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इस बार नाव से खुशहाली लेकर आ रहीं मातारानी
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर।
शारदीय नवरात्र में इस बार मातारानी भक्तों के लिए खुशहाली लेकर आ रही हैं। मां दुर्गा नाव पर खुशियां लिए पधारेंगी। इतना ही नहीं इस बार 21 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र पर कई खास योग भी बन रहे हैं। ये खास योग भक्तों को नवरात्र पर देवी उपासना का कई गुना फल दिलाएंगे।
सबसे अहम बात यह है कि इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद मिश्र ने बताया कि नवरात्र यूं तो 21 सितंबर गुरुवार को शुरू हो रहा है। माता का आगमन सप्तमी तिथि से माना जाता है। इस बार माता का आगमन नाव पर हो रहा है। यह शुभ और सुख देने वाला है। बुधवार का दिन इसे और भी शुभफलदायक बना रहा है।
हस्त नक्षत्र में शुरू हो रहा नवरात्र
इस बार नवरात्र हस्त नक्षत्र में प्रारंभ हो रहा है। पंडित शरद चंद मिश्र का कहना है कि इस नक्षत्र में नवरात्र की शुरुआत मंगलकारक मानी गई है। इसलिए यह नवरात्र देवी उपासना के लिए बेहद खास है।
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शुक्र और शोभन योग बना रहे खास
गुरुवार को नवरात्र की शुरुआत पर दो खास योग बन रहे हैं। पंडित शरद चंद मिश्र के मुताबिक नवरात्र के पहले दिन शुक्र और शोभन योग का बनना देवी भक्तों को सुभग फल देगा। ये दोनों योग काफी शुभ हैं।
दिन में ही करें कलश स्थापना
मत्स्य पुराण के मुताबिक देवी की कलश स्थापना और विसर्जन दिन में ही करना चाहिए। पंडित जी के अनुसार गुरुवार दिन में प्रतिपदा तिथि के दौरान कलश स्थापना करना सही होगा।
ये हैं कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित शरद चंद मिश्र ने बताया कि 21 की सुबह 5:58 से 9:57, दोपहर 11:36 से 12:24 और 2:22 से शाम 4:07 तक कलश स्थापना का उत्तम मुहूर्त है। इसमें सबसे उत्तम सुबह का मुहूर्त है।
मुर्गे पर विदा होंगी देवी दुर्गा
माता की विदाई दशमी को मानी जाती है। इस बार 30 सितंबर शनिवार को देवी दुर्गा की विदाई होगी। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार माता मुर्गे पर सवार होकर विदा होंगी। मुर्गे पर माता की विदाई व्याकुलता और जनाक्रोश को बढ़ावा देगा।
शारदीय नवरात्र में इस बार मातारानी भक्तों के लिए खुशहाली लेकर आ रही हैं। मां दुर्गा नाव पर खुशियां लिए पधारेंगी। इतना ही नहीं इस बार 21 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र पर कई खास योग भी बन रहे हैं। ये खास योग भक्तों को नवरात्र पर देवी उपासना का कई गुना फल दिलाएंगे।
सबसे अहम बात यह है कि इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद मिश्र ने बताया कि नवरात्र यूं तो 21 सितंबर गुरुवार को शुरू हो रहा है। माता का आगमन सप्तमी तिथि से माना जाता है। इस बार माता का आगमन नाव पर हो रहा है। यह शुभ और सुख देने वाला है। बुधवार का दिन इसे और भी शुभफलदायक बना रहा है।
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हस्त नक्षत्र में शुरू हो रहा नवरात्र
इस बार नवरात्र हस्त नक्षत्र में प्रारंभ हो रहा है। पंडित शरद चंद मिश्र का कहना है कि इस नक्षत्र में नवरात्र की शुरुआत मंगलकारक मानी गई है। इसलिए यह नवरात्र देवी उपासना के लिए बेहद खास है।
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शुक्र और शोभन योग बना रहे खास
गुरुवार को नवरात्र की शुरुआत पर दो खास योग बन रहे हैं। पंडित शरद चंद मिश्र के मुताबिक नवरात्र के पहले दिन शुक्र और शोभन योग का बनना देवी भक्तों को सुभग फल देगा। ये दोनों योग काफी शुभ हैं।
दिन में ही करें कलश स्थापना
मत्स्य पुराण के मुताबिक देवी की कलश स्थापना और विसर्जन दिन में ही करना चाहिए। पंडित जी के अनुसार गुरुवार दिन में प्रतिपदा तिथि के दौरान कलश स्थापना करना सही होगा।
ये हैं कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित शरद चंद मिश्र ने बताया कि 21 की सुबह 5:58 से 9:57, दोपहर 11:36 से 12:24 और 2:22 से शाम 4:07 तक कलश स्थापना का उत्तम मुहूर्त है। इसमें सबसे उत्तम सुबह का मुहूर्त है।
मुर्गे पर विदा होंगी देवी दुर्गा
माता की विदाई दशमी को मानी जाती है। इस बार 30 सितंबर शनिवार को देवी दुर्गा की विदाई होगी। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार माता मुर्गे पर सवार होकर विदा होंगी। मुर्गे पर माता की विदाई व्याकुलता और जनाक्रोश को बढ़ावा देगा।