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यूपी में नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम: नियामक आयोग
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में विद्युत नियामक आयोग की जन सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि बिजली की दर में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। टैरिफ की समीक्षा की जा चुकी है। इस पर अंतिम दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य सुरेश कुमार अग्रवाल, केके शर्मा, सचिव संजय श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक अनिल कोहली और मुख्य अभियंता एमके अग्रवाल ने बुधवार को जनसुनवाई की। इस दौरान शहर के प्रमुख व्यापारी, उपभोक्ताओं ने शिकायत भी दर्ज कराई। साथ ही पूछा कि क्या बिजली की दरें बढ़ेंगी? इस पर आयोग ने सकारात्मक जवाब दिया और कहा कि दर बढ़ोतरी का कोई इरादा नहीं है। व्यापारियों ने स्थानीय अधिकारियों की मनमानी और गलत तरीके से बिजली जांचने का मुद्दा भी उठाया। मुख्य अभियंता ने सभी मामलों के निस्तारण के लिए 15 दिन का समय मांगा है। हालांकि व्यापारियों के तमाम सवालों का संतोषजनक जवाब आयोग के सदस्य नहीं दे सके। व्यापारी नेता संजय सिंहानिया ने शहर के जर्जर बिजली तार, पोल, गलत तरीके से बिलिंग, घरों में मीटर जांच का मामला उठाया और कहा कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
जितनी बिजली देंगे उतनी ही मुफ्त मिलेगी
आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल ने कहा कि निगम में नियम है कि जितनी भार क्षमता का कनेक्शन है, उतना बिजली उत्पन्न कर देने पर उतनी ही बिजली मुफ्त मिलती है। उससे अधिक बिजली पैदा हई तो प्रति यूनिट दो रुपये की दर से निगम खरीद लेता है। दरअसल, आयोग के सदस्य जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ता कैलाश चंद शर्मा के सवालों का जवाब दे रहे थे। कैलाश चंद्र शर्मा का कहना था कि लगता है निगम के खर्चे ज्यादा हैं और आमदनी कम। वह छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा कर निगम को देना चाहते हैं। हालांकि इसके बदले वह नि:शुल्क बिजली चाहते हैं।
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व्यापारियों की बात
पश्चिम में रेग्युलेटरी सरचार्ज डिस्काम से लेना बंद कर दिया गया है। इसे पूर्वांचल विद्युत निगम ने जारी रखा है, ऐसा क्यों? प्रदेश में चार से पांच व्यापारियों को ही सस्ते दर में ओपन एक्सेस में बिजली कनेक्शन पांच रुपये में दिए गए हैं तो उसपर निगम अतिरिक्त ट्रांसमिशन और बिलिंग शुल्क लगाकर महंगी बिजली क्यों दे रहा है।
- प्रमोद मस्खरा, निदेशक द महाबीर जूट मिल्स
ओपन एक्सेस कनेक्शन में संशोधन किया जाना चाहिए। इंडस्ट्री में भी प्रीपेड मीटर देने की बात कही जा रही है। सभी तरह के नए कनेक्शन में निगम को प्रीपेड मीटर ही देना चाहिए। इसका फायदा उपभोक्ताओं को जरूर मिलेगा।
-अजीत सरिया, अध्यक्ष चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
बिल क्यों नहीं समय से दे रहे
गोरखपुर विश्वविद्यालय में जन सुनवाई के दौरान गीडा के व्यापारी आकाश जालान ने मैनुअल बिल का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हाथ से बना बिल अब भी दिया जा रहा है वह भी समय से नहीं मिल रहा। ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया भी बाधित रहती है। इसपर आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल ने थोड़ा सख्त लहजे में बिजली निगम के अफसरों से सवाल किया और पूछा कि बिल क्यों नहीं दे रहे समय से। इस पर मुख्य अभियंता एमके अग्रवाल ने जांच कराने और कंप्यूटराइज्ड बिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
खेत बिकवाकर भुगतान कराना चाहते हैं क्या
झंगहा के मुंडेरा ठकुराई से आए विनय सिंह ने कहा कि उनके गांव में एक व्यक्ति का बिल एक साल में पांच लाख से अधिक आ गया है। मजाक भरे लहजे में उन्होंने कहा कि निगम वालों की मंशा है कि किसान खेत बेचकर भुगतान करने पर मजबूर हों। आयोग से कहा कि अगर अभी परेशानी का निदान नहीं कराएंगे तो आपको हम फिर कहां खोजने जाएंगे। अध्यक्ष ने तत्काल मुख्य अभियंता से मामले का निस्तारण कराने को कहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि बिजली की दर में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। टैरिफ की समीक्षा की जा चुकी है। इस पर अंतिम दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य सुरेश कुमार अग्रवाल, केके शर्मा, सचिव संजय श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक अनिल कोहली और मुख्य अभियंता एमके अग्रवाल ने बुधवार को जनसुनवाई की। इस दौरान शहर के प्रमुख व्यापारी, उपभोक्ताओं ने शिकायत भी दर्ज कराई। साथ ही पूछा कि क्या बिजली की दरें बढ़ेंगी? इस पर आयोग ने सकारात्मक जवाब दिया और कहा कि दर बढ़ोतरी का कोई इरादा नहीं है। व्यापारियों ने स्थानीय अधिकारियों की मनमानी और गलत तरीके से बिजली जांचने का मुद्दा भी उठाया। मुख्य अभियंता ने सभी मामलों के निस्तारण के लिए 15 दिन का समय मांगा है। हालांकि व्यापारियों के तमाम सवालों का संतोषजनक जवाब आयोग के सदस्य नहीं दे सके। व्यापारी नेता संजय सिंहानिया ने शहर के जर्जर बिजली तार, पोल, गलत तरीके से बिलिंग, घरों में मीटर जांच का मामला उठाया और कहा कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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जितनी बिजली देंगे उतनी ही मुफ्त मिलेगी
आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल ने कहा कि निगम में नियम है कि जितनी भार क्षमता का कनेक्शन है, उतना बिजली उत्पन्न कर देने पर उतनी ही बिजली मुफ्त मिलती है। उससे अधिक बिजली पैदा हई तो प्रति यूनिट दो रुपये की दर से निगम खरीद लेता है। दरअसल, आयोग के सदस्य जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ता कैलाश चंद शर्मा के सवालों का जवाब दे रहे थे। कैलाश चंद्र शर्मा का कहना था कि लगता है निगम के खर्चे ज्यादा हैं और आमदनी कम। वह छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा कर निगम को देना चाहते हैं। हालांकि इसके बदले वह नि:शुल्क बिजली चाहते हैं।
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व्यापारियों की बात
पश्चिम में रेग्युलेटरी सरचार्ज डिस्काम से लेना बंद कर दिया गया है। इसे पूर्वांचल विद्युत निगम ने जारी रखा है, ऐसा क्यों? प्रदेश में चार से पांच व्यापारियों को ही सस्ते दर में ओपन एक्सेस में बिजली कनेक्शन पांच रुपये में दिए गए हैं तो उसपर निगम अतिरिक्त ट्रांसमिशन और बिलिंग शुल्क लगाकर महंगी बिजली क्यों दे रहा है।
- प्रमोद मस्खरा, निदेशक द महाबीर जूट मिल्स
ओपन एक्सेस कनेक्शन में संशोधन किया जाना चाहिए। इंडस्ट्री में भी प्रीपेड मीटर देने की बात कही जा रही है। सभी तरह के नए कनेक्शन में निगम को प्रीपेड मीटर ही देना चाहिए। इसका फायदा उपभोक्ताओं को जरूर मिलेगा।
-अजीत सरिया, अध्यक्ष चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
बिल क्यों नहीं समय से दे रहे
गोरखपुर विश्वविद्यालय में जन सुनवाई के दौरान गीडा के व्यापारी आकाश जालान ने मैनुअल बिल का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हाथ से बना बिल अब भी दिया जा रहा है वह भी समय से नहीं मिल रहा। ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया भी बाधित रहती है। इसपर आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल ने थोड़ा सख्त लहजे में बिजली निगम के अफसरों से सवाल किया और पूछा कि बिल क्यों नहीं दे रहे समय से। इस पर मुख्य अभियंता एमके अग्रवाल ने जांच कराने और कंप्यूटराइज्ड बिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
खेत बिकवाकर भुगतान कराना चाहते हैं क्या
झंगहा के मुंडेरा ठकुराई से आए विनय सिंह ने कहा कि उनके गांव में एक व्यक्ति का बिल एक साल में पांच लाख से अधिक आ गया है। मजाक भरे लहजे में उन्होंने कहा कि निगम वालों की मंशा है कि किसान खेत बेचकर भुगतान करने पर मजबूर हों। आयोग से कहा कि अगर अभी परेशानी का निदान नहीं कराएंगे तो आपको हम फिर कहां खोजने जाएंगे। अध्यक्ष ने तत्काल मुख्य अभियंता से मामले का निस्तारण कराने को कहा।