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पानी में रोबेट से जांचेंगे खंभों की गुणवता
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नदी में घुसकर रोबोट बताएगा कितना मजबूत है पुल
रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग राप्ती व घाघरा पर बने पुलों की कराएगा जांच
दोनों पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पानी के अंदर पुलों के खंभों की खामियां जांचने के लिए रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग नदी में रोबोट उतारेगा। रोबोट के जरिए हासिल तस्वीरों को मानीटर में सुरक्षित कर जांच के लिए विभाग को भेजा जाएगा। इसी सप्ताह राप्ती नदी पर सहजनवां के पहले पुल और घाघरा नदी पर बने एल्गिन पुल की जांच की जाएगी।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक दोनों पुल 100 वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। पांच वर्ष पूर्व इन पुलों की मैनुअल जांच कराई गई थी। अब रोबोट के माध्यम से पानी में पुल के खंभों के निचले हिस्से को देखा जाएगा। पानी में रोबोट से मिलने वाले प्रोग्रामिंग के हिसाब से फोटो सीधे मॉनीटर तक पहुुंचेगा। मॉनीटर पर मिले इमेज को पढ़कर विभाग आगे की कार्यवाही करेगा। अगर इमेज में कहीं से भी किसी भी प्रकार की खामी मिलती है तो उसकी मरम्मत शुरू होगी। इस आधुनिक तकनीक से पानी के अंदर पिलर के गुणवत्ता की सटीक जानकारी मिलती है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अब सभी पुलों की रोबोटिक टेस्ट कराने की योजना है। सुरक्षा और संरक्षा के लिहाज से यह बहुत ही उपयोगी है।
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रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग राप्ती व घाघरा पर बने पुलों की कराएगा जांच
दोनों पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पानी के अंदर पुलों के खंभों की खामियां जांचने के लिए रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग नदी में रोबोट उतारेगा। रोबोट के जरिए हासिल तस्वीरों को मानीटर में सुरक्षित कर जांच के लिए विभाग को भेजा जाएगा। इसी सप्ताह राप्ती नदी पर सहजनवां के पहले पुल और घाघरा नदी पर बने एल्गिन पुल की जांच की जाएगी।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक दोनों पुल 100 वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। पांच वर्ष पूर्व इन पुलों की मैनुअल जांच कराई गई थी। अब रोबोट के माध्यम से पानी में पुल के खंभों के निचले हिस्से को देखा जाएगा। पानी में रोबोट से मिलने वाले प्रोग्रामिंग के हिसाब से फोटो सीधे मॉनीटर तक पहुुंचेगा। मॉनीटर पर मिले इमेज को पढ़कर विभाग आगे की कार्यवाही करेगा। अगर इमेज में कहीं से भी किसी भी प्रकार की खामी मिलती है तो उसकी मरम्मत शुरू होगी। इस आधुनिक तकनीक से पानी के अंदर पिलर के गुणवत्ता की सटीक जानकारी मिलती है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अब सभी पुलों की रोबोटिक टेस्ट कराने की योजना है। सुरक्षा और संरक्षा के लिहाज से यह बहुत ही उपयोगी है।
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