{"_id":"5bfc55c3bdec2241ba2c6bbd","slug":"191543263683-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम मोदी के मन की बात का हिस्सा बनें शहर के युवा उद्यमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम मोदी के मन की बात का हिस्सा बनें शहर के युवा उद्यमी
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
‘मन की बात’ का हिस्सा बने शहर के युवा उद्यमी
- नई दिल्ली जाकर सुनाई अपनी सफलता की कहानी
- बोले, 30 हजार से काम शुरू किया, अब कंपनियों का टर्नओवर करीब 10 करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर के युवा उद्यमी एवं वीएन बालाजी ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक अभिषेक पांडेय गत रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 50वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम का हिस्सा बने और अपनी सफलता की कहानी बताई। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अभिषेक ने कहा कि मुद्रा योजना ने उन जैसे युवाओं की किस्मत बदल दी है। 2014 तक संघर्ष करने वाला युवा अब करीब 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर की कंपनियों का मालिक है। 150 युवाओं को रोजगार दिया है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अभिषेक पहले भी पीएम के मन की बात का हिस्सा बन चुके हैं।
वीएन बालाजी समूह तीन कंपनियों का संचालन करता है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए, फिर लखनऊ से एमबीए करने वाले अभिषेक पांडेय ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। कुछ दिन दफ्तर गए लेकिन उद्यमिता अपनाने की चाह ने नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बकौल, अभिषेक 30 हजार रुपये की लागत से कंपनी की नींव रखी थी। इसी बीच टेलीफोन लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मुद्रा योजना की जानकारी हुई तो 2017 में 70-80 लाख रुपये की मदद ली। इसका बड़ा फायदा मिला। टर्नओवर के साथ रोजगार की संभावनाएं बढ़ीं। मन की बात के 50वें एपीसोड के प्रसारण से पहले प्रधानमंत्री की तरफ से देश के 30 युवा उद्यमियों को नई दिल्ली बुलाया गया। गोरखपुर से उनकी उपस्थिति रही। कुछ देर बाद सक्सेस स्टोरी भी बताई। साथ ही कहा कि 10 हजार प्रोफेशनल तैयार करने का इरादा है। उन युवाओं को जोड़ने की मुहिम चल रही है, जिनके सपने बड़े हैं। जो पढ़ाई के बाद नौकरी के पीछे नहीं भागना चाहते हैं, बल्कि उद्यमिता अपनाकर रोजगार देने की सोचते हैं।
अभिषेक ने अपनी सफलता के पीछे शिक्षक पिता सर्वेश पांडेय, गृहणी मां बिंदू पांडेय और भाई अनुराग पांडेय का बड़ा हाथ बताया है। साथ ही कहा कि खेती-किसानी करने वाले दादा अवधेश पांडेय और दादी दुर्गावती से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन
‘मन की बात’ का हिस्सा बने शहर के युवा उद्यमी
- नई दिल्ली जाकर सुनाई अपनी सफलता की कहानी
- बोले, 30 हजार से काम शुरू किया, अब कंपनियों का टर्नओवर करीब 10 करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर के युवा उद्यमी एवं वीएन बालाजी ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक अभिषेक पांडेय गत रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 50वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम का हिस्सा बने और अपनी सफलता की कहानी बताई। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अभिषेक ने कहा कि मुद्रा योजना ने उन जैसे युवाओं की किस्मत बदल दी है। 2014 तक संघर्ष करने वाला युवा अब करीब 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर की कंपनियों का मालिक है। 150 युवाओं को रोजगार दिया है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अभिषेक पहले भी पीएम के मन की बात का हिस्सा बन चुके हैं।
वीएन बालाजी समूह तीन कंपनियों का संचालन करता है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए, फिर लखनऊ से एमबीए करने वाले अभिषेक पांडेय ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। कुछ दिन दफ्तर गए लेकिन उद्यमिता अपनाने की चाह ने नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बकौल, अभिषेक 30 हजार रुपये की लागत से कंपनी की नींव रखी थी। इसी बीच टेलीफोन लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मुद्रा योजना की जानकारी हुई तो 2017 में 70-80 लाख रुपये की मदद ली। इसका बड़ा फायदा मिला। टर्नओवर के साथ रोजगार की संभावनाएं बढ़ीं। मन की बात के 50वें एपीसोड के प्रसारण से पहले प्रधानमंत्री की तरफ से देश के 30 युवा उद्यमियों को नई दिल्ली बुलाया गया। गोरखपुर से उनकी उपस्थिति रही। कुछ देर बाद सक्सेस स्टोरी भी बताई। साथ ही कहा कि 10 हजार प्रोफेशनल तैयार करने का इरादा है। उन युवाओं को जोड़ने की मुहिम चल रही है, जिनके सपने बड़े हैं। जो पढ़ाई के बाद नौकरी के पीछे नहीं भागना चाहते हैं, बल्कि उद्यमिता अपनाकर रोजगार देने की सोचते हैं।
विज्ञापन
अभिषेक ने अपनी सफलता के पीछे शिक्षक पिता सर्वेश पांडेय, गृहणी मां बिंदू पांडेय और भाई अनुराग पांडेय का बड़ा हाथ बताया है। साथ ही कहा कि खेती-किसानी करने वाले दादा अवधेश पांडेय और दादी दुर्गावती से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
विज्ञापन