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नींद में खलल से घट रही कार्यक्षमता, हाय रे मच्छर!

Sat, 16 Mar 2019 12:31 AM IST
ajay Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Published by: ajay Kumar Updated Sat, 16 Mar 2019 12:31 AM IST
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नींद में खलल से घट रही कार्यक्षमता, हाय रे मच्छर!
मच्छर
गोरखपुर। शुक्रवार को विश्व निद्रा दिवस था। इस मौके पर शहर के उन लोगों से बात की गई जिनकी नींद मच्छरों ने हराम कर दी है। नींद का खलल जिंदगी में का खलल बनता जा रहा है। और नगर निगम है कि कानों तक आई शिकायत भी नहीं सुन पा रहा।
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चलिए, सहारा इस्टेटवासियों का हाल जानते हैं। इसे शहर के दूसरे मच्छरपीडित इलाकों की दशा का नमूना समझ लीजिए। सहारा स्टेट के 1200 घरों में रहने वाले करीब 6000 लोगो में ज्यादातर नौकरीपेशा, चिकित्सक और कारोबारी हैं। मच्छरजनित बीमारियों के खतरे तो हैं ही, कार्यस्थल पर उनके परफार्मेंस पर भी असर होने लगा है। कारण, नींद पूरी न होने से उनकी क्षमता और एकाग्रता प्रभावित हो रही है। तनाव-चिड़चिड़ापन भी बढ़ा है। छोटी-छोटी बात पर पति-पत्नी के बीच कहासुनी की नौबत आ रही है। सिर में दर्द बने रहने की शिकायत आम है। बड़े खुद को तो किसी तरह संभाल भी रहे हैं पर स्कूल जाने वाले बच्चों की चिंता बड़ी है।
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जितना समझ रहे, समस्या उससे कहीं ज्यादा बड़ी है

व्यस्कों के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है। किसी वजह से ऐसा न हो सके तो तनाव पैदा होता है। ऐसा व्यक्ति पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाता। उत्साह में कमी आती है। उसका परफार्मेंस खराब होने लगता है। लंबे समय तक यह सब चलता रहे तो नतीजे गंभीर होते जाते हैं। मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर, अल्जाइमर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। पढ़ रहे बच्चों के लिए तो अच्छी नींद और भी जरूरी है।
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-डॉ. अखिलेश सिंह, फिजिशियन
 

एक डंक और हजारों की चपत

पिछले दिनों ‘मल्हार’ में रहने वाले अमित श्रीवास्तव को डेंगू हुआ। जांच और इलाज मिलाकर 70 हजार रुपये खर्च हो गए। काम का हर्जा हुआ लंबे समय तक कमजोरी झेली सो अलग। कई लोगों को मलेरिया हो चुका है। खतरा चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), एईएस का भी बना रहता है।

न घर में चैन, न बाहर
मच्छरों का ऐसा आतंक पहली बार देखा है। दरवाजा-खिड़की खोलते ही घर में मच्छर घुस आते हैं। काले मच्छरों के काटते ही शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं।
डॉ. एपी त्रिपाठी, अध्यक्ष, रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी

इलेक्ट्रिक रैकेट से देररात तक मच्छर मारते रहो। जल्दी उठ न पाओ तो बेटी की स्कूल की तैयारी में लेट। घर से निकलो तो सिर पर मच्छर मंडराने लगते हैं।
अंजना तिवारी, गांधार

मार्निंग वॉक भी मुश्किल हो गया है। मच्छर आंख में पड़ जाते हैं। आंख लाल हो जाती हैं। बिना आई गार्ड वाले हेलमेट के स्कूटी या बाइक नहीं चला सकते।
विभा मिश्रा, मल्हार

यहां करीब छह हजार लोग रहते हैं। मच्छरों से परेशानी की जानकारी नगर निगम प्रशासन को दी जा चुकी है। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। हम परेशान हैं।
सरिता सिंह, बहार-6
 
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