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आयकर की सीमा न बढ़ने से खुद को ठगा महसूस कर रहे कर्मचारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:27 AM IST
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गोरखपुर।
राज्य और केंद्रीय कर्मचारी भी यह मान रहे थे कि लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर इस बार का बजट लोक लुभावन होगा। हर वर्ग के लोगों के साथ ही उन्हें भी कुछ सौगातें मिलेंगी, मगर बजट पेश होने के बाद कर्मचारियों में हताशा है। ठगा सा महसूस कर रहे कर्मचारी सरकार को कोस रहे हैं।
वेतनभोगी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के इस बार के बजट से बहुत उम्मीदें थीं। सभी कयास लगाए बैठे थे कि इस बार आयकर की सीमा जरूर बढ़ाई जाएगी मगर सरकार ने बहुत निराश किया।
- बीएन सिंह, कर्मचारी, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
सरकारी कर्मचारी पूरी ईमानदारी से आयकर जमा करते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि टैक्स में छूट मिलेगी। उम्मीद तो पूरी हुई नहीं, अलबत्ता सरकार ने सरचार्ज में एक फीसदी की वृद्धि कर जख्म अलग से दे दिया।
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- अश्विनी श्रीवास्तव, कर्मचारी, कोषागार
पिछले तीन बजट से कर्मचारियों को कोई सहूलियत नहीं मिल रही है। इस बार भी कर्मचारियों के लिहाज से बजट शून्य रहा जिससे हम बहुत हताश हैं। सभी में बेहद आक्रोश है।
- राजन सिंह, कर्मचारी, वाणिज्य कर
इस बार के बजट से कर्मचारियों को बहुत उम्मीदें थीं, मगर पूरा बजट निराशा भरा रहा। केंद्र सरकार फिर से बजट की समीक्षा करें। कर्मचारियों के साथ सरकार का यह उपेक्षात्मक रवैया ठीक नहीं।
-शीतल प्रसाद, कर्मचारी, पूर्वोत्तर रेलवे
राज्य और केंद्रीय कर्मचारी भी यह मान रहे थे कि लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर इस बार का बजट लोक लुभावन होगा। हर वर्ग के लोगों के साथ ही उन्हें भी कुछ सौगातें मिलेंगी, मगर बजट पेश होने के बाद कर्मचारियों में हताशा है। ठगा सा महसूस कर रहे कर्मचारी सरकार को कोस रहे हैं।
वेतनभोगी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के इस बार के बजट से बहुत उम्मीदें थीं। सभी कयास लगाए बैठे थे कि इस बार आयकर की सीमा जरूर बढ़ाई जाएगी मगर सरकार ने बहुत निराश किया।
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- बीएन सिंह, कर्मचारी, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
सरकारी कर्मचारी पूरी ईमानदारी से आयकर जमा करते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि टैक्स में छूट मिलेगी। उम्मीद तो पूरी हुई नहीं, अलबत्ता सरकार ने सरचार्ज में एक फीसदी की वृद्धि कर जख्म अलग से दे दिया।
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- अश्विनी श्रीवास्तव, कर्मचारी, कोषागार
पिछले तीन बजट से कर्मचारियों को कोई सहूलियत नहीं मिल रही है। इस बार भी कर्मचारियों के लिहाज से बजट शून्य रहा जिससे हम बहुत हताश हैं। सभी में बेहद आक्रोश है।
- राजन सिंह, कर्मचारी, वाणिज्य कर
इस बार के बजट से कर्मचारियों को बहुत उम्मीदें थीं, मगर पूरा बजट निराशा भरा रहा। केंद्र सरकार फिर से बजट की समीक्षा करें। कर्मचारियों के साथ सरकार का यह उपेक्षात्मक रवैया ठीक नहीं।
-शीतल प्रसाद, कर्मचारी, पूर्वोत्तर रेलवे