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टोकन व्यवस्था फेल, ट्रेन आते मची अफरातफरी
Fri, 29 Mar 2019 01:20 AM IST
ajay Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: ajay Kumar
Updated Fri, 29 Mar 2019 01:20 AM IST
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गुरुवार को जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई, सामान लेकर यात्री बोगी की तरफ दौैड़ पडे़। सीट कब्जा करने के चक्कर में दिव्यांग और महिलाओं को भी धकेल दिया। कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल हो गया। पांच मिनट में ही जनरल श्रेणी की सभी बोगियां भर गई। टोकन लेकर लाइन में लगे बहुत सारे यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं सके।
दिल्ली जाने के लिए गोरखधाम एक्सप्रेस ही एक ऐसी ट्रेन है जो रोजाना गोरखपुर से ही चलती है। हिसार तक जाने वाली इस ट्रेन में भीड़ हमेशा रहती है। होली के बाद वापसी की भीड़ बढ़ जाने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इधर, ट्रेन में जबसे एचएचबी कोच लगाए गए हैं तबसे महिला और विकलांग के लिए अलग कोच हटा दिए गए हैं। व्यवस्था को संभालने के लिए गुरुवार से टोकन सिस्टम शुरू किया गया था। टोकन तो दिए गए लेकिन उसके हिसाब से कोच में बैठाने में रेल प्रशासन विफल रहा। हालांकि यात्रियों को टोकन नंबर के हिसाब से लाइन में लगवाकर आरपीएफ इंस्पेक्टर रणजीत और जीआरपी के सब इंस्पेक्टर विजय बहादुर यादव खुद खड़े रहे। लेकिन जैसे ही ट्रेन आई पीछे की तरफ से भीड़ कोच की ओर दौैड़ पड़ी।
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दिल्ली जाने के लिए गोरखधाम एक्सप्रेस ही एक ऐसी ट्रेन है जो रोजाना गोरखपुर से ही चलती है। हिसार तक जाने वाली इस ट्रेन में भीड़ हमेशा रहती है। होली के बाद वापसी की भीड़ बढ़ जाने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इधर, ट्रेन में जबसे एचएचबी कोच लगाए गए हैं तबसे महिला और विकलांग के लिए अलग कोच हटा दिए गए हैं। व्यवस्था को संभालने के लिए गुरुवार से टोकन सिस्टम शुरू किया गया था। टोकन तो दिए गए लेकिन उसके हिसाब से कोच में बैठाने में रेल प्रशासन विफल रहा। हालांकि यात्रियों को टोकन नंबर के हिसाब से लाइन में लगवाकर आरपीएफ इंस्पेक्टर रणजीत और जीआरपी के सब इंस्पेक्टर विजय बहादुर यादव खुद खड़े रहे। लेकिन जैसे ही ट्रेन आई पीछे की तरफ से भीड़ कोच की ओर दौैड़ पड़ी।
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400 को ही मिल पाया टोकन
गोरखधाम एक्सप्रेस की जनरल बोगी में चढ़ने के लिए सिर्फ 400 यात्रियों को ही टोकन मिल पाया। प्रिंट रोल खत्म हो जाने के कारण इसके बाद टोकन नहीं दिया गया। जब ट्रेन आई तो 1000 से ज्यादा की भीड़ थी। टोकन वाले लाइन में लगे जबकि पीछे की ओर से यात्री बोगियों में चढ़ गए।
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