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एमसीआई के निरीक्षण में मिली खामियां
Updated Sun, 06 Aug 2017 02:11 AM IST
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गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग का शनिवार को एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया। विभाग में मानक से कम शिक्षक मिले। इससे पीजी सीट की मान्यता पर संकट मंडराने लगा है।
बालरोग विभाग में डॉक्ट्रेट ऑफ मेडिसिन (एमडी) में नौ और डिप्लोमा इन चाइल्ड हेल्थ (डीसीएच) में 24 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें से 20 विद्यार्थियों को पीएमएस संवर्ग के तहत शासन ने भेजा है। इनकी पढ़ाई के लिए संसाधनों की पड़ताल करने के लिए शनिवार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के सदस्य कोटा के राजकीय मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के प्रो. एएल बैरवा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जांच में उन्हें कई खामियां मिलीं। विभाग में मरीजों की संख्या तो पर्याप्त मिलीं, मगर शिक्षकों की भारी कमी पाई गई। विभाग में प्रोफेसर के चार पद (दो रेग्यूलर और दो संविदा) हैं, सभी रिक्त मिले। सूत्रों के कॉलेज प्रशासन ने पीएमएस संवर्ग से विभाग में तैनात डॉ. रचना भटनागर को प्रोफेसर बताया, मगर इसे एमसीआई के सदस्य ने मानने से इन्कार कर दिया। विभाग में पीजी की पढ़ाई के लिए तीन एसोसिएट प्रोफेसर ही मिले।
मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग का शनिवार को एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया। विभाग में मानक से कम शिक्षक मिले। इससे पीजी सीट की मान्यता पर संकट मंडराने लगा है।
बालरोग विभाग में डॉक्ट्रेट ऑफ मेडिसिन (एमडी) में नौ और डिप्लोमा इन चाइल्ड हेल्थ (डीसीएच) में 24 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें से 20 विद्यार्थियों को पीएमएस संवर्ग के तहत शासन ने भेजा है। इनकी पढ़ाई के लिए संसाधनों की पड़ताल करने के लिए शनिवार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के सदस्य कोटा के राजकीय मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के प्रो. एएल बैरवा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जांच में उन्हें कई खामियां मिलीं। विभाग में मरीजों की संख्या तो पर्याप्त मिलीं, मगर शिक्षकों की भारी कमी पाई गई। विभाग में प्रोफेसर के चार पद (दो रेग्यूलर और दो संविदा) हैं, सभी रिक्त मिले। सूत्रों के कॉलेज प्रशासन ने पीएमएस संवर्ग से विभाग में तैनात डॉ. रचना भटनागर को प्रोफेसर बताया, मगर इसे एमसीआई के सदस्य ने मानने से इन्कार कर दिया। विभाग में पीजी की पढ़ाई के लिए तीन एसोसिएट प्रोफेसर ही मिले।
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