{"_id":"59385f8a4f1c1b1e2d8b45a2","slug":"21496866698-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"60 ऑपरेशन, इस्तेमाल हुए सिर्फ एक यूनिट ब्लड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
60 ऑपरेशन, इस्तेमाल हुए सिर्फ एक यूनिट ब्लड
Updated Thu, 08 Jun 2017 01:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
महिला अस्पताल से प्रसूताओं के लिए खून की डिमांड न आना अब अफसरों को खटकने लगा है। मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण करने आईं भारत सरकार के ब्लड सेल की सलाहकार एवं समन्वयक डॉ. विनीता श्रीवास्तव ने इस पर हैरत जताते हुए इसकी पड़ताल की जरूरत बताई तो बुधवार को जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण कर गर्भवती और प्रसूताओं के संबंध में रिपोर्ट तलब की।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने बताया कि डॉ. विनीता ने मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक व ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल से ब्लड की जितनी डिमांड आनी चाहिए, उतनी नहीं आ रही है। इस पर बुधवार को जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। जांच में पाया कि महिला अस्पताल में 360 प्रसव कराए गए हैं, जिसमें से 60 सीजेरियन हैं। इस अवधि में जिला महिला अस्पताल से सिर्फ एक यूनिट ब्लड की डिमांड की गई है। सवाल ये है कि क्या प्रसूताओं को खून की जरूरत नहीं पड़ रही है। क्या उनका हीमोग्लोबिन लेवल इतना बेहतरीन है या फिर निजी ब्लड बैंक से खून मंगाया जा रहा है। बता दें जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कई ग्रुप के ब्लड अधिक हो गए हैं। ब्लड को खराब होने से बचाने के लिए इन दिनों सिर्फ यूजर जार्च लेकर ब्लड दिया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल के एसआईसी से मांगी जानकारी
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने बताया कि डॉ. विनीता की सलाह पर जिला महिला अस्पताल के एसआईसी से गर्भवतियों व प्रसूताओं से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। महिला अस्पताल के एसआईसी ने भरोसा दिलाया कि है वे जल्द ही यह जानकारी उपलब्ध करा देंगे कि कितनी गर्भवतियों के हीमोग्लोबिन की जांच हुई है और कितनी में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम से कम है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर।
महिला अस्पताल से प्रसूताओं के लिए खून की डिमांड न आना अब अफसरों को खटकने लगा है। मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण करने आईं भारत सरकार के ब्लड सेल की सलाहकार एवं समन्वयक डॉ. विनीता श्रीवास्तव ने इस पर हैरत जताते हुए इसकी पड़ताल की जरूरत बताई तो बुधवार को जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण कर गर्भवती और प्रसूताओं के संबंध में रिपोर्ट तलब की।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने बताया कि डॉ. विनीता ने मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक व ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल से ब्लड की जितनी डिमांड आनी चाहिए, उतनी नहीं आ रही है। इस पर बुधवार को जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। जांच में पाया कि महिला अस्पताल में 360 प्रसव कराए गए हैं, जिसमें से 60 सीजेरियन हैं। इस अवधि में जिला महिला अस्पताल से सिर्फ एक यूनिट ब्लड की डिमांड की गई है। सवाल ये है कि क्या प्रसूताओं को खून की जरूरत नहीं पड़ रही है। क्या उनका हीमोग्लोबिन लेवल इतना बेहतरीन है या फिर निजी ब्लड बैंक से खून मंगाया जा रहा है। बता दें जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कई ग्रुप के ब्लड अधिक हो गए हैं। ब्लड को खराब होने से बचाने के लिए इन दिनों सिर्फ यूजर जार्च लेकर ब्लड दिया जा रहा है।
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल के एसआईसी से मांगी जानकारी
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने बताया कि डॉ. विनीता की सलाह पर जिला महिला अस्पताल के एसआईसी से गर्भवतियों व प्रसूताओं से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। महिला अस्पताल के एसआईसी ने भरोसा दिलाया कि है वे जल्द ही यह जानकारी उपलब्ध करा देंगे कि कितनी गर्भवतियों के हीमोग्लोबिन की जांच हुई है और कितनी में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम से कम है।
विज्ञापन