर में नाग देवता की आकृति बनाकर पूरे विधि विधान के साथ आराधना की। बहुत से श्रद्धालु आसपास के शिवालयों तक गए और नागदेवता के चरणों में शीश झुकाया। घरों और मंदिर में दूध और लावा चढ़ाकर पूजा करने का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। सपेरों ने भी अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। सुबह मोहल्लों में नाग देवता को पिटारे में बंद कर पहुंचे और लोगों को उनका दर्शन कराया। बहुत से श्रद्धालुओं ने नाग देवता को गले में धारण कर पूजा का शौक पूरा किया। शाम को ताल-पोखरों पर गुड़िया पीटने की रस्म भी अदा की गई। बहने चने को कपडे़ में सिल गुड़िया बनाकर भाइयों के साथ ताल-पोखरों पर जुटीं। बहनों ने गुड़िया को पानी में फेंका तो भाइयों ने उसे पीटकर रस्म पूरी की।
रंग-बिरंगी पतंगों से भरा आसमान
नागपंचमी के अवसर पर चंपा देवी पार्क के पास स्थित ग्राउंड में शहरवासियों ने जमकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाया। नागदेवता की पूजा कर बाद लोग खासकर युवा ग्राउंड पर रंग बिरंगी पतंग और माझा लेकर एकत्र हुए। अपने साथियों के साथ बच्चों और युवाओं ने पंतगबाजी की। सुबह से शुरू हुआ ये सिलसिला शाम तक जारी रहा।
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नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को परंपरागत ढंग से सर्वमंगल की कामना के साथ मनाया गया। इस दौरान घरों और मंदिरों में नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाकर पूजा की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता के दर्शन किए और श्रद्धा, भक्ति, हर्षोल्लास के बीच नागपंचमी पर्व को मनाया। कई घरों में महिलाओं ने कजरी भी गाई।
पूजा पाठ के लिए लोगों ने तड़के ही उठकर स्नान ध्यान किया। इसके उपरांत घर में नाग देवता की आकृति बनाकर पूरे विधि विधान के साथ आराधना की। बहुत से श्रद्धालु आसपास के शिवालयों तक गए और नागदेवता के चरणों में शीश झुकाया। घरों और मंदिर में दूध और लावा चढ़ाकर पूजा करने का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। सपेरों ने भी अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। सुबह मोहल्लों में नाग देवता को पिटारे में बंद कर पहुंचे और लोगों को उनका दर्शन कराया। बहुत से श्रद्धालुओं ने नाग देवता को गले में धारण कर पूजा का शौक पूरा किया। शाम को ताल-पोखरों पर गुड़िया पीटने की रस्म भी अदा की गई। बहने चने को कपडे़ में सिल गुड़िया बनाकर भाइयों के साथ ताल-पोखरों पर जुटीं। बहनों ने गुड़िया को पानी में फेंका तो भाइयों ने उसे पीटकर रस्म पूरी की।
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रंग-बिरंगी पतंगों से भरा आसमान
नागपंचमी के अवसर पर चंपा देवी पार्क के पास स्थित ग्राउंड में शहरवासियों ने जमकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाया। नागदेवता की पूजा कर बाद लोग खासकर युवा ग्राउंड पर रंग बिरंगी पतंग और माझा लेकर एकत्र हुए। अपने साथियों के साथ बच्चों और युवाओं ने पंतगबाजी की। सुबह से शुरू हुआ ये सिलसिला शाम तक जारी रहा।
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