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युवा हैं तो मधुमेह नहीं होगा, भ्रम में न रहें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 14 Nov 2018 01:35 AM IST
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गोरखपुर। अभी तो युवा हूं। खाने में परहेज कैसा। मुझे मधुमेह कैसे हो सकता है। ऐसा भ्रम न पालें। दिनभर ऑफिस में बैठकर काम करते हैं। शारीरिक श्रम कम हो पाता है। फास्ट और जंक फूड पर जिंदगी कट रही है तो यकीन मानिए आपकी उम्र कुछ भी हो। आप पर डायबिटीज का खतरा सबसे ज्यादा है। शहर के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश सिंह का कहना है कि शारीरिक श्रम कम होने के कारण रोजाना नए मरीज सामने आ रहे हैं। 35 वर्ष की उम्र पूरा करने वाले युवा मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं।
विश्व मधुमेह दिवस बुधवार को है। संजीवनी हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर राप्ती नगर सहित शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इससे पहले ही मधुमेह रोग विशेषज्ञों ने बढ़ते रोगियों की संख्या पर चिंता जताई और कहा कि भारत में 7.29 करोड़ मधुमेह रोगी हैं। इसमें 8.8 फीसदी वयस्क शामिल हैं। शहर के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता के मुताबिक मधुमेह को पहले शहरी क्षेत्र की बीमारी कहा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसकी चपेट में ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी हैं। वह रोजाना करीब 30 मरीज देखते हैं। इसमें से 15 नए मरीज होते हैं। ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। 80 फीसदी मरीज टाइप-2 मधुमेह से ग्रसित होते हैं।
ऐसे मरीज उचित जीवन शैली अपनाकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। यह बीमारी अनियमित दिनचर्या और कम शारीरिक श्रम की वजह से होती है। फास्ट फूड का सेवन भी मधुमेह रोगी बना रहा है। अब जरूरत संयमित दिनचर्या, अच्छे खानपान और नियमित व्यायाम की है।
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लक्षण
तेज भूख और अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब होना, अचानक वजन घटना, ज्यादा थकान महसूस करना, घाव भरने में समय लगना, आंख की रोशनी का कमजोर होना, हाथ-पैर का सुन्न होना और बार-बार संक्रमण की चपेट में आना।
बचाव
मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता का कहना है कि 40 मिनट तेज और लगातार टहलने से मधुमेह के इलाज, बचाव में सहायता मिलती है। सुबह, शाम टहलना फायदेमंद होता है। उचित व्यायाम, खान-पान में सावधानी और वजन नियंत्रित करके भी मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।
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विश्व मधुमेह दिवस बुधवार को है। संजीवनी हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर राप्ती नगर सहित शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इससे पहले ही मधुमेह रोग विशेषज्ञों ने बढ़ते रोगियों की संख्या पर चिंता जताई और कहा कि भारत में 7.29 करोड़ मधुमेह रोगी हैं। इसमें 8.8 फीसदी वयस्क शामिल हैं। शहर के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता के मुताबिक मधुमेह को पहले शहरी क्षेत्र की बीमारी कहा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसकी चपेट में ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी हैं। वह रोजाना करीब 30 मरीज देखते हैं। इसमें से 15 नए मरीज होते हैं। ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। 80 फीसदी मरीज टाइप-2 मधुमेह से ग्रसित होते हैं।
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ऐसे मरीज उचित जीवन शैली अपनाकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। यह बीमारी अनियमित दिनचर्या और कम शारीरिक श्रम की वजह से होती है। फास्ट फूड का सेवन भी मधुमेह रोगी बना रहा है। अब जरूरत संयमित दिनचर्या, अच्छे खानपान और नियमित व्यायाम की है।
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लक्षण
तेज भूख और अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब होना, अचानक वजन घटना, ज्यादा थकान महसूस करना, घाव भरने में समय लगना, आंख की रोशनी का कमजोर होना, हाथ-पैर का सुन्न होना और बार-बार संक्रमण की चपेट में आना।
बचाव
मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता का कहना है कि 40 मिनट तेज और लगातार टहलने से मधुमेह के इलाज, बचाव में सहायता मिलती है। सुबह, शाम टहलना फायदेमंद होता है। उचित व्यायाम, खान-पान में सावधानी और वजन नियंत्रित करके भी मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।