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छोटी दिवाली पर पापों के नाश को किया दीपदान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Oct 2017 08:53 PM IST
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छोटी दिवाली के दिन भी दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटी रही।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। हर्षोल्लास के साथ शहर में छोटी दिवाली परंपरागत ढंग से मनाई गई। सुबह लोगों ने घरों में स्नान के बाद पूजापाठ किया। शाम हुई तो शहर रोशनी से नहा उठा। लोगों ने पापों के प्रतीक नरकासुर के नाश की कामना से चार ज्योत वाले दीप जलाए।
बुधवार सुबह ही छोटी दिवाली का उल्लास लोगों पर हावी हो गया। सोशल मीडिया के जरिए लोग दूरदराज में रहने वाले सगे संबंधियों और मित्रों को छोटी दिवाली की शुभकामनाएं दीं। फोन पर भी पर्व की शुभकामना देने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। सुबह लोगों ने घरों पर स्नान के बाद गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की। तमाम लोगों ने यमतर्पण भी किया। शाम को नरक दोष से बचने और पापों के विनाश के लिए घरों के बाहर चौमुखा दीप जलाया। त्योहार पर शाम को घर के बाहर चौमुखा दीप जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का संहार किया था। इसलिए छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
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बुधवार सुबह ही छोटी दिवाली का उल्लास लोगों पर हावी हो गया। सोशल मीडिया के जरिए लोग दूरदराज में रहने वाले सगे संबंधियों और मित्रों को छोटी दिवाली की शुभकामनाएं दीं। फोन पर भी पर्व की शुभकामना देने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। सुबह लोगों ने घरों पर स्नान के बाद गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की। तमाम लोगों ने यमतर्पण भी किया। शाम को नरक दोष से बचने और पापों के विनाश के लिए घरों के बाहर चौमुखा दीप जलाया। त्योहार पर शाम को घर के बाहर चौमुखा दीप जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का संहार किया था। इसलिए छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
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नदी घाटों पर जुटे लोग
नरक चतुर्दशी पर नदी स्नान की प्राचीन मान्यता है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े इस पर्व पर यमुना स्नान का बड़ा महात्म्य है। इसी के चलते स्थानीय नदी घाटों पर पूरे दिन लोगों की भीड़ रही। लोगों ने घाटों पर स्नान-तर्पण किए।
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