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अब पुराने टीटीई का नहीं होगा समायोजन
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अब पुराने टीटीई का नहीं होगा समायोजन
पहले चरण में आरक्षण और बुकिंग क्लर्क होंगे मर्ज
दूसरे चरण में 22 फरवरी 2018 से नियुक्त टीटीई शामिल होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अब बुकिंग क्लर्क और आरक्षण लिपिकों के साथ पुराने टीटीई समायोजित नहीं होंगे। रेलवे बोर्ड ने समायोजन को लेकर नई नीति बनाई है। दो चरणों में इसे लागू किया जाएगा। पहले चरण में आरक्षण और बुकिंग क्लर्क के कार्यक्षेत्र को समायोजित किया जाएगा। दूसरे चरण में 22 फरवरी 2018 से नियुक्त टीटीई को इसमें शामिल किया जाएगा। इस सर्कुलर से पूर्वोत्तर रेलवे के करीब 500 से ज्यादा टीटीई को राहत मिली है।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के क्रम में वाणिज्य विभाग में मिश्रित कैडर बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कर्मचारी संगठनों का आरोप था कि लखनऊ मंडल में रेलवे बोर्ड के नियम को दरकिनार कर समायोजन किया गया है। एआईआरएफ और एनएफआईआर के पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (कार्मिक) के सामने कर्मचारियों की बातें रखीं। तर्क दिया कि अगर सभी का विलय होता है तो वरिष्ठता में दिक्कत आएगी। इसे लेकर 15 जनवरी को कार्यवृत्ति जारी की गई।
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इनसेट
यूनियनों में श्रेय लेने की होड़
गोरखपुर। समायोजन में टीटीई को छूट के मामले में दो रेल संगठनों में श्रेय लेने की होड़ लग गई है। पीआरकेएस के महामंत्री विनोद कुमार राय का दावा है कि एनएफआईआर ने इस मामले को पर दबाव बनाया था। इसी वजह से 22 फरवरी 2018 के पूर्व नियुक्ति पाए वाणिज्य और आरक्षण लिपिकों की वरिष्ठता अलग-अलग रखी गई। इससे उनके पदोन्नति के अवसर प्रभावित नहीं होेंगे। वहीं, एनई रेलवे मजदूर यूनियन के लखनऊ मंडल अध्यक्ष एसपी सिंह एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव टीएन पांडेय का कहना है कि संगठन ने डीआरएम पर दबाव बनाया जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। कुछ यूनियन झूठा श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।
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अब पुराने टीटीई का नहीं होगा समायोजन
पहले चरण में आरक्षण और बुकिंग क्लर्क होंगे मर्ज
दूसरे चरण में 22 फरवरी 2018 से नियुक्त टीटीई शामिल होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अब बुकिंग क्लर्क और आरक्षण लिपिकों के साथ पुराने टीटीई समायोजित नहीं होंगे। रेलवे बोर्ड ने समायोजन को लेकर नई नीति बनाई है। दो चरणों में इसे लागू किया जाएगा। पहले चरण में आरक्षण और बुकिंग क्लर्क के कार्यक्षेत्र को समायोजित किया जाएगा। दूसरे चरण में 22 फरवरी 2018 से नियुक्त टीटीई को इसमें शामिल किया जाएगा। इस सर्कुलर से पूर्वोत्तर रेलवे के करीब 500 से ज्यादा टीटीई को राहत मिली है।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के क्रम में वाणिज्य विभाग में मिश्रित कैडर बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कर्मचारी संगठनों का आरोप था कि लखनऊ मंडल में रेलवे बोर्ड के नियम को दरकिनार कर समायोजन किया गया है। एआईआरएफ और एनएफआईआर के पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (कार्मिक) के सामने कर्मचारियों की बातें रखीं। तर्क दिया कि अगर सभी का विलय होता है तो वरिष्ठता में दिक्कत आएगी। इसे लेकर 15 जनवरी को कार्यवृत्ति जारी की गई।
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यूनियनों में श्रेय लेने की होड़
गोरखपुर। समायोजन में टीटीई को छूट के मामले में दो रेल संगठनों में श्रेय लेने की होड़ लग गई है। पीआरकेएस के महामंत्री विनोद कुमार राय का दावा है कि एनएफआईआर ने इस मामले को पर दबाव बनाया था। इसी वजह से 22 फरवरी 2018 के पूर्व नियुक्ति पाए वाणिज्य और आरक्षण लिपिकों की वरिष्ठता अलग-अलग रखी गई। इससे उनके पदोन्नति के अवसर प्रभावित नहीं होेंगे। वहीं, एनई रेलवे मजदूर यूनियन के लखनऊ मंडल अध्यक्ष एसपी सिंह एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव टीएन पांडेय का कहना है कि संगठन ने डीआरएम पर दबाव बनाया जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। कुछ यूनियन झूठा श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।
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