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150 एकड़ भूमि आवंटन की शासन ने शुरू की जांच
Tue, 22 Jan 2019 12:28 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Tue, 22 Jan 2019 12:28 AM IST
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150 एकड़ भूमि के आवंटन की विजिलेंस जांच से पहले शासन स्तर से जांच शुरू हो गई है।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र में शहर के एक उद्यमी और एक बिल्डर को 150 एकड़ भूमि के आवंटन की विजिलेंस जांच से पहले शासन स्तर से जांच शुरू हो गई है। तीन सदस्यीय अफसरों की कमेटी ने सोमवार की देर शाम तक जीडीए दफ्तर में मामले से जुड़े अभिलेख देखे। कमेटी मंगलवार को भी कुछ फाइलों की जांच के बाद लखनऊ लौटेगी। जीडीए सचिव ने आवंटन में पूर्व के अफसरों की ओर से गड़बड़ी का हवाला देते हुए शासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। इसपर 17 जनवरी को प्रमुख सचिव आवास ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को जांच देने के साथ ही शासन स्तर पर भी जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी थी।
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क्या है मामला
प्राधिकरण ने वर्ष 1997 में 150 एकड़ भूमि मेसर्स जालान कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव्या कॉलोनाइजर्स को नीलामी में दी थी। मेसर्स जालान ने 8 करोड़ 31 लाख रुपये और भव्या कॉलोनाइजर्स ने लगभग 5 करोड़ रुपये चुकाए थे। बाद में ब्याज का मामला फंसा जिसपर उद्योगपति और बिल्डर कोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट दोनों ही जगह जीडीए को इस मामले में शिकस्त मिली। कोर्ट ने उद्यमी और बिल्डर के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कराने का आदेश दिया था। इसका पालन नहीं होने पर उद्यमी और बिल्डर की तरफ से हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में अवमानना याचिका भी दाखिल की जा चुकी है। अभी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है।
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