{"_id":"5bae765f867a557f5e02d065","slug":"31538160223-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश फतवे से नहीं, संविधान से चलेगा: योगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश फतवे से नहीं, संविधान से चलेगा: योगी
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:13 AM IST
विज्ञापन
महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल रहे।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के श्रद्धांजलि समारोह में हिस्सा लेने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश फतवे से नहीं संविधान से चलता है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान दिया है, उसमें हर समस्या का समाधान मौजूद है।
दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि ऊंच-नीच का भाव भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। गुरु गोरक्षनाथ पीठ इसका आदर्श उदाहरण है। यहां कोई भेदभाव नहीं है। हर जाति, हर भाषा और हर संप्रदाय के लोग गोरक्षनाथ पीठ से जुड़े हैं। सब अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं।
स्वच्छता का मानक गोरक्षनाथ पीठ ने साबित किया है। मेरे, गुरुजन कहते थे दूसरों की कमी मत देखो। अगर, हम स्वयं की समृद्धि चाहते हैं तो भारत के समृद्धि की चिंता भी करें। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यानाथ ने हिंदुत्व को गोरखनाथ मंदिर का वैचारिक अधिष्ठान बनाया था। राष्ट्रधर्म को सभी धर्मों से ऊपर माना। वे कहते थे सनातन हिंदू धर्म एवं संस्कृति ही भारतीयता है। स्वतंत्रता आंदोलन से चौरीचौरा कांड तक में गोरक्ष पीठ के संतों को आरोपित किया गया।
विज्ञापन
ये घटनाएं प्रमाणित करती हैं कि गोरक्षनाथ पीठ ने उस संन्यासी परंपरा का अनुसरण किया, जिसमें राष्ट्रधर्म को हमारा धर्म कहा गया। राष्ट्र की रक्षा संन्यासी का पहला कर्तव्य है। व्यक्तिगत धर्म से बड़ा राष्ट्रधर्म है।
दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि ऊंच-नीच का भाव भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। गुरु गोरक्षनाथ पीठ इसका आदर्श उदाहरण है। यहां कोई भेदभाव नहीं है। हर जाति, हर भाषा और हर संप्रदाय के लोग गोरक्षनाथ पीठ से जुड़े हैं। सब अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं।
विज्ञापन
स्वच्छता का मानक गोरक्षनाथ पीठ ने साबित किया है। मेरे, गुरुजन कहते थे दूसरों की कमी मत देखो। अगर, हम स्वयं की समृद्धि चाहते हैं तो भारत के समृद्धि की चिंता भी करें। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यानाथ ने हिंदुत्व को गोरखनाथ मंदिर का वैचारिक अधिष्ठान बनाया था। राष्ट्रधर्म को सभी धर्मों से ऊपर माना। वे कहते थे सनातन हिंदू धर्म एवं संस्कृति ही भारतीयता है। स्वतंत्रता आंदोलन से चौरीचौरा कांड तक में गोरक्ष पीठ के संतों को आरोपित किया गया।
विज्ञापन
ये घटनाएं प्रमाणित करती हैं कि गोरक्षनाथ पीठ ने उस संन्यासी परंपरा का अनुसरण किया, जिसमें राष्ट्रधर्म को हमारा धर्म कहा गया। राष्ट्र की रक्षा संन्यासी का पहला कर्तव्य है। व्यक्तिगत धर्म से बड़ा राष्ट्रधर्म है।