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सेना ने की राप्ती के बंधों की रेकी
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:24 AM IST
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गोरखपुर। रोहिन नदी के बाद अब राप्ती के जलस्तर में निरंतर हो रही बढ़ोतरी से जिला प्रशासन के साथ ही सेना भी सतर्क हो गई है। रविवार को पूरे दिन सेना ने राप्ती नदी से जुड़े बंधों का जायजा लिया। साथ ही संवेदनशील बंधों के आसपास के क्षेत्रों की आबादी, वहां तक पहुंचने के रास्ते आदि की मैपिंग समेत राहत एवं बचाव कार्य की पूरी योजना बनाई।
उधर, एनडीआरएफ ने मानीराम और पीपीगंज के आसपास के पानी मेंडूबे क्षेत्रों से लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के साथ ही चौरीचौरा तहसील क्षेत्र में भी मोर्चा संभाला। गोर्रा के रिंग बांध टूटने की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की चार में से दो टीमों ने वहां का रुख कर दिया। एनडीआरएफ की एक और टीम सोमवार की सुबह पहुंचने की उम्मीद है। इस टीम को भी चौरीचौरा क्षेत्र में ही बचाव एवं राहत कार्य में लगाया जाएगा।
राप्ती के बढ़ते जलस्तर और फोरकास्ट को देखते हुए हमने पूरे दिन राप्ती के बंधों का निरीक्षण कर अनहोनी की दशा में राहत, बचाव कार्य चलाने की पूरी प्लानिंग की है। डीएम से भी बंधों की स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी ली गई है। शहर को अभी कोई खतरा नहीं है लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। जहां भी जरूरत पड़ी, हमारे जवान पहुंचेंगे। हमारी पहली प्राथमिकता जान बचाना है और उसके बाद राहत सामग्री का वितरण कराना। जरूरत पड़ी तो और जवान व संसाधन मंगाए जाएंगे। सेना हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
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- आशीष राव, लेफ्टिनेंट कर्नल, आर्मी
रविवार को हमारी आधी टीम पीपीगंज और मानीराम के आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य में लगी रही। आधी टीम को चौरीचौरा में लगाया गया है। सोमवार की सुबह तक एक और टीम मिल जाएगी। जरूरत पड़ी तो और भी टीमें बुलाई जा सकती हैं। सुबह की पहली किरण के साथ हमारे जवान बचाव कार्य में लग जा रहे हैं जो देर शाम तक काम कर रहे हैं। प्रशासन, समाजसेवियों की तरफ से जो भी राहत सामग्री मिल रही है, उसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
- पीएल शर्मा, डिप्टी कमांडेंट, एनडीआरएफ
उधर, एनडीआरएफ ने मानीराम और पीपीगंज के आसपास के पानी मेंडूबे क्षेत्रों से लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के साथ ही चौरीचौरा तहसील क्षेत्र में भी मोर्चा संभाला। गोर्रा के रिंग बांध टूटने की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की चार में से दो टीमों ने वहां का रुख कर दिया। एनडीआरएफ की एक और टीम सोमवार की सुबह पहुंचने की उम्मीद है। इस टीम को भी चौरीचौरा क्षेत्र में ही बचाव एवं राहत कार्य में लगाया जाएगा।
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राप्ती के बढ़ते जलस्तर और फोरकास्ट को देखते हुए हमने पूरे दिन राप्ती के बंधों का निरीक्षण कर अनहोनी की दशा में राहत, बचाव कार्य चलाने की पूरी प्लानिंग की है। डीएम से भी बंधों की स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी ली गई है। शहर को अभी कोई खतरा नहीं है लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। जहां भी जरूरत पड़ी, हमारे जवान पहुंचेंगे। हमारी पहली प्राथमिकता जान बचाना है और उसके बाद राहत सामग्री का वितरण कराना। जरूरत पड़ी तो और जवान व संसाधन मंगाए जाएंगे। सेना हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
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- आशीष राव, लेफ्टिनेंट कर्नल, आर्मी
रविवार को हमारी आधी टीम पीपीगंज और मानीराम के आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य में लगी रही। आधी टीम को चौरीचौरा में लगाया गया है। सोमवार की सुबह तक एक और टीम मिल जाएगी। जरूरत पड़ी तो और भी टीमें बुलाई जा सकती हैं। सुबह की पहली किरण के साथ हमारे जवान बचाव कार्य में लग जा रहे हैं जो देर शाम तक काम कर रहे हैं। प्रशासन, समाजसेवियों की तरफ से जो भी राहत सामग्री मिल रही है, उसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
- पीएल शर्मा, डिप्टी कमांडेंट, एनडीआरएफ