{"_id":"5975f8de4f1c1b13158b47fd","slug":"191500903646-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन सौ से अधिक प्रधानों पर लटकी तलवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन सौ से अधिक प्रधानों पर लटकी तलवार
Updated Mon, 24 Jul 2017 07:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। गांवों को ओडीएफ कराने के लिए मिले धन का उपयोग नहीं करने से नाराज जिलाधिकारी ने 314 प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्होंने पूछा है कि क्यों न उनके पॉवर सीज कर उनकी ग्रामसभा में त्रिस्तरीय समिति का गठन कर दिया जाए।
नोटिस में डीएम ने कहा है कि कुछ समय पहले गोरखपुर के समस्त सहायक विकास अधिकारी से स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के ग्राम निधि छह की जानकारी मांगी गई थी। कहा गया था कि खाता चेक कर उपलब्ध धनराशि की जानकारी दें। उनके द्वारा जो जानकारी मिली, उसके अनुसार 314 प्रधानों के खाते में तीन लाख से अधिक की धनराशि अब भी पड़ी है, जबकि शासन ने जिले को 31 दिसंबर तक खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य तय कर रखा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकता वाले कार्य में उनकी कोई रुचि नहीं है। प्रधान अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
इसलिए एक सप्ताह के अंदर वे स्पष्ट करें कि क्यों न सरकारी कार्य न करने के लिए पंचायतीराज अधिनियम एवं नियमावली 1947 के तहत उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए जाए और उनकी ग्रामसभा में त्रिस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया जाए। इस संबंध में जिला पंचायतीराज अधिकारी आरके भारती ने बताया कि प्रधानों को दी गई नोटिस के जवाब का इंतजार है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई तय है।
नोटिस में डीएम ने कहा है कि कुछ समय पहले गोरखपुर के समस्त सहायक विकास अधिकारी से स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के ग्राम निधि छह की जानकारी मांगी गई थी। कहा गया था कि खाता चेक कर उपलब्ध धनराशि की जानकारी दें। उनके द्वारा जो जानकारी मिली, उसके अनुसार 314 प्रधानों के खाते में तीन लाख से अधिक की धनराशि अब भी पड़ी है, जबकि शासन ने जिले को 31 दिसंबर तक खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य तय कर रखा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकता वाले कार्य में उनकी कोई रुचि नहीं है। प्रधान अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन
इसलिए एक सप्ताह के अंदर वे स्पष्ट करें कि क्यों न सरकारी कार्य न करने के लिए पंचायतीराज अधिनियम एवं नियमावली 1947 के तहत उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए जाए और उनकी ग्रामसभा में त्रिस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया जाए। इस संबंध में जिला पंचायतीराज अधिकारी आरके भारती ने बताया कि प्रधानों को दी गई नोटिस के जवाब का इंतजार है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई तय है।
विज्ञापन