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एम्स में अगले सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई
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गोरखपुर एम्स में अगले सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई
- 183 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
- अमृत फार्मेसी का केंद्र जल्द खुलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में अगले शैक्षिक सत्र (2019-20) से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी। पहली बार 50 सीटें भरी जाएंगी, फिर 50 और विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा। एम्स के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा ने बताया कि 183 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जुलाई, 2019 तक एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी।
निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा और उप निदेशक एनआर विश्नोई ने बृहस्पतिवार को एम्स की ओपीडी का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्यों की जानकारी ली। निदेशक ने बताया कि अमृत फार्मेसी का केंद्र जल्द ही एम्स परिसर में खोला जाएगा, ताकि मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं मिल सकें। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांचें कराई जा रहीं हैं। ओपीडी भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रेडियो थेरेपी, सिटी स्कैन सहित अन्य मशीनें लगाई जाएंगी। निर्धारित समय सीमा पर इमरजेंसी सेवा शुरू होगी। बेहतर चिकित्सा, शोध और पढ़ाई हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। चिकित्सक के साथ ही सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट का व्यवहार मरीजों से अच्छा होगा।
ऑनलाइन जमा होगी फीस
निदेशक ने कहा कि पंजीकरण की फीस जल्द ही ऑनलाइन जमा होगी। इसकी व्यवस्था बनाई जा रही है। अभी वेबसाइट www.aiims.gorakhpur.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराया जा सकता है। ऑनलाइन फीस जमा करने की सुविधा मिली तो एम्स आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजीकरण के बाद घर बैठे भी फीस जमा की जा सकेगी। ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए आना होगा।
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सात हजार से ज्यादा मरीजों का पंजीकरण पत्र
एम्स की ओपीडी 24 फरवरी से चल रही है। अब तक 7564 मरीजों को पंजीकरण पत्र दिया गया है। 2564 मरीजों को ओपीडी पर्ची मिली है। यदि ऑनलाइन पंजीकरण का आंकड़ा लिया तो संख्या 17 हजार से ज्यादा होगी। हालांकि ऑनलाइन पंजीकरण करवाने वालों ने अभी तक पंजीकरण पत्र नहीं प्राप्त किया है। बृहस्पतिवार को 436 मरीजों ने ऑफलाइन पंजीकरण कराया तो ऑनलाइन 800 से ज्यादा पंजीकरण कराए गए।
मरीज ही आएं, सिर्फ पंजीकरण से फायदा नहीं
निदेशक ने कहा कि एम्स में पंजीकरण की प्रक्रिया चलती रहेगी। जो मरीज हैं, वही ओपीडी में दिखवाने आएं। सेहतमंद लोगों के पंजीकरण से कोई फायदा नहीं है। ज्यादा भीड़ से मरीजों को दिक्कत होती है। पंजीकरण एक साल के लिए मान्य होता है, फिर नवीनीकरण कराना पड़ता है। मरीजों के साथ ही तीमारदारों के रहने का इंतजाम भी किया जाएगा। परिसर में ही धर्मशाला बनवाया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस से निपटने की विशेष रणनीति
निदेशक ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के इलाज के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। पूर्वांचल की बीमारी से प्रभावी तरीके से निपटा जाए, इस पर शोध भी होगा। चिकित्सा की सरकारी व्यवस्था ने बूम किया है। छह नए एम्स खुले हैं। इसका मतलब है कि 6000 मरीजों के इलाज की व्यवस्था हुई है। इसे बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।
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गोरखपुर एम्स में अगले सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई
- 183 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
- अमृत फार्मेसी का केंद्र जल्द खुलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में अगले शैक्षिक सत्र (2019-20) से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी। पहली बार 50 सीटें भरी जाएंगी, फिर 50 और विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा। एम्स के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा ने बताया कि 183 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जुलाई, 2019 तक एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी।
निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा और उप निदेशक एनआर विश्नोई ने बृहस्पतिवार को एम्स की ओपीडी का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्यों की जानकारी ली। निदेशक ने बताया कि अमृत फार्मेसी का केंद्र जल्द ही एम्स परिसर में खोला जाएगा, ताकि मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं मिल सकें। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांचें कराई जा रहीं हैं। ओपीडी भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रेडियो थेरेपी, सिटी स्कैन सहित अन्य मशीनें लगाई जाएंगी। निर्धारित समय सीमा पर इमरजेंसी सेवा शुरू होगी। बेहतर चिकित्सा, शोध और पढ़ाई हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। चिकित्सक के साथ ही सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट का व्यवहार मरीजों से अच्छा होगा।
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ऑनलाइन जमा होगी फीस
निदेशक ने कहा कि पंजीकरण की फीस जल्द ही ऑनलाइन जमा होगी। इसकी व्यवस्था बनाई जा रही है। अभी वेबसाइट www.aiims.gorakhpur.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराया जा सकता है। ऑनलाइन फीस जमा करने की सुविधा मिली तो एम्स आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजीकरण के बाद घर बैठे भी फीस जमा की जा सकेगी। ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए आना होगा।
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सात हजार से ज्यादा मरीजों का पंजीकरण पत्र
एम्स की ओपीडी 24 फरवरी से चल रही है। अब तक 7564 मरीजों को पंजीकरण पत्र दिया गया है। 2564 मरीजों को ओपीडी पर्ची मिली है। यदि ऑनलाइन पंजीकरण का आंकड़ा लिया तो संख्या 17 हजार से ज्यादा होगी। हालांकि ऑनलाइन पंजीकरण करवाने वालों ने अभी तक पंजीकरण पत्र नहीं प्राप्त किया है। बृहस्पतिवार को 436 मरीजों ने ऑफलाइन पंजीकरण कराया तो ऑनलाइन 800 से ज्यादा पंजीकरण कराए गए।
मरीज ही आएं, सिर्फ पंजीकरण से फायदा नहीं
निदेशक ने कहा कि एम्स में पंजीकरण की प्रक्रिया चलती रहेगी। जो मरीज हैं, वही ओपीडी में दिखवाने आएं। सेहतमंद लोगों के पंजीकरण से कोई फायदा नहीं है। ज्यादा भीड़ से मरीजों को दिक्कत होती है। पंजीकरण एक साल के लिए मान्य होता है, फिर नवीनीकरण कराना पड़ता है। मरीजों के साथ ही तीमारदारों के रहने का इंतजाम भी किया जाएगा। परिसर में ही धर्मशाला बनवाया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस से निपटने की विशेष रणनीति
निदेशक ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के इलाज के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। पूर्वांचल की बीमारी से प्रभावी तरीके से निपटा जाए, इस पर शोध भी होगा। चिकित्सा की सरकारी व्यवस्था ने बूम किया है। छह नए एम्स खुले हैं। इसका मतलब है कि 6000 मरीजों के इलाज की व्यवस्था हुई है। इसे बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।