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आरक्षण ने तोड़ी कई धुरंधरों की आस
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:32 AM IST
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गोरखपुर।
नगर निगम चुनाव की आरक्षण सूची से कई धुरंधरों की आस टूट गई। इनमें सबसे ज्यादा असर भाजपा के निवर्तमान पार्षदों पर पड़ा है।
भाजपा के वीर सिंह सोनकर, रणंजय सिंह जुगनू, ममता लाल यादव, धर्मदेव चौहान, रमेश गुप्ता और बृजेश पाल बिना लड़े ही मैदान से बाहर हो गए। सपा के भी कई दिग्गजों को आरक्षण सूची ने निराश किया है। इनमें चार बार पार्षद रहे और सपा पार्षद दल के नेता संजय सिंह भी शामिल हैं। इस बार रुस्तमपुर वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सपा के एक और दिग्गज हीरालाल यादव भी चुनाव नहीं लड़ सकते और ना ही अपनी पत्नी को लड़ा सकते हैं क्योंकि इस बार यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
पिछली बार चुनाव न लड़ने का मलाल पाले कई धुरंधर इस बार फिर से नगर निकाय के चुनाव में ताल ठोक सकते हैं। शाहपुर वार्ड अनारक्षित कर दिया गया है। हालांकि, शाहपुर वार्ड से चंद्रशेखर सिंह की मां ही इस बार पार्षद हैं लेकिन अनारक्षित होने की वजह से चंदशेखर सिंह इस वार्ड से मैदान में उतर सकते हैं। महुई सुघरपुर को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में इस वार्ड से रामदयाल फिर से मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि रामदयाल ने अपनी पत्नी को पिछला चुनाव लड़ाकर जीत हासिल कर ली थी।
नगर निगम चुनाव की आरक्षण सूची से कई धुरंधरों की आस टूट गई। इनमें सबसे ज्यादा असर भाजपा के निवर्तमान पार्षदों पर पड़ा है।
भाजपा के वीर सिंह सोनकर, रणंजय सिंह जुगनू, ममता लाल यादव, धर्मदेव चौहान, रमेश गुप्ता और बृजेश पाल बिना लड़े ही मैदान से बाहर हो गए। सपा के भी कई दिग्गजों को आरक्षण सूची ने निराश किया है। इनमें चार बार पार्षद रहे और सपा पार्षद दल के नेता संजय सिंह भी शामिल हैं। इस बार रुस्तमपुर वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सपा के एक और दिग्गज हीरालाल यादव भी चुनाव नहीं लड़ सकते और ना ही अपनी पत्नी को लड़ा सकते हैं क्योंकि इस बार यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
पिछली बार चुनाव न लड़ने का मलाल पाले कई धुरंधर इस बार फिर से नगर निकाय के चुनाव में ताल ठोक सकते हैं। शाहपुर वार्ड अनारक्षित कर दिया गया है। हालांकि, शाहपुर वार्ड से चंद्रशेखर सिंह की मां ही इस बार पार्षद हैं लेकिन अनारक्षित होने की वजह से चंदशेखर सिंह इस वार्ड से मैदान में उतर सकते हैं। महुई सुघरपुर को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में इस वार्ड से रामदयाल फिर से मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि रामदयाल ने अपनी पत्नी को पिछला चुनाव लड़ाकर जीत हासिल कर ली थी।
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