फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   श्वेत श्रेणी फैक्ट्री: ‘वास्तविकता’ जांचने कमिश्नर ने गठित की कमेटी

श्वेत श्रेणी फैक्ट्री: ‘वास्तविकता’ जांचने कमिश्नर ने गठित की कमेटी

Fri, 21 Jun 2019 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 21 Jun 2019 02:00 AM IST
विज्ञापन
श्वेत श्रेणी फैक्ट्री: ‘वास्तविकता’ जांचने कमिश्नर ने गठित की कमेटी
 श्वेत श्रेणी की फैक्ट्री को प्रदूषण जांच में छूट मिलने की ‘वास्तविकता’ की जांच अब कमेटी करेगी। कमिश्नर ने इस प्रकरण में उद्योगपतियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच विरोधाभासी बयानों के बाद कमेटी गठित कर दी है। इसमें उद्योगपतियों के अलावा क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अलावा संयुक्त निदेशक उद्योग को भी शामिल कर लिया है। रिपोर्ट के बाद इस मसले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार को कमिश्नर जयंत नार्लीकर ने गीडा कार्यालय में पहली बार उद्यमियों के साथ बैठक की। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने बूके देकर स्वागत किया। इस दौरान श्वेत श्रेणी की फैक्ट्री के खिलाफ जुर्माना और बंदी का मसला भी उठा। उद्यमियों ने कहा कि श्वेत श्रेणी की फैक्ट्रियों की जांच किसी शिकायत के आधार पर ही की जा सकती है। तभी कार्रवाई हो सकती है। आरएन सिंह ने बताया कि कमिश्नर ने उद्यमियों का पक्ष सुनने के बाद नियम विरुद्ध कार्रवाई न होने देने का भरोसा दिया है। साथ ही कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का भी पक्ष समझ लिया जाए। मसले की जांच के लिए कमिश्नर ने कमेटी भी बना दी है। वहीं शनिवार को आयोजित उद्योग बंधु की बैठक में सभी अपना पक्ष रखेंगे। बैठक में अमर तुलस्यान, प्रमोद मस्करा, आकाश जालान, हरिहर सिंह, सुमित कक्कड़, श्रीश अग्रवाल, राजेश अग्रवाल समेत काफी संख्या में उद्यमी मौजूद रहे।
विज्ञापन


उद्योग के लिए बनेगी अलग से सीवर लाइन
बैठक के दौरान उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का मसला भी उठा। उद्योगपतियों ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी और आम घरों आदि से निकलने वाले पानी के लिए अलग-अलग सीवर लाइन बनाने की मांग की। दरअसल गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी के लिए 15 मिलियन लीटर/ डे (एमएलडी) क्षमता का सीईटीपी का प्रोजेक्ट बनाया गया। लागत करीब 90 करोड़ रुपये की है। वहीं इसके संचालन की जिम्मेदारी उद्योगपतियों की है। इस वजह से उद्यमियों ने कम क्षमता की सीईटीपी का प्रोजेक्ट तैयार कराने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्वेत श्रेणी फैक्ट्री: पंजाब में भी मिलती है छूट
उद्योग की बेहतरी और सुविधापूर्ण ढंग से सरकार ने ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ शुरू किया है। इसके तहत बहुत सारे उद्योगों को विभिन्न विभागों का चक्कर लगाने की प्रक्रिया को खत्म कर दिया है। कोशिश थी उद्योगपतियों को लालफीताशाही से मुक्ति दिलाई जाए। इसी क्रम में श्वेत श्रेणी फैक्ट्री को अलग से वर्गीकृत किया गया। पानी और वायु संबंधी प्रदूषण संबंधी प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई। पंजाब समेत कई अन्य प्रदेशों में भी उद्योगपतियों को इस सुविधा का लाभ दिया जाता है, लेकिन गोरखपुर का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपने ही नियम का उल्लंघन कर रहा है।
एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज

नोट: आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed