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पोखरे की बिना खुदाई कराए 1 .59 लाख का भुगतान
Updated Tue, 03 Oct 2017 11:11 PM IST
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संतकबीरनगर। सांथा विकास खंड के मेंहदूपार गांव में पोखरे की बिना खुदाई कराए ही 1 .59 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। शिकायत पर एसडीएम मेंहदावल ने जांच की तो घपले की पोल खुल गई। जांच में पूर्व बीडीओ, लेखाकार, एपीओ और सचिव दोषी पाए गए। जिनके से गबन की धनराशि की वसूली के साथ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति रिपोर्ट के साथ एसडीएम ने डीएम को भेज दी है।
एसडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि मेंहदूपार निवासी राजकुमार ने प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि मनरेगा से गांव में स्थित पोखरे की बिना खुदाई कराए ही भुगतान करा लिया गया। मामले की उनके स्तर से जांच की गई। जांच में पाया गया कि मेंहदूपार में स्थित पोखरे की खुदाई वित्तीय वर्ष 2015-16 और फिर उसी का नाम बदल कर वित्तीय वर्ष 2016-17 में भी खुदाई कराई गई है। नाम बदल कर दुबारा खुदाई कराना दर्शा कर गलत तरीके से 1. 59 लाख का भुगतान करा लिया गया है। मेंहदूपार के प्रधान ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में हुई खुदाई की बात स्वीकार की और मस्टर रोल आदि पर अपने हस्ताक्षर होना भी बताया। जबकि वित्तीय वर्ष 2016-17 के मस्टर रोल पर अपना फर्जी हस्ताक्षर होने की जानकारी दी। टीए ने जांच के दौरान बताया कि एमबी के दौरान उसने एतराज किया,लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई। नया रजिस्टर तैयार करके उससे धोखे से एमबी कराई गई। आगे बताया कि जांच में पूर्व बीडीओ सौरभ पांडेय के अलावा लेखाकार, एपीओ और सचिव दोषी पाए गए है। जिनके से सरकारी धन की रिकवरी कराने के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
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एसडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि मेंहदूपार निवासी राजकुमार ने प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि मनरेगा से गांव में स्थित पोखरे की बिना खुदाई कराए ही भुगतान करा लिया गया। मामले की उनके स्तर से जांच की गई। जांच में पाया गया कि मेंहदूपार में स्थित पोखरे की खुदाई वित्तीय वर्ष 2015-16 और फिर उसी का नाम बदल कर वित्तीय वर्ष 2016-17 में भी खुदाई कराई गई है। नाम बदल कर दुबारा खुदाई कराना दर्शा कर गलत तरीके से 1. 59 लाख का भुगतान करा लिया गया है। मेंहदूपार के प्रधान ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में हुई खुदाई की बात स्वीकार की और मस्टर रोल आदि पर अपने हस्ताक्षर होना भी बताया। जबकि वित्तीय वर्ष 2016-17 के मस्टर रोल पर अपना फर्जी हस्ताक्षर होने की जानकारी दी। टीए ने जांच के दौरान बताया कि एमबी के दौरान उसने एतराज किया,लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई। नया रजिस्टर तैयार करके उससे धोखे से एमबी कराई गई। आगे बताया कि जांच में पूर्व बीडीओ सौरभ पांडेय के अलावा लेखाकार, एपीओ और सचिव दोषी पाए गए है। जिनके से सरकारी धन की रिकवरी कराने के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
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