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‘बढ़ते तापमान से खत्म हो जाएंगे खाद्य पदार्थ’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 17 Nov 2017 08:56 PM IST
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बीएसआई के वैज्ञानिक शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी पहुंचे।
- फोटो : Amar Ujala
बढ़ते तापमान का असर पेड़-पौधों के फलने और फूलने पर भी पड़ रहा है। इससे जिन पेड़ों पर फल जनवरी में आते थे और उन्हें विकसित होने में मार्च-अप्रैल तक का समय लगता था। अब ये प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर से ही शुरू हो जा रही है। फ्रूटिंग पीरियड बदलने लगा है। इसलिए समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले 50 सालों में बढ़ता हुआ तापमान कई महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थोें को खत्म कर देगा।
ये बातें शुक्रवार को बीएसआई के वैज्ञानिक प्रो. बीके सिन्हा ने कहीं। वह गोरखपुर यूनिवर्सिटी और बीएसआई के बीच होने वाले एमओयू के मसौदे पर चर्चा के लिए यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने कहा कि कुल्लू, मनाली में जहां बर्फ का राज था, वहां सेब की पैदावार ज्यादा होती थी, मगर बढ़ते तापमान से अब वहां सेब की पैदावार घट गई है, जिससे लोग अब दूसरी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में भी शुरुआत में वनस्पतियों के संरक्षण को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए गए। वन विभाग ने भी प्राकृतिक वनस्पतियों को काटकर दूसरे पेड़ लगा दिए। इन प्राकृतिक धरोहरों का नष्ट होना भी तापमान को बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के तराई क्षेत्र में औषधीय पौधों की भरमार है। अश्वगंधा, रौलफिया सरपेटिना, बकोपा मैनारिया और अर्जुनारिस्ट जैसे पौधों ने चमत्कारिक परिणाम दिए हैं। इन्हें और भी परिष्कृत कर रिसर्च करने की जरूरत है।
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एमओयू के मसौदे पर हुई चर्चा
गोरखपुर यूनिवर्सिटी और बीएसआई के बीच होने वाले एमओयू के मसौदे पर शुक्रवार को प्रशासनिक भवन के कमेटी हॉल में चर्चा हुई। कुलपति प्रो. वीके सिंह ने कहा कि इस समझौते से छात्रों, शिक्षकों और रिसर्च वर्क को लाभ मिलेगा। बीएसआई के वैज्ञानिक प्रो. बीके सिन्हा ने कहा कि करार से पौधों को पहचानने, उपयोग और संवर्द्धन के विविध आयामों पर गहराई से अध्ययन होगा। बॉटनी के हेड प्रो. वीएन पांडेय ने बताया कि मसौदे को सरकार की अनुमति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद एमओयू साइन करने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। इस दौरान रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य, वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे, प्रो. शरद मिश्रा, डॉ. पुष्पेंद्र मिश्र, प्रो. विनोद सिंह, प्रो. ईश्वर दास, प्रो. ओपी पांडेय आदि मौजूद थे।
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ये बातें शुक्रवार को बीएसआई के वैज्ञानिक प्रो. बीके सिन्हा ने कहीं। वह गोरखपुर यूनिवर्सिटी और बीएसआई के बीच होने वाले एमओयू के मसौदे पर चर्चा के लिए यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने कहा कि कुल्लू, मनाली में जहां बर्फ का राज था, वहां सेब की पैदावार ज्यादा होती थी, मगर बढ़ते तापमान से अब वहां सेब की पैदावार घट गई है, जिससे लोग अब दूसरी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में भी शुरुआत में वनस्पतियों के संरक्षण को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए गए। वन विभाग ने भी प्राकृतिक वनस्पतियों को काटकर दूसरे पेड़ लगा दिए। इन प्राकृतिक धरोहरों का नष्ट होना भी तापमान को बढ़ा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के तराई क्षेत्र में औषधीय पौधों की भरमार है। अश्वगंधा, रौलफिया सरपेटिना, बकोपा मैनारिया और अर्जुनारिस्ट जैसे पौधों ने चमत्कारिक परिणाम दिए हैं। इन्हें और भी परिष्कृत कर रिसर्च करने की जरूरत है।
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एमओयू के मसौदे पर हुई चर्चा
गोरखपुर यूनिवर्सिटी और बीएसआई के बीच होने वाले एमओयू के मसौदे पर शुक्रवार को प्रशासनिक भवन के कमेटी हॉल में चर्चा हुई। कुलपति प्रो. वीके सिंह ने कहा कि इस समझौते से छात्रों, शिक्षकों और रिसर्च वर्क को लाभ मिलेगा। बीएसआई के वैज्ञानिक प्रो. बीके सिन्हा ने कहा कि करार से पौधों को पहचानने, उपयोग और संवर्द्धन के विविध आयामों पर गहराई से अध्ययन होगा। बॉटनी के हेड प्रो. वीएन पांडेय ने बताया कि मसौदे को सरकार की अनुमति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद एमओयू साइन करने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। इस दौरान रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य, वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे, प्रो. शरद मिश्रा, डॉ. पुष्पेंद्र मिश्र, प्रो. विनोद सिंह, प्रो. ईश्वर दास, प्रो. ओपी पांडेय आदि मौजूद थे।