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बेटी की शादी के लिए मदद तय, भावुक हुईं वीना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 24 Oct 2018 10:34 PM IST
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अमर उजाला के गोरखपुर कार्यालय में वीणा को मदद का चेक दिया गया।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। बेटी की शादी की खातिर किडनी बेचने को तैयार बिछिया की वीना श्रीवास्तव को 1.25 लाख रुपये की मदद तय हो गई है। कायस्थ वाहिनी इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष विनोद कुमार श्रीवास्तव और उनकी पत्नी सिया स्वयंवर डॉट कॉम की निदेशक रेखा श्रीवास्तव ने मंगलवार को ‘अमर उजाला’ के सिटी ऑफिस आकर वीना को 51 हजार रुपये का चेक दिया। श्री चित्रगुप्त समिति धर्मपुर की तरफ से 11 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। लड़की, लड़के के कपड़े और घरेलू इस्तेमाल के सामान की जिम्मेदारी पैनेशिया अस्पताल की प्रबंध निदेशक पूनम श्रीवास्तव और रतनजीत श्रीवास्तव ने ली है। इस पर करीब 63 हजार रुपये खर्च होंगे। पूनम, रतनजीत 23 नवंबर झारखंड के वासुकीनाथ मंदिर में होने वाली बिटिया की शादी में भी शामिल होंगे। उन्होंने कन्यादान करने का संकल्प लिया है।
पति से अलग होने के बाद वीना अकेली पड़ गईं। कमाई का कोई साधन भी नहीं था। किसी तरह से बेटी को पढ़ाया और बड़ा किया। अब शादी तय हुई तो आर्थिक संकट खड़ा हो गया। सरकारी मदद लेनी चाही लेकिन प्रक्रिया लंबी होती चली गई। वीना को लगा कि लाडली की शादी नहीं हो पाएगी। इस कारण उन्होंने अपनी किडनी बेचने की इच्छा जाहिर की। साथ ही कहा कि 40 हजार रुपये मिल जाएंगे तो भी बेटी की शादी अच्छे से मंदिर में कर देंगी। वीना की इस बेचारगी को ‘अमर उजाला’ ने पांच अक्तूबर के अंक में ‘बेटी की शादी को किडनी बेचना चाहती हूं!’ प्रमुखता से छापा। इसके बाद दरियादिल शहरवासी आगे आए और बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने का संकल्प लिया।
मंगलवार को कई लोग ‘अमर उजाला’ दफ्तर आए और बेटी की शादी की तैयारी को अंतिम रूप दिया। श्री चित्रगुप्त समिति धर्मपुर के अध्यक्ष जगदीश चंद्र वर्मा, मंत्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक एडवोकेट संजय श्रीवास्तव ने सहायता स्वरूप वीना को 11 हजार रुपये का चेक दिया। पैनेशिया अस्पताल की प्रबंध निदेशक, कायस्थ वाहिनी इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष और सिया स्वयंवर डॉट कॉम की निदेशक ने कहा कि बिटिया की शादी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। शादी के बाद भी उसकी देखरेख की जाएगी।
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पति से अलग होने के बाद वीना अकेली पड़ गईं। कमाई का कोई साधन भी नहीं था। किसी तरह से बेटी को पढ़ाया और बड़ा किया। अब शादी तय हुई तो आर्थिक संकट खड़ा हो गया। सरकारी मदद लेनी चाही लेकिन प्रक्रिया लंबी होती चली गई। वीना को लगा कि लाडली की शादी नहीं हो पाएगी। इस कारण उन्होंने अपनी किडनी बेचने की इच्छा जाहिर की। साथ ही कहा कि 40 हजार रुपये मिल जाएंगे तो भी बेटी की शादी अच्छे से मंदिर में कर देंगी। वीना की इस बेचारगी को ‘अमर उजाला’ ने पांच अक्तूबर के अंक में ‘बेटी की शादी को किडनी बेचना चाहती हूं!’ प्रमुखता से छापा। इसके बाद दरियादिल शहरवासी आगे आए और बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने का संकल्प लिया।
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मंगलवार को कई लोग ‘अमर उजाला’ दफ्तर आए और बेटी की शादी की तैयारी को अंतिम रूप दिया। श्री चित्रगुप्त समिति धर्मपुर के अध्यक्ष जगदीश चंद्र वर्मा, मंत्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक एडवोकेट संजय श्रीवास्तव ने सहायता स्वरूप वीना को 11 हजार रुपये का चेक दिया। पैनेशिया अस्पताल की प्रबंध निदेशक, कायस्थ वाहिनी इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष और सिया स्वयंवर डॉट कॉम की निदेशक ने कहा कि बिटिया की शादी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। शादी के बाद भी उसकी देखरेख की जाएगी।
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