कुश्ाीनगर ः मां! तेरी कोख का अंधेरा भला था, कम से कम जिंदा तो था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वो दुलार, वो प्यार, वो सपने और वो बातें सब खत्म हो गए। जानता हू मां, रही होगी तुम्हारी कोई बेबसी, जिसने तुम्हें पराजित कर दिया। मुझे रास्ते पर फेंकने को मजबूर कर दिया। मैं जानता हूं मां, तुम्हारा प्यार से मुझे सहलाना, मेरे सपनों में खो जाना, झूठ नहीं था। वो तुम्हारी ममता थी, जो नौ महीने मुझ पर लुटती रही। ... पर मां क्या तुम इतनी कमजोर थी, जो मेरे लिए जमाने से लड़ नहीं पाई। सबके सामने मुझे अपना कह नहीं पाई। पापा ने भी मुझे अपनाने की हिम्मत नहीं दिखाई। मैं नन्हीं सी जान कब तक लड़ता, हार गया। अब एक बार फिर लौट रहा हूं घने अंधेरे में, लेकिन यह अंधेरा है मौत का।
यह दर्द है उस नवजात बेटे की जिसे मंगलवार सुबह एक कुत्ता अपने मुंह में दबाए पडरौना की सड़कों पर घूमता रहा। लोग यह नजारा देखते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं दुखा, किसी ने दम तोड़ चुके उस नवजात को कुत्ते से छुड़ाने का प्रयास नहीं किया। कुत्ता काफी देर तक एक सड़क से दूसरे सड़क और एक गली से दूसरी गली में भागता रहा। अंत में कुछ युवकों ने मानवीयता दिखाई और कुत्ते को घेर लिया। कुत्ता नवजात की लाश छोड़कर भाग निकला। मामला संज्ञान में आने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
गंगीराम मंदिर मोहल्ला निवासी अरविंद वर्मा, सोनू साहा, गोविंद, शंकर, सुमित, जयराम वर्मा, बंटी आदि ने बताया कि कुत्ता नवजात की लाश को मुंह में दबाए काफी देर तक मेन रोड पर टहलता रहा था। पुलिस ने भी काफी कोशिश की, लेकिन बच्चे की मां के बारे में कोई जानकारी नहीं मिला पाया। कोतवाल विजय राज सिंह ने बताया कि नवजात लड़का था। वह एक दिन का लग रहा था।