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अब मैडम पर और कसा शिकंजा
Updated Sun, 27 Aug 2017 01:24 AM IST
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गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शासन की ओर से डॉ. पूर्णिमा पर लगे कमीशनखोरी के आरोपों की विस्तृत जांच शुरू हो गई है। विशेष सचिव आयुष शारदा सिंह एक माह में इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। इसके आधार पर डॉ. पूर्णिमा के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
डॉ. पूर्णिमा शुक्ला पर लगे आरोपों की जांच आयुष विभाग की ओर से विशेष सचिव यतींद्र मोहन, निदेशक विनोद कुमार विमल और संयुक्त सचिव ऋषिकेश दुबे की समिति पहले कर चुकी है। इस समिति की प्रारंभिक जांच में डॉ. पूर्णिमा पर लगे आरोप सही मिले तो उन्हें निलंबित कर दिया गया था। भले ही डॉ. पूर्णिमा की गर्दन अब जाकर फंसी हो, लेकिन इसकी नींव काफी पहले ही पड़ चुकी थी। 16 जनवरी को उनके खिलाफ चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र के राजन यादव ने कमिश्नर से लेकर निदेशक होम्योपैथ तक से शिकायत करते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। कहा गया था कि गोला में होम्योपैथ चिकित्साधिकारी के पद पर तैनाती होने के बाद वह ड्यूटी से गैरहाजिर रहती हैं। फिर भी जिला होम्योपैथ अधिकारी कमीशन लेकर इनका वेतन बनाते रहते हैं। इस पत्र में मेडिकल कॉलेज में भी उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। राजन यादव ने बताया कि पत्र के जरिये उन्होंने आरोप लगाया था कि मेडिकल कॉलेज में किसी ठेकेदार को प्राचार्य से बात करनी होती थी तो उसे डॉ. पूर्णिमा शुक्ला से मिलना जरूरी था। सूत्रों से पता चला था कि मेडिकल कॉलेज में सामान की खरीद में भी वह कमीशन लेती थीं। इसके बाद डॉ. पूर्णिमा की गर्दन फंसने लगी। तब जिला होम्यापैथ अधिकारी ने ‘मैडम’ पर लगे आरोपों की जांच के लिए उनके अस्पताल का निरीक्षण किया था। इसमें वह गैरहाजिर मिली थीं और उनका अस्पताल बंद था। इस पर डॉ. पूर्णिमा समेत उनके अधीनस्थ कर्मचारियों का वेतन काटते हुए उनसे जवाब मांगा गया। जिला होम्योपैथ अधिकारी डॉ. शंभू शरण सिंह ने बताया कि डॉ. पूर्णिमा ने अचार संहिता के दौरान पुरानी तिथि की बाबत पंजीकृत डाक से अवकाश प्रार्थना पत्र भेज दिया। बुलाने पर वह अपना पक्ष रखने नहीं आईं, इस पर उनका चार दिन का वेतन भी काटा गया। इसके बाद वह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गईं थीं।
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फिर जी उठीं पुरानी शिकायतें
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट को लेकर हल्ला मचा तो मैडम पर कमीशनखोरी के आरोप लगे। इसकी जांच शुरू हुई तो निदेशक होम्योपैथ ने जिला होम्योपैथ अधिकारी से आख्या मांगी। पांच बिंदुओं वाली तथ्यात्मक आख्या देते हुए जिला होम्यापैथ अधिकारी ने उनके खिलाफ मिलती रही जन शिकायतों का जिक्र किया। इसमें यह भी बताया कि जांच के दौरान गैरहाजिर रहने की शिकायत सही मिली थी और अधीनस्थ कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं पाया गया था।
मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शासन की ओर से डॉ. पूर्णिमा पर लगे कमीशनखोरी के आरोपों की विस्तृत जांच शुरू हो गई है। विशेष सचिव आयुष शारदा सिंह एक माह में इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। इसके आधार पर डॉ. पूर्णिमा के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
डॉ. पूर्णिमा शुक्ला पर लगे आरोपों की जांच आयुष विभाग की ओर से विशेष सचिव यतींद्र मोहन, निदेशक विनोद कुमार विमल और संयुक्त सचिव ऋषिकेश दुबे की समिति पहले कर चुकी है। इस समिति की प्रारंभिक जांच में डॉ. पूर्णिमा पर लगे आरोप सही मिले तो उन्हें निलंबित कर दिया गया था। भले ही डॉ. पूर्णिमा की गर्दन अब जाकर फंसी हो, लेकिन इसकी नींव काफी पहले ही पड़ चुकी थी। 16 जनवरी को उनके खिलाफ चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र के राजन यादव ने कमिश्नर से लेकर निदेशक होम्योपैथ तक से शिकायत करते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। कहा गया था कि गोला में होम्योपैथ चिकित्साधिकारी के पद पर तैनाती होने के बाद वह ड्यूटी से गैरहाजिर रहती हैं। फिर भी जिला होम्योपैथ अधिकारी कमीशन लेकर इनका वेतन बनाते रहते हैं। इस पत्र में मेडिकल कॉलेज में भी उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। राजन यादव ने बताया कि पत्र के जरिये उन्होंने आरोप लगाया था कि मेडिकल कॉलेज में किसी ठेकेदार को प्राचार्य से बात करनी होती थी तो उसे डॉ. पूर्णिमा शुक्ला से मिलना जरूरी था। सूत्रों से पता चला था कि मेडिकल कॉलेज में सामान की खरीद में भी वह कमीशन लेती थीं। इसके बाद डॉ. पूर्णिमा की गर्दन फंसने लगी। तब जिला होम्यापैथ अधिकारी ने ‘मैडम’ पर लगे आरोपों की जांच के लिए उनके अस्पताल का निरीक्षण किया था। इसमें वह गैरहाजिर मिली थीं और उनका अस्पताल बंद था। इस पर डॉ. पूर्णिमा समेत उनके अधीनस्थ कर्मचारियों का वेतन काटते हुए उनसे जवाब मांगा गया। जिला होम्योपैथ अधिकारी डॉ. शंभू शरण सिंह ने बताया कि डॉ. पूर्णिमा ने अचार संहिता के दौरान पुरानी तिथि की बाबत पंजीकृत डाक से अवकाश प्रार्थना पत्र भेज दिया। बुलाने पर वह अपना पक्ष रखने नहीं आईं, इस पर उनका चार दिन का वेतन भी काटा गया। इसके बाद वह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गईं थीं।
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फिर जी उठीं पुरानी शिकायतें
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट को लेकर हल्ला मचा तो मैडम पर कमीशनखोरी के आरोप लगे। इसकी जांच शुरू हुई तो निदेशक होम्योपैथ ने जिला होम्योपैथ अधिकारी से आख्या मांगी। पांच बिंदुओं वाली तथ्यात्मक आख्या देते हुए जिला होम्यापैथ अधिकारी ने उनके खिलाफ मिलती रही जन शिकायतों का जिक्र किया। इसमें यह भी बताया कि जांच के दौरान गैरहाजिर रहने की शिकायत सही मिली थी और अधीनस्थ कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं पाया गया था।
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