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विभागों को पता ही नहीं कब्जेदार कौन
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:43 AM IST
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गोरखपुर।
जिले में एंटी भू-माफिया अभियान की धीमी प्रगति पर डीएम राजीव रौतेला ने कई विभागों के अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है। शुक्रवार को अभियान की समीक्षा के दौरान आए कई तथ्यों ने डीएम को चौका दिया। जीडीए की तरफ से जिन तीन लोगों को भू-माफिया बताते हुए उनपर एफआईआर दर्ज कराने की डीएम को सूचना दी गई थी, सत्यापन में वे भू-माफिया मिले ही नहीं। इसपर खफा डीएम ने जीडीए के संबंधित अभियंता से जवाब-तलब करने के साथ ही उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया। इसी तरह पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग की खराब प्रगति के साथ ही अफसरों के बैठक में अनुपस्थित रहने पर डीएम ने दोनों विभागों के सभी अभियंताओं का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
यह पहला मौका नहीं है जब विभागों की तरफ से डीएम को भू-माफियाओं की गलत सूचना दी गई है। शासन से निर्देश के बाद जब जिले में यह अभियान शुरू हुआ तो पहले करीब 70 लोगों को भू-माफिया बता दिया गया। डीएम ने सख्ती की तो यह संख्या घटकर 39 हुई और फिर 13 आ गई। बैठक के दौरान डीएम ने निर्देश दिया कि तीन दिन के भीतर विभाग अवैध अतिक्रमण हटाने का माइक्रो प्लान संबंधित एसडीएम को प्रस्तुत करें। एसडीएम चिह्नित भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि सभी एसडीएम तथा थानाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण न हो। विशेष रूप से शहर के सात प्रवेश द्वार पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। डीएम ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र के दबंग किस्म के व्यक्ति जो जमीन का कारोबार करते हैं और जबरदस्ती निराश्रित मजलूम की भूमि कब्जा करते हैं उन्हें चिह्नित कर रिपोर्ट दें। समीक्षा में पाया गया कि पीडब्ल्यूडी में 43.30 हेक्टेअर जमीन से अतिक्रमण हटाना था मगर चार माह बीतने पर भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। इसी तरह सिंचाई विभाग 100 में से सिर्फ 35 स्थानों का अतिक्रमण हटाया गया है।
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जिले में एंटी भू-माफिया अभियान की धीमी प्रगति पर डीएम राजीव रौतेला ने कई विभागों के अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है। शुक्रवार को अभियान की समीक्षा के दौरान आए कई तथ्यों ने डीएम को चौका दिया। जीडीए की तरफ से जिन तीन लोगों को भू-माफिया बताते हुए उनपर एफआईआर दर्ज कराने की डीएम को सूचना दी गई थी, सत्यापन में वे भू-माफिया मिले ही नहीं। इसपर खफा डीएम ने जीडीए के संबंधित अभियंता से जवाब-तलब करने के साथ ही उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया। इसी तरह पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग की खराब प्रगति के साथ ही अफसरों के बैठक में अनुपस्थित रहने पर डीएम ने दोनों विभागों के सभी अभियंताओं का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
यह पहला मौका नहीं है जब विभागों की तरफ से डीएम को भू-माफियाओं की गलत सूचना दी गई है। शासन से निर्देश के बाद जब जिले में यह अभियान शुरू हुआ तो पहले करीब 70 लोगों को भू-माफिया बता दिया गया। डीएम ने सख्ती की तो यह संख्या घटकर 39 हुई और फिर 13 आ गई। बैठक के दौरान डीएम ने निर्देश दिया कि तीन दिन के भीतर विभाग अवैध अतिक्रमण हटाने का माइक्रो प्लान संबंधित एसडीएम को प्रस्तुत करें। एसडीएम चिह्नित भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई करें।
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उन्होंने कहा कि सभी एसडीएम तथा थानाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण न हो। विशेष रूप से शहर के सात प्रवेश द्वार पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। डीएम ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र के दबंग किस्म के व्यक्ति जो जमीन का कारोबार करते हैं और जबरदस्ती निराश्रित मजलूम की भूमि कब्जा करते हैं उन्हें चिह्नित कर रिपोर्ट दें। समीक्षा में पाया गया कि पीडब्ल्यूडी में 43.30 हेक्टेअर जमीन से अतिक्रमण हटाना था मगर चार माह बीतने पर भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। इसी तरह सिंचाई विभाग 100 में से सिर्फ 35 स्थानों का अतिक्रमण हटाया गया है।
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