कम्हरियाघाट के पीपा पुल से सरयू में गिरी कार, दंपती समेत तीन की मौत
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हादसे की जद में आकर जान गंवाने वाले ट्रांसपोर्टर रामज्ञा यादव (42) मूलत: बेलघाट के दुदहिया गांव के रहने वाले थे। शुक्रवार को अपनी कार से इलाहाबाद से सफर शुरू करके अंबेडकर नगर होते हुए रात करीब आठ बजे कम्हरिया घाट के करीब पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घाट से सटे पीपा पुल पर चढ़ते वक्त कार एकाएक असंतुलित हुई और सरयू में जा पलटी। कार में उनके साथ पत्नी हौसिला देवी (40), छोटा बेटा अभय, साले राम भागवत यादव, साढ़ू का पुत्र नंद किशोर (28) सवार थे। कार पलटते समय दरवाजा खुलने से अगली सीट पर बैठे अभय और राम भागवत पुल का हिस्सा पकड़ कर लटक गए। नजदीक मौजूद लोगों ने दौड़कर सहारा दिया और उन्हें ऊपर खींचकर बचा लिया।
सरयू में समाई कार से लोगों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने रस्सा डाला और पुलिस से मदद मांगी।
पुलिस ने जेसीबी मशीन की मदद से राहत की कोशिशें शुरू कीं लेकिन अधेरा होने के कारण रात करीब 11 बजे कार को सरयू से बाहर निकाया जा सका। तब तक रामाज्ञा, उनकी पत्नी हौसला देवी और साढ़ू के बेटे नंद किशोर की मौत हो चुकी थी। पीछे दूसरी कार में मौजूद गोला क्षेत्र निवासी रामाज्ञा के साढ़ू जयप्रकाश यादव की सूचना पर रामजानकी नगर में रहने वाला बड़ा बेटा अभिषेक यादव मौके पर पहुंचा। हालात देख बाल-बाल बचे भाई अभय से लिपट कर चिल्लाने लगा। वहां जुटे लोगों व पिछली कार में सवार रिश्तेदारों ने बमुश्किल उसे काबू किया।
समय पर बन जाता पुल तो न जातीं तीन जानें
शुक्रवार एक परिवार के तीन सदस्यों के लिए जानलेवा बने कम्हरिया घाट के पीपा पुल की जगह पक्के पुल का निर्माण साल 2013 में शुरू किया गया था। सरकारी मशीनरी की ढिलाई से काम पिछड़ता गया और साल 2016 में पुल पूरा करने की मियाद मार हो गई। करीब पांच साल बीत गए, फिर भी पुल का 30 प्रतिशत काम नहीं पूरा हो सका। पुल की लागत भी 45 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
कम्हरिया घाट पर पीपापुल की व्यवस्था वर्ष 1995 से है। करीब 700 मीटर लंबा यह पुल गोरखपुर, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर और आजमगढ़ को आपस में जोड़ता है। रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है। कई बार दोपहिया और चौपहिया वाहन अनियंत्रित होकर नदी में गिरने और कई की जान जाने के बाद यहां पक्के पुल की मांग तेज हुई थी। इसे लेकर जिला पंचायत सदस्य सत्यवंत सिंह की अगुवाई में वर्ष 2013 में बड़ा आंदोलन भी हुआ। 10 दिनों तक जल सत्याग्रह चला। इसका तब सांसद के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने भी किया था। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश से फोन पर बात करके पुल निर्माण पर जोर दिया था।
इसके बाद वर्ष 2013 में ही 1700 मीटर लंबाई का पक्का पुल स्वीकृत हुआ। साथ ही 137 करोड़ रुपये का बजट मंजूर करते हुए सेतु निगम को काम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। ठेका पुणे की कंपनी को मिला, जिसने निर्माण में रुचि नहीं ली। इस कारण पुल का निर्माण दिसंबर 2016 तक पूरा नहीं हो सका। यदि समय से काम होता तो पुल का निर्माण पूरा हो जाता और पीपा पुल के इस्तेमाल से जान जोखिम में डालने वाले गोरखपुर, अंबेडकर नगर के लोग सुरक्षित हो जाते। गोरखपुर से अंबेडकर नगर, आजमगढ़ और संतकबीर नगर की दूरी भी काफी कम हो जाती। वार्ड नंबर 37 से जिला पंचायत सदस्य सत्यवंत सिंह ने बताया कि कंपनी की हीलाहवाली की वजह से ही पक्के पुल की लागत 137 करोड़ से बढ़कर 182 करोड़ रुपये हो गई है। सेतु निगम के अफसर बताते हैं कि खराब भूमिका के कारण निर्माण कर रही कंपनी को काली सूची में डाल दिया है। जनवरी 2018 से पहले पुल का काम आगे बढ़ पाने के आसार नहीं हैं।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
पुल निर्माण मेें देरी की शिकायत इसी महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई है। जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था से जवाब भी मांगा है। मुख्यमंत्री ने पुल के निर्माण में तेजी लाने का भरोसा दिलाया है। इससे पहले ही पीपापुल से बड़ी अनहोनी हो गई। पीपापुल पुराना है। रोज हजारों लोग जान जोखिम में डालकर पुल से आते-जाते हैं।
बेटे ने फोन पर सुनीं चीखें
रामजानकी नगर से मौके पर पहुंचकर मां-पिता के शव देखकर आपा खोने वाले रामाज्ञा यादव के बड़े बेटे अभिषेक ने बताया कि पुल पर पहुंचने से कुछ पहले मां से फोन पर बात शुरू हुई थी। वह इलाहाबाद की शादी के अनुभव बताने के साथ जल्द घर पहुंचने की उम्मीद जता रही थीं कि इसी बीच उनकी चीख सुनाई दी। फिर एकाएक सन्नाटा और फोन ऑफ हो गया। अनहोनी के अंदेशे में उसने फौरन घर से निकलकर मौके का रुख किया। कुछ दूरी पर पहुंचते ही हादसे बाल-बाल बचे भाई और पिछली कार में मौजूद मौसा ने फोन पर हादसे की मारक खबर दी।
तीन घंटे मांगते रहे दुआएं
कार के नदी में समाने के बाद से बचाव टीम द्वारा बाहर निकालने तक करीब तीन घंटे का समय लगा। इस दौरान सरयू तट पर मौजूद छोटा बेटा व अन्य रिश्तेदार नदी में गिरी कार से सभी के सुरक्षित बाहर आने की दुआ के बीच हाथ जोड़े रहे। रामजानकी नगर से आनन-फानन भागते हुए मौके पर पहुंचे बड़े बेटे अभिषेक ने भी बहुत दुआएं कीं लेकिन नियति के फैसले के आगे दुआएं कामयाब नहीं हुईं।
थाना विवाद में उलझी पुलिस
हादसे के तुरंत बाद गोरखपुर जिले के बेलघाट क्षेत्र की पुलिस राहत में जुट गई। तीन घंटे की मशक्कत के बाद सरयू में गिरी कार और शव बाहर निकालने में कामयाब भी हो गई लेकिन इसके तुरंत बाद थानों के सीमा विवाद का मुद्दा गर्मा गया। राहत में लगी बेलघाट की पुलिस टीम का कहना था कि हादसास्थल अंबेडकरनगर थाने का है। वहां की पुलिस भी सूचना पर पहुंच गई थी। देर रात तक शव कब्जे में लेने के मुद्दे पर दोनों क्षेत्र के पुलिस वाले उलझे हुए थे।