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Updated Thu, 13 Jul 2017 11:19 PM IST
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संतकबीरनगर/बघौली(बेचन राय)। क्षेत्र के बालूशासन गांव में पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिछले दस दिनों से नीम के पेड़ के नीचे चल रहा है। कारण कि विद्यालय तक जाने का रास्ता नहीं है। जिन पगडंडियों और बाग से छात्र और अध्यापक स्कूल पहुंचते हैं, वहां आजकल जलजमाव की स्थिति है। इसी समस्या के कारण दस दिन से बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन नहीं बन सका है। यहां सर्वाधिक दिक्कत पीने के पानी और शौचालय की है। ऐसे में यह समझ से परे है कि आखिर जब आने-जाने का रास्ता नहीं है तो ऐसे स्थान पर स्कूल का निर्माण क्यों कराया गया।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बालू शासन की स्थापना वर्ष 2009-10 में हुई। प्रधानाचार्य सरीफुलहक ने बताया कि विद्यालय जाने के लिए रास्ता नहीं है। बागीचे से होकर विद्यालय पहुंचा जाता है। बारिश होने से इस रास्ते पर जलजमाव और कीचड़ के अलावा मल जमा हो गया है। जिससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। अध्यापिकाओं के साथ सड़क की पटरी के बगल में स्थित नीम की पेड़ के नीचे छात्रों को पिछले दस दिन से पढ़ा रहे हैं।
पिछले चार- पांच वर्षों से समस्या के बाबत उच्चाधिकारियों को सूचना दी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं। विद्यालय भवन की स्थिति अपने निर्माण के समय से ही खराब गुणवत्ता के कारण चर्चा का विषय बनी रही। भवन का छत बारिश में टपकती है ,फर्श टूट गया है। शौचालय बना है ,लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। परिसर के आस-पास घास की झाड़ी उग आईं हैं। यहां 40 छात्रों का नामांकन है और उसके सापेक्ष गुरुवार को 16 छात्र पढ़ने आए थे। यहां दो अध्यापक मनिभा सिंह, विनोदनी देवी और प्रधानाचार्य सरीफुल हक के अलावा दो रसोइयां हैं।
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बीईओ डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि समस्या की जानकारी है। जब तक रास्ता ठीक नहीं हो जाता है, तब तक इसे सात सौ मीटर दूर बगल के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय बघौली में छात्रों को शिफ्ट करके पढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं ग्राम प्रधान दुर्गावती देवी ने बताया कि मेंहदावल रोड से पूर्व विद्यालय की दूरी करीब 200 मीटर है, लेकिन कागज में विद्यालय पर जाने के लिए रास्ता नहीं है। जो जमीन विद्यालय की तरफ है, वह लोगों के बाग की जमीन है। ऐसे में जब तक उस जमीन के मालिक खुद रास्ता नहीं देते हैं, तब तक समस्या बनी रहेगी। इसके लिए प्रशासन को भी पहल करनी चाहिए।
डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। उस विद्यालय की समस्या को दूर कराने की व्यवस्था की जाएगी। बीएसए को निर्देशित किया जाएगा कि वहां की हकीकत जाने और उन्हें रिपोर्ट दें।
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय बालू शासन की स्थापना वर्ष 2009-10 में हुई। प्रधानाचार्य सरीफुलहक ने बताया कि विद्यालय जाने के लिए रास्ता नहीं है। बागीचे से होकर विद्यालय पहुंचा जाता है। बारिश होने से इस रास्ते पर जलजमाव और कीचड़ के अलावा मल जमा हो गया है। जिससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। अध्यापिकाओं के साथ सड़क की पटरी के बगल में स्थित नीम की पेड़ के नीचे छात्रों को पिछले दस दिन से पढ़ा रहे हैं।
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पिछले चार- पांच वर्षों से समस्या के बाबत उच्चाधिकारियों को सूचना दी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं। विद्यालय भवन की स्थिति अपने निर्माण के समय से ही खराब गुणवत्ता के कारण चर्चा का विषय बनी रही। भवन का छत बारिश में टपकती है ,फर्श टूट गया है। शौचालय बना है ,लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। परिसर के आस-पास घास की झाड़ी उग आईं हैं। यहां 40 छात्रों का नामांकन है और उसके सापेक्ष गुरुवार को 16 छात्र पढ़ने आए थे। यहां दो अध्यापक मनिभा सिंह, विनोदनी देवी और प्रधानाचार्य सरीफुल हक के अलावा दो रसोइयां हैं।
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बीईओ डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि समस्या की जानकारी है। जब तक रास्ता ठीक नहीं हो जाता है, तब तक इसे सात सौ मीटर दूर बगल के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय बघौली में छात्रों को शिफ्ट करके पढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं ग्राम प्रधान दुर्गावती देवी ने बताया कि मेंहदावल रोड से पूर्व विद्यालय की दूरी करीब 200 मीटर है, लेकिन कागज में विद्यालय पर जाने के लिए रास्ता नहीं है। जो जमीन विद्यालय की तरफ है, वह लोगों के बाग की जमीन है। ऐसे में जब तक उस जमीन के मालिक खुद रास्ता नहीं देते हैं, तब तक समस्या बनी रहेगी। इसके लिए प्रशासन को भी पहल करनी चाहिए।
डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। उस विद्यालय की समस्या को दूर कराने की व्यवस्था की जाएगी। बीएसए को निर्देशित किया जाएगा कि वहां की हकीकत जाने और उन्हें रिपोर्ट दें।