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दिव्यांग

Mon, 26 Jun 2017 11:03 PM IST
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:03 PM IST
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दिव्यांग
बेटी को पढ़ाने के लिए दिव्यांग कर रहा मजदूरी
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- एक पैर पर खड़े होकर फावड़ा चला रहे बिहार निवासी सुमिरन
- जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग, फिर भी हिम्मत को बनाया हथियार

अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर (संतकबीरनगर)।
छेद सकता है पत्थर की छाती वही, जिसके हाथों में हिम्मत का हथियार हो...। किसी कवि की यह पंक्तियां पौली से भोतहा मार्ग पर पटरी खुदाई का काम कर रहे सुमिरन पर सटीक बैठती हैं। एक पैर से दिव्यांग यह शख्स फावड़े से सड़क की खुदाई पर परिवार की परवरिश कर रहे हैं। इनकी तमन्ना है कि बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त करे, इसी लक्ष्य को लेकर सुमिरन जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।

पौली से भोतहा मार्ग पर पटरी खुदाई का कार्य चल रहा है। इस कार्य में लगे अन्य लोगों के साथ ही बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी सुमिरन एक पैर पर खड़े होकर फावड़े से खुदाई कर रहे पटना (बिहार) के थाना पाली क्षेत्र के ब्रह्मपुरा गांव निवासी सुमिरन(32) को देखकर लोग बरबस ही रुक जाते हैं। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग हैं। माता, पिता, पत्नी व एक बेटी पिंकी (नौ) की परवरिश की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। भरण पोषण के लिए उनके पास मजदूरी के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है। इसी कारण खुदाई में लगे अन्य मजदूरों के साथ मिलकर वे फावड़ा चला रहे हैं। सुमिरन कहते हैं कि भगवान ने भले एक पैर नहीं दिया, लेकिन दो हाथ तो दिए हैं, जिससे वे मेहनत की जा सकती है। सुमिरन कहते हैं कि बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाना उनकी तमन्ना है। इसके लिए चाहे रात में फावड़ा चलना पडे़ या दिन के तपती धूप में पसीना बहाना पड़े, वह पीछे नहीं हटेंगे। बिटिया को पढ़ाकर अच्छी नौकरी दिलाकर वे अपना सपना पूरा करेंगे।
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