{"_id":"5989df834f1c1b5e788b48a3","slug":"141502207875-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलवे में गोष्ठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेलवे में गोष्ठी
Updated Tue, 08 Aug 2017 09:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के प्रबंध विभाग की ओर से महाप्रबंधक बैठक कक्ष में राजभाषा समीक्षा तथा तुलसी दास के ‘व्यक्तित्व एवं उनकी कृति रामचरित मानस का आज के युग में महत्व’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
वरिष्ठ उप महाप्रबंधक पीएन राय ने तुलसी दास के चित्र पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होेंने कहा कि तुलसीदास का काव्य रामचरित मानस आज के समय में हर घर में उपलब्ध है। तुलसीदास के समय में भाषा की कठिनाई थी। आमजन लोग संस्कृत में लिखे धर्म ग्रंथों से अनभिज्ञ थे। ऐसी स्थिति में तुलसी दास ने आमजन की भाषा अवधी में रामचरित मानस की रचना की। उन्होंने कहा कि तुलसी दास ने अपनी रचनाओं में मानव जीवन के नैतिक मूल्यों के हर बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इससे लोगों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना जागृत हुई। उप महाप्रबंधक (सामान्य) राजेश तिवारी ने प्रबंध विभाग में राजभाषा प्रयोग-प्रसार की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए कहा कि विभाग में अधिकांश कार्य राजभाषा में किया जा रहा है। कहा कि मूल्यों पर आधारित जीवन जीने की शैली हमें रामचरित मानस में मिलती है। उप सचिव जन परिवेदना एडी अग्निहोत्री ने रामचरित मानस का आज के युग में महत्व पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी का संचालन उप सचिव (गोपनीय) बीएन उपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी संजय सिंह, उप महाप्रबंधक (सामान्य) राजेश तिवारी, महाप्रबंधक सचिव डीके खरे, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (लेखा) इंद्र प्रकाश, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (इंजीनियरिंग) आकाश गुप्ता, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (विद्युत) अजितेंद्र त्रिपाठी, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (यातायात) एमएन राय आदि उपस्थित थे।
वरिष्ठ उप महाप्रबंधक पीएन राय ने तुलसी दास के चित्र पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होेंने कहा कि तुलसीदास का काव्य रामचरित मानस आज के समय में हर घर में उपलब्ध है। तुलसीदास के समय में भाषा की कठिनाई थी। आमजन लोग संस्कृत में लिखे धर्म ग्रंथों से अनभिज्ञ थे। ऐसी स्थिति में तुलसी दास ने आमजन की भाषा अवधी में रामचरित मानस की रचना की। उन्होंने कहा कि तुलसी दास ने अपनी रचनाओं में मानव जीवन के नैतिक मूल्यों के हर बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इससे लोगों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना जागृत हुई। उप महाप्रबंधक (सामान्य) राजेश तिवारी ने प्रबंध विभाग में राजभाषा प्रयोग-प्रसार की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए कहा कि विभाग में अधिकांश कार्य राजभाषा में किया जा रहा है। कहा कि मूल्यों पर आधारित जीवन जीने की शैली हमें रामचरित मानस में मिलती है। उप सचिव जन परिवेदना एडी अग्निहोत्री ने रामचरित मानस का आज के युग में महत्व पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी का संचालन उप सचिव (गोपनीय) बीएन उपाध्याय ने किया।
विज्ञापन
इस अवसर पर वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी संजय सिंह, उप महाप्रबंधक (सामान्य) राजेश तिवारी, महाप्रबंधक सचिव डीके खरे, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (लेखा) इंद्र प्रकाश, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (इंजीनियरिंग) आकाश गुप्ता, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (विद्युत) अजितेंद्र त्रिपाठी, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (यातायात) एमएन राय आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन