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कहीं मातमी जुलूस तो कहीं मजलिसें
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:04 AM IST
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गोरखपुर।
छठवीं मुहर्रम पर कहीं मजलिस तो कहीं मातमी जुलूस निकाले गए। शिया समुदाय की ओर से आधी रात में दुलजना का जुलूस निकला तो वहीं सुन्नी समुदाय के लोगों ने मदीना मस्जिद के पास से अलम के साथ जुलूस निकाला।
मेहंदी हसन की अगुवाई में निकले दुलजना के जुलूस जंजीर और कमां से मातम किया गया। मून लाइट होटल के पास स्थित इमामबाड़े से या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकला। इसमें दुलजना (इमाम हुसैन के घोड़े की नकल) जुलूस के साथ चल रहा था। इसके साथ ही हजरत अब्बास का अलम और जनाबे कासिम की याद में मेहंदी भी जुलूस का हिस्सा थी। मातम करते हुए शिया समुदाय के लोग निकले तो लोग देखते रह गए। जुलूस कोतवाली, नखास, होता हुआ इमामबाड़ा आगा हुसैन पर समाप्त हुआ। दूसरी ओर सुन्नी समुदाय के लोगों ने मदीना मस्जिद के पास अलम का जुलूस निकाला। इसकी अगुवाई मुतवल्ली नवाबुल हसन ने की। इस जुलूस की शोभा बैंड, घोड़े आदि बढ़ा रहे थे।
जारी रहा मजलिसों का दौर
दरगाह हजरत मुबारक खां मस्जिद में हुई मजलिस में मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि कर्बला की तपती रेत पर भूखे-प्यासे रहकर भी इमाम हुसैन ने अल्लाह की इबादत व सब्र का दामन नहीं छोड़ा। हमें प्रण लेना चाहिए कि हम अपनी पूरी जिंदगी इमामे हुसैन के नक्शे कदम पर चलकर गुजारेंगे। गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मजलिस में मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हम कुरआन व अहले बैत से ताल्लुक जोड़ ले तो कामयाबी हमारे कदम चूमेगी। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रजवी, बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद, बेलाल मस्जिद अलहदादपुर में कारी शराफत हुसैन कादरी ने मजलिस को संबोधित किया।
छठवीं मुहर्रम पर कहीं मजलिस तो कहीं मातमी जुलूस निकाले गए। शिया समुदाय की ओर से आधी रात में दुलजना का जुलूस निकला तो वहीं सुन्नी समुदाय के लोगों ने मदीना मस्जिद के पास से अलम के साथ जुलूस निकाला।
मेहंदी हसन की अगुवाई में निकले दुलजना के जुलूस जंजीर और कमां से मातम किया गया। मून लाइट होटल के पास स्थित इमामबाड़े से या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकला। इसमें दुलजना (इमाम हुसैन के घोड़े की नकल) जुलूस के साथ चल रहा था। इसके साथ ही हजरत अब्बास का अलम और जनाबे कासिम की याद में मेहंदी भी जुलूस का हिस्सा थी। मातम करते हुए शिया समुदाय के लोग निकले तो लोग देखते रह गए। जुलूस कोतवाली, नखास, होता हुआ इमामबाड़ा आगा हुसैन पर समाप्त हुआ। दूसरी ओर सुन्नी समुदाय के लोगों ने मदीना मस्जिद के पास अलम का जुलूस निकाला। इसकी अगुवाई मुतवल्ली नवाबुल हसन ने की। इस जुलूस की शोभा बैंड, घोड़े आदि बढ़ा रहे थे।
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जारी रहा मजलिसों का दौर
दरगाह हजरत मुबारक खां मस्जिद में हुई मजलिस में मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि कर्बला की तपती रेत पर भूखे-प्यासे रहकर भी इमाम हुसैन ने अल्लाह की इबादत व सब्र का दामन नहीं छोड़ा। हमें प्रण लेना चाहिए कि हम अपनी पूरी जिंदगी इमामे हुसैन के नक्शे कदम पर चलकर गुजारेंगे। गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मजलिस में मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हम कुरआन व अहले बैत से ताल्लुक जोड़ ले तो कामयाबी हमारे कदम चूमेगी। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रजवी, बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद, बेलाल मस्जिद अलहदादपुर में कारी शराफत हुसैन कादरी ने मजलिस को संबोधित किया।
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