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इंसेफेलाइटिस से देवरिया के मासूम की मौत
Updated Sat, 17 Jun 2017 09:23 PM IST
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अस्पताल में भर्ती इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चे।
- फोटो : Amar Ujala / File photo
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गोरखपुर।
पूर्वांचल के नौनिहालों के लिए काल बनी इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में शनिवार को इस बीमारी से लड़ते-लड़ते एक मासूम ने दम तोड़ दिया। वहीं, छह नए मरीज वार्ड में भर्ती हुए।
मेडिकल कॉलेज में हल्की बारिश के बाद से ही इंसेफेलाइटिस के मरीज बढ़ने लगे हैं। साथ ही शासन और प्रशासन की ओर से बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की पोल भी खुलने लगी है। शनिवार को सरैयां, देवरिया के हीरामन के चार वर्षीय बेटे आदित्य की मौत इसका उदाहरण है। वह नेहरू चिकित्सालय के इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती था। उसकी मौत के बाद वार्ड के बाहर बैठे उसके घरवालों की चीत्कार गूंज उठी। अन्य मरीजों के परिवारवाले भी मासूम की मौत से सदमे में दिखे। उधर, शनिवार को वार्ड में छह और मरीज भर्ती हुए। इनमें कुशीनगर के 2, मऊ, महाराजगंज, बस्ती और गोरखपुर के एक-एक मरीज हैं। मेडिकल कॉलेज में जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस से 63 मौतें हो चुकी हैं और 202 मरीज भर्ती हुए हैं। वहीं वर्तमान में 16 मरीजों का इलाज इंसेफेलाइटिस वार्ड में चल रहा है।
जून में पांचवीं मौत
इस बार जुलाई की जगह जून में ही इंसेफेलाइटिस ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जून में इंसेफेलाइटिस से अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य महकमा अभी इंसेफेलाइटिस का सीजन शुरू होना नहीं मान रहा है। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों का मानना है कि मानसून आने के एक हफ्ते बाद बीमारी भयावह रूप में सामने आ सकती है।
पूर्वांचल के नौनिहालों के लिए काल बनी इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में शनिवार को इस बीमारी से लड़ते-लड़ते एक मासूम ने दम तोड़ दिया। वहीं, छह नए मरीज वार्ड में भर्ती हुए।
मेडिकल कॉलेज में हल्की बारिश के बाद से ही इंसेफेलाइटिस के मरीज बढ़ने लगे हैं। साथ ही शासन और प्रशासन की ओर से बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की पोल भी खुलने लगी है। शनिवार को सरैयां, देवरिया के हीरामन के चार वर्षीय बेटे आदित्य की मौत इसका उदाहरण है। वह नेहरू चिकित्सालय के इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती था। उसकी मौत के बाद वार्ड के बाहर बैठे उसके घरवालों की चीत्कार गूंज उठी। अन्य मरीजों के परिवारवाले भी मासूम की मौत से सदमे में दिखे। उधर, शनिवार को वार्ड में छह और मरीज भर्ती हुए। इनमें कुशीनगर के 2, मऊ, महाराजगंज, बस्ती और गोरखपुर के एक-एक मरीज हैं। मेडिकल कॉलेज में जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस से 63 मौतें हो चुकी हैं और 202 मरीज भर्ती हुए हैं। वहीं वर्तमान में 16 मरीजों का इलाज इंसेफेलाइटिस वार्ड में चल रहा है।
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जून में पांचवीं मौत
इस बार जुलाई की जगह जून में ही इंसेफेलाइटिस ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जून में इंसेफेलाइटिस से अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य महकमा अभी इंसेफेलाइटिस का सीजन शुरू होना नहीं मान रहा है। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों का मानना है कि मानसून आने के एक हफ्ते बाद बीमारी भयावह रूप में सामने आ सकती है।
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