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नेशनल कुश्ती में जिले के पवन को कांस्य पदक
Tue, 25 Jun 2019 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला/गोरखपुर
अमर उजाला/गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2019 01:20 AM IST
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गोरखपुर। राजस्थान के कोटा में आयोजित 15वीं नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम के खिलाड़ी पवन यादव ने कांस्य पदक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। उन्होंने यह उपलब्धि अंडर-15 वर्ग के 85 किलोभार वर्ग में हासिल की है। पवन की इस उपलब्धि से जिले के खिलाड़ियों में खुशी की लहर है।
सहजनवां के भीटी रावत स्थित चकिया टोला निवासी पवन यादव के पिता बाबूलाल यादव किसान हैं। बेटे की उपलब्धि से पिता और मां इंद्रावती देवी गदगद हैं। अमर उजाला के बातचीत में पवन ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन 20 से 23 जून तक किया गया था। पवन ने कड़े संघर्षों से कामयाबी की इबारत लिखी है। पिता ने किसान होने के बावजूद हर पल बेटे की डाइट के साथ कुश्ती की तैयारियों में हर संभव मदद की है। खुद पहलवानी कर चुके बाबूलाल ने पारिवारिक दिक्कतों के चलते कुश्ती से मुंह मोड़ लिया था, मगर उन्होंने बेटे के सामने वैसी समस्या नहीं आने दी। शुरूआत में माटी पर अपनी चमक बिखेरने के बाद पवन अपने खेल को सुधारने के लिए रोजाना घर से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर खलीलाबाद पुलिस लाइंस स्थित स्टेडियम में मैट पर प्रैक्टिस करने पहुंचते थे। पिछले वर्ष स्टेडियम में दाखिला मिला तो उनकी उम्मीदों को बल मिला। उनका सपना ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए पदक हासिल करना है।
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सहजनवां के भीटी रावत स्थित चकिया टोला निवासी पवन यादव के पिता बाबूलाल यादव किसान हैं। बेटे की उपलब्धि से पिता और मां इंद्रावती देवी गदगद हैं। अमर उजाला के बातचीत में पवन ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन 20 से 23 जून तक किया गया था। पवन ने कड़े संघर्षों से कामयाबी की इबारत लिखी है। पिता ने किसान होने के बावजूद हर पल बेटे की डाइट के साथ कुश्ती की तैयारियों में हर संभव मदद की है। खुद पहलवानी कर चुके बाबूलाल ने पारिवारिक दिक्कतों के चलते कुश्ती से मुंह मोड़ लिया था, मगर उन्होंने बेटे के सामने वैसी समस्या नहीं आने दी। शुरूआत में माटी पर अपनी चमक बिखेरने के बाद पवन अपने खेल को सुधारने के लिए रोजाना घर से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर खलीलाबाद पुलिस लाइंस स्थित स्टेडियम में मैट पर प्रैक्टिस करने पहुंचते थे। पिछले वर्ष स्टेडियम में दाखिला मिला तो उनकी उम्मीदों को बल मिला। उनका सपना ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए पदक हासिल करना है।
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