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प्राचार्य के आरोपों पर गुआक्टा मुखर
Updated Sun, 30 Jul 2017 09:36 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रबंधन वाले महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज के प्राचार्य की ओर से बीएड प्रैक्टिकल के परीक्षकों पर लगाए गए आरोपों पर गुआक्टा शिक्षक संघ मुखर हो गया है। रविवार को प्रेसवार्ता कर गोरखपुर विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) ने तीनों परीक्षकों पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कॉलेज प्राचार्य पर ही अनावश्यक तरीके से परीक्षकों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
अध्यक्ष डॉ. एसएन शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक किसी परीक्षक के लिए किसी विद्यार्थी का नाम जानना तथा किसी बाहरी व्यक्ति से परीक्षकों का नाम जानना संभव नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो कॉलेज की संलिप्तता के बिना यह संभव नहीं है। वहीं प्रैक्टिकल के दौरान कॉलेज का कोई वरिष्ठ शिक्षक वहां मौजूद नहीं रह सकता है, तो बीएड प्रभारी वहां क्या कर रही थीं। उन्हें कैसे पता चला कि विद्यार्थी को 180 नंबर दिए गए। प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव की ओर से किस विद्यार्थी को ज्यादा नंबर दिए गए इसका उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं प्राचार्य ने शुचितापूर्ण परीक्षा कराने के लिए परीक्षकों को प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया। प्रैक्टिकल में अगर घालमेल हुआ तो उन्हें प्रमाण पत्र जारी नहीं करना चाहिए। महामंत्री डॉ. केडी तिवारी ने बताया कि कॉलेज की ओर से खुद ही रिजल्ट तैयार कर एक सूची परीक्षकों को थमाई गई थी। सूची के हिसाब से नंबर देने का निर्देश दिया गया। परीक्षकों ने जब इसे नियम विरुद्ध मानते हुए मना कर दिया तो प्राचार्य ने अनर्गल आरोप लगा दिए।
क्या था मामला
महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ में पिछले दिनों बीएड सेकेंड ईयर के प्रैक्टिकल हुआ था। प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखकर गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बाहरी और आंतरिक परीक्षकों पर प्रैक्टिकल में मनमानी का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर आई सिफारिश ने परीक्षकों ने एक छात्र को 200 में से 180 नंबर दे दिए। विभागाध्यक्ष ने विरोध किया तो कुछ मार्क्स घटा दिए। परीक्षकों ने टीए, डीए की मांग भी की। प्राचार्य ने प्रैक्टिकल को निरस्त कर इसे नए सिरे से कराने की मांग की थी। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी ने कमेटी का गठन कर मामले की जांच करा रही है।
अध्यक्ष डॉ. एसएन शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक किसी परीक्षक के लिए किसी विद्यार्थी का नाम जानना तथा किसी बाहरी व्यक्ति से परीक्षकों का नाम जानना संभव नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो कॉलेज की संलिप्तता के बिना यह संभव नहीं है। वहीं प्रैक्टिकल के दौरान कॉलेज का कोई वरिष्ठ शिक्षक वहां मौजूद नहीं रह सकता है, तो बीएड प्रभारी वहां क्या कर रही थीं। उन्हें कैसे पता चला कि विद्यार्थी को 180 नंबर दिए गए। प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव की ओर से किस विद्यार्थी को ज्यादा नंबर दिए गए इसका उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं प्राचार्य ने शुचितापूर्ण परीक्षा कराने के लिए परीक्षकों को प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया। प्रैक्टिकल में अगर घालमेल हुआ तो उन्हें प्रमाण पत्र जारी नहीं करना चाहिए। महामंत्री डॉ. केडी तिवारी ने बताया कि कॉलेज की ओर से खुद ही रिजल्ट तैयार कर एक सूची परीक्षकों को थमाई गई थी। सूची के हिसाब से नंबर देने का निर्देश दिया गया। परीक्षकों ने जब इसे नियम विरुद्ध मानते हुए मना कर दिया तो प्राचार्य ने अनर्गल आरोप लगा दिए।
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क्या था मामला
महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ में पिछले दिनों बीएड सेकेंड ईयर के प्रैक्टिकल हुआ था। प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखकर गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बाहरी और आंतरिक परीक्षकों पर प्रैक्टिकल में मनमानी का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर आई सिफारिश ने परीक्षकों ने एक छात्र को 200 में से 180 नंबर दे दिए। विभागाध्यक्ष ने विरोध किया तो कुछ मार्क्स घटा दिए। परीक्षकों ने टीए, डीए की मांग भी की। प्राचार्य ने प्रैक्टिकल को निरस्त कर इसे नए सिरे से कराने की मांग की थी। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी ने कमेटी का गठन कर मामले की जांच करा रही है।
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