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शोक में थी महिला, दूसरे के नाम हो गई प्लाट की रजिस्ट्री
Sat, 22 Dec 2018 01:08 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Sat, 22 Dec 2018 01:08 AM IST
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गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। पति की मौत के बाद शोक में डूबी महिला को जालसाजी का शिकार बना लिया गया। गमगीन माहौल से उबरने के बाद पीड़ित को पता चला कि ले-देकर पास बचे प्लाट की रजिस्ट्री दूसरे के नाम हो गई। जीडीए की शुरूआती जांच में आवास आवंटन और रजिस्ट्रेशन आदि से जुड़े दस्तावेजों में भी छेड़छाड़ पाई गई है। उपाध्यक्ष अमित सिंह बंसल के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
कमेटी को तीन सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में संपत्ति अनुभाग के कर्मचारियों के साथ ही कुछ अन्य पर भी कार्रवाई हो सकती है। उधर पीड़िता ने हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की है। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 19 दिसंबर 2018 को जीडीए से इस मामले में तीन महीने के भीतर आख्या मांगी है। इस बारे में जीडीए के सचिव रामसिंह गौतम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। आरोप सही पाए गए तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही बैनामा निरस्त कराने की भी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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कमेटी को तीन सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में संपत्ति अनुभाग के कर्मचारियों के साथ ही कुछ अन्य पर भी कार्रवाई हो सकती है। उधर पीड़िता ने हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की है। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 19 दिसंबर 2018 को जीडीए से इस मामले में तीन महीने के भीतर आख्या मांगी है। इस बारे में जीडीए के सचिव रामसिंह गौतम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। आरोप सही पाए गए तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही बैनामा निरस्त कराने की भी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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यह है मामला
जीडीए की गौतम विहार आवासीय योजना में अंजनी देवी के नाम एचआईजी का प्लाट नंबर 14 आवंटित हुआ था। आवंटन के बाद जमीन की रजिस्ट्री होनी बाकी थी। करीब पांच-छह साल पहले उनके पति रमेश वर्मा की मौत हो गई। काफी दिनों तक अवसाद में रहने के बाद जब अंजनी हाल ही में प्लाट की रजिस्ट्री कराने जीडीए पहुंचीं तो दंग रह गई। पता चला कि उनके पति के नाम से ही एक दूसरे व्यक्ति को जमीन रजिस्ट्री हो चुकी है। जबकि जमीन का आवंटन अंजनी देवी के नाम से हुआ था। यही नहीं, जिस दूसरे रमेश वर्मा के नाम रजिस्ट्री हुई है, उसके पिता का नाम भी अंजनी के ससुर के नाम से अलग है।
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