{"_id":"5b4787c04f1c1b18308b5dac","slug":"111531414464-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह वर्ष पूर्व पेपर लीक मामले में विधानसभा ने मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह वर्ष पूर्व पेपर लीक मामले में विधानसभा ने मांगी रिपोर्ट
गाोरख्ापुर
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:09 AM IST
विज्ञापन
फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी में वर्ष 2012 की वार्षिक परीक्षा में चार पेपर लीक होने के मामले में विधानसभा की आश्वासन समिति ने कार्रवाई के बाबत रिपोर्ट मांगी है। इसी सिलसिले में 17 जुलाई को समिति की बैठक में गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव को पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले की जांच की फाइल पहले ही बंद कर दिया है।
दरअसल, वर्ष 2012 में बीए प्रथम वर्ष का अंग्रेजी प्रथम प्रश्न पत्र और बीए अंतिम वर्ष का समाजशास्त्र द्वितीय प्रश्नपत्र तथा बीकाम द्वितीय वर्ष का एक पेपर लीक हुआ था। तब यह मामला काफी चर्चा में रहा। कई चरणों की जांच के बाद चार लोगों की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन उन्हें महज चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। मामले की जांच इतनी लंबी चली कि आरोपियों में से दो सेवानिवृत्त हो चुके थे। जांच में पेपर कहां से लीक हुआ, इसे नहीं पकड़ा जा सका।
-
सीबीसीआईडी ने की थी जांच
गोरखपुर। पेपर लीक होने के मामले में अप्रैल 2015 में सीबीसीआईडी ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. एनएन त्रिपाठी, डॉ. संजय त्रिपाठी, सरस्वती देवी महाविद्यालय नंदापार के तत्कालीन केंद्र अध्यक्ष तथा स्ट्रांग रूम के कर्मचारी हरी सिंह रावत, राजेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया था।
विज्ञापन
---
कोट
इस मामले में कार्यपरिषद ने दो कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी देकर जांच बंद करने के फैसले पर मुहर लगा दी थी। आश्वासन समिति को रिपोर्ट भेजी गई है। 17 जुलाई को आश्वासन समिति की बैठक है, जिसमें कार्य परिषद की रिपोर्ट की लिखित कॉपी भी सौंप दी जाएगी।
शत्रोहन वैश्य, रजिस्ट्रार गोरखपुर यूनिवर्सिटी
विज्ञापन
दरअसल, वर्ष 2012 में बीए प्रथम वर्ष का अंग्रेजी प्रथम प्रश्न पत्र और बीए अंतिम वर्ष का समाजशास्त्र द्वितीय प्रश्नपत्र तथा बीकाम द्वितीय वर्ष का एक पेपर लीक हुआ था। तब यह मामला काफी चर्चा में रहा। कई चरणों की जांच के बाद चार लोगों की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन उन्हें महज चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। मामले की जांच इतनी लंबी चली कि आरोपियों में से दो सेवानिवृत्त हो चुके थे। जांच में पेपर कहां से लीक हुआ, इसे नहीं पकड़ा जा सका।
विज्ञापन
-
सीबीसीआईडी ने की थी जांच
गोरखपुर। पेपर लीक होने के मामले में अप्रैल 2015 में सीबीसीआईडी ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. एनएन त्रिपाठी, डॉ. संजय त्रिपाठी, सरस्वती देवी महाविद्यालय नंदापार के तत्कालीन केंद्र अध्यक्ष तथा स्ट्रांग रूम के कर्मचारी हरी सिंह रावत, राजेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया था।
विज्ञापन
---
कोट
इस मामले में कार्यपरिषद ने दो कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी देकर जांच बंद करने के फैसले पर मुहर लगा दी थी। आश्वासन समिति को रिपोर्ट भेजी गई है। 17 जुलाई को आश्वासन समिति की बैठक है, जिसमें कार्य परिषद की रिपोर्ट की लिखित कॉपी भी सौंप दी जाएगी।
शत्रोहन वैश्य, रजिस्ट्रार गोरखपुर यूनिवर्सिटी