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आध्यात्मिक परंपरा को नया आयाम देगी श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:40 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के संत और ऋषियों ने आध्यात्मिक क्षेत्र में पूरी दुनिया का नेतृत्व किया। योग को यूएनओ की मान्यता भी संत व ऋषि परंपरा का ही प्रसाद है। गुरू गोरखनाथ का राजवंश से लेकर झोपड़ी में रहने वालों पर समान प्रभाव था। गुरू श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ देश की आध्यात्मिक परंपरा को नया आयाम देगी। यहां शोधार्थी देश और दुनिया में नाथपंथ से जुड़े साहित्य और आध्यात्म पर शोध कर सकेंगे और ज्यादा से ज्यादा जानकारियां सामने आएंगी।
मुख्यमंत्री ने इसके पूर्व शुक्रवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ का शिलान्यास, शोधपीठ की वेबसाइट और डॉ. प्रदीप राव की पुस्तक नाथपंथ का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के योग संगम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा रही है। हमारेे सामने शैक्षिक गुणवत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। गुरू गोरखनाथ कहते थे कि हमारे शरीर में ही ये क्षमता है कि हम एक जगह बैठकर संपूर्ण ब्रह्मांड के रहस्य को खुद की चेतना के जरिये महसूस कर सकते हैं। इसी से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग की विभिन्न मुद्राओं में आसन का महत्व है। आसन से एकाग्रचित होकर धैर्य से आगे बढ़ सकते हैं। विधार्थियों को इसका ख्याल रखना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो वीके सिंह ने नाथपंथ और विश्वविद्यालय की प्रगति की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह तथा आभार ज्ञापन डॉ. केशव सिंह ने किया।
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इस अवसर पर सांसद शरद त्रिपाठी, राजसपंर्क अधिकारी अंशुमाली शर्मा, एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. एसएन सिंह, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने इसके पूर्व शुक्रवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ का शिलान्यास, शोधपीठ की वेबसाइट और डॉ. प्रदीप राव की पुस्तक नाथपंथ का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के योग संगम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा रही है। हमारेे सामने शैक्षिक गुणवत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। गुरू गोरखनाथ कहते थे कि हमारे शरीर में ही ये क्षमता है कि हम एक जगह बैठकर संपूर्ण ब्रह्मांड के रहस्य को खुद की चेतना के जरिये महसूस कर सकते हैं। इसी से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि योग की विभिन्न मुद्राओं में आसन का महत्व है। आसन से एकाग्रचित होकर धैर्य से आगे बढ़ सकते हैं। विधार्थियों को इसका ख्याल रखना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो वीके सिंह ने नाथपंथ और विश्वविद्यालय की प्रगति की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह तथा आभार ज्ञापन डॉ. केशव सिंह ने किया।
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इस अवसर पर सांसद शरद त्रिपाठी, राजसपंर्क अधिकारी अंशुमाली शर्मा, एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. एसएन सिंह, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।