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प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से वंचित रह जाएंगे 83 गांव
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 20 Jun 2018 01:25 AM IST
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गोरखपुर। जिले के 83 गांवों के गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवार प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत’ का लाभ नहीं उठा सकेंगे। 2011 की सामाजिक आर्थिक गणना की चूक सात साल बाद अब इनके लिए मुसीबत बन गई है। स्वास्थ्य विभाग को मिली सूची में इन गांवों का नाम ही गायब हैं। ऐसे में योजना के तहत मिलने वाली पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा से इन गांवों के हजारों परिवार महरूम होते नजर आ रहे हैं।
पीएम की ‘आयुष्मान भारत’ योजना शुरू से ही चर्चाओं में है। पिछले दिनों कोठी और कार वालों का नाम लाभार्थियों की सूची में होने पर सवाल उठे तो योजना में हो रही लेटलतीफी इन दिनों चर्चाओं में है। अब एक और बड़ी चूक सामने आई है। उरुवा ब्लॉक के एक व्यक्ति ने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए अपने इलाके के भटपुरवा और चौकड़ी गांव के लाभार्थियों की सूची मांगी। पता चला कि 2011 कि सामाजिक आर्थिक गणना में उक्त गांव में एक भी बीपीएल परिवार नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग को लाभार्थियों का परीक्षण करके पोर्टल पर डाटा फीड करने के लिए 2011 की जो सूची दी गई है, उसमें ये दो गांव ही नहीं बल्कि ऐसे 83 गांव गायब हैं। शासनादेश के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग योजना में इस सूची से इतर लाभार्थियों को शामिल नहीं कर सकता। केवल सूची में शामिल परिवार में आए नए सदस्य का नाम ही इससे जोड़ा जा सकता है। ऐसे में फिलहाल इन गांवों में रह रहे लोगों को प्रधानमंत्री का ‘आर्शिवाद’ मिलते की संभावना नहीं नजर आ रही।
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स्वास्थ्य विभाग योजना में नए लाभार्थी परिवार नहीं जोड़ सकता। 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक गणना में 83 गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों की सूची नहीं है। शासन से कोई आदेश न मिलने तक इन गांवों के लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।
- डॉ. एनके पांडेय, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत
पीएम की ‘आयुष्मान भारत’ योजना शुरू से ही चर्चाओं में है। पिछले दिनों कोठी और कार वालों का नाम लाभार्थियों की सूची में होने पर सवाल उठे तो योजना में हो रही लेटलतीफी इन दिनों चर्चाओं में है। अब एक और बड़ी चूक सामने आई है। उरुवा ब्लॉक के एक व्यक्ति ने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए अपने इलाके के भटपुरवा और चौकड़ी गांव के लाभार्थियों की सूची मांगी। पता चला कि 2011 कि सामाजिक आर्थिक गणना में उक्त गांव में एक भी बीपीएल परिवार नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग को लाभार्थियों का परीक्षण करके पोर्टल पर डाटा फीड करने के लिए 2011 की जो सूची दी गई है, उसमें ये दो गांव ही नहीं बल्कि ऐसे 83 गांव गायब हैं। शासनादेश के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग योजना में इस सूची से इतर लाभार्थियों को शामिल नहीं कर सकता। केवल सूची में शामिल परिवार में आए नए सदस्य का नाम ही इससे जोड़ा जा सकता है। ऐसे में फिलहाल इन गांवों में रह रहे लोगों को प्रधानमंत्री का ‘आर्शिवाद’ मिलते की संभावना नहीं नजर आ रही।
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15 अगस्त से शुरूआत पर काफी काम बाकी
मोदी केयर या नमोकेयर नाम से भी पुकारी जा रही इस योजना को दो चरणों में लांच करना है। पहले 15 अगस्त और दूसरे चरण में दो अक्तूबर को लाभार्थी इस योजना से आच्छादित किए जाने हैं। लेकिन अभी लाभार्थियों की डाटा फीडिंग का काम ही पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीण क्षेत्र की डाटा फीडिंग का काम 20 मई तक पूरा हो जाना था, लेकिन अभी तक महज 40 फीसदी काम पूरा करते हुए स्वास्थ्य विभाग 62 हजार परिवारों का डाटा पोर्टल पर अपलोड कर सका है। ग्रामीण क्षेत्र की फीडिंग पूरा होने के बाद शहर के लाभार्थियों की फीडिंग का काम शुरू होगा।
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स्वास्थ्य विभाग योजना में नए लाभार्थी परिवार नहीं जोड़ सकता। 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक गणना में 83 गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों की सूची नहीं है। शासन से कोई आदेश न मिलने तक इन गांवों के लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।
- डॉ. एनके पांडेय, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत