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तहसीलदार सदर के खिलाफ वकील अड़े
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 10 Jul 2017 07:26 PM IST
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सदर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर डीएम से मिले वकील।
- फोटो : Amar Ujala
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सदर तहसीलदार सत्येंद्र सिंह को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध गहराता जा रहा है। कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को अधिवक्ताओं की डीएम से हुई मुलाकात से वे संतुष्ट नहीं नजर आए। करीब आधे घंटे तक चली मुलाकात में डीएम राजीव रौतेला ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिवक्ता तहसीलदार के खिलाफ शिकायत करें, वे जांच कराएंगे। अगर जांच में आरोप सही पाए गए तो ही कार्रवाई होगी। डीएम ने कहा कि खजनी, सहजनवां, चौरीचौरा तकरीबन सभी तहसीलों में विरोध किया जा रहा है। ऐसे में अगर बिना मामले की तह तक गए सभी को सीधे हटा दिया जाए तो काम कैसे चलेगा। इस पर अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट सभागार के बाहर चले गए।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण पांडेय का कहना है कि उन्होंने डीएम के सामने तीन मांगे रखी हैं। वे तहसीलदार का दूसरी तहसील में तबादला कर दें या फिर उनकी न्यायिक शक्ति सील कर दें। बताया कि शासन स्तर से सत्येंद्र सिंह का तबादला हो चुका है। अगर डीएम ये दोनों कार्रवाई नहीं कर सकते तो उन्हें कार्यमुक्त ही कर दें। उन्होंने कहा कि ये तीनों मांगे नहीं मानी गई तो तहसीलदार सदर के कोर्ट का बहिष्कार मंगलवार को भी जारी रहेगा। बुधवार से जिले की सभी तहसीलों के अफसरों के कोर्ट का बहिष्कार शुरू हो जाएगा। इसके लिए तहसील के एसोसिएशन को पत्र लिखने के साथ ही कमिश्नरी बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन को भी पत्र लिखकर वहां के भी कोर्ट के बहिष्कार की अपील की गई है।
डायस पर कोई गिरेबां पकड़े यह बर्दाश्त नहीं
वार्ता के दौरान अधिवक्ताओं ने सदर तहसील में भारी फोर्स तैनात करने का विरोध किया तो डीएम राजीव रौतेला ने कहा कि पुलिस सभी की सुविधा के लिए है। साथ ही उन्होंने आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिवक्ताओं से यह भी कहा कि अफसर और अधिवक्ता दोनों कानून की रक्षा के लिए हैं मगर डायस पर चढ़कर कोई न्यायिक अफसर की गिरेबां पकड़े यह अच्छी बात नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि यह पहला मौका था इसलिए बख्श दिया गया मगर आगे ऐसा हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका इशारा सदर तहसीलदार से हुई अभद्रता वाली घटना की तरफ था।
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एसडीएम सदर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए
सदर तहसीलदार पर कार्रवाई को लेकर चल रही वार्ता के ही क्रम में अधिवक्ताओं ने एसडीएम सदर राहुल पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई फैसले विधि संगत नहीं है। इसपर डीएम ने कहा कि अधिवक्ता जब चाहेंगे, वह खुद एसडीएम सदर के डायस पर मौजूद रहकर वादों की सुनवाई की मॉनीटरिंग कर सकते हैं। निगरानी के दौरान पता चल जाएगा कि एसडीएम कीतरफ से विधि संगत सुनवाई की जा रही है या नहीं।
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कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण पांडेय का कहना है कि उन्होंने डीएम के सामने तीन मांगे रखी हैं। वे तहसीलदार का दूसरी तहसील में तबादला कर दें या फिर उनकी न्यायिक शक्ति सील कर दें। बताया कि शासन स्तर से सत्येंद्र सिंह का तबादला हो चुका है। अगर डीएम ये दोनों कार्रवाई नहीं कर सकते तो उन्हें कार्यमुक्त ही कर दें। उन्होंने कहा कि ये तीनों मांगे नहीं मानी गई तो तहसीलदार सदर के कोर्ट का बहिष्कार मंगलवार को भी जारी रहेगा। बुधवार से जिले की सभी तहसीलों के अफसरों के कोर्ट का बहिष्कार शुरू हो जाएगा। इसके लिए तहसील के एसोसिएशन को पत्र लिखने के साथ ही कमिश्नरी बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन को भी पत्र लिखकर वहां के भी कोर्ट के बहिष्कार की अपील की गई है।
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डायस पर कोई गिरेबां पकड़े यह बर्दाश्त नहीं
वार्ता के दौरान अधिवक्ताओं ने सदर तहसील में भारी फोर्स तैनात करने का विरोध किया तो डीएम राजीव रौतेला ने कहा कि पुलिस सभी की सुविधा के लिए है। साथ ही उन्होंने आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिवक्ताओं से यह भी कहा कि अफसर और अधिवक्ता दोनों कानून की रक्षा के लिए हैं मगर डायस पर चढ़कर कोई न्यायिक अफसर की गिरेबां पकड़े यह अच्छी बात नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि यह पहला मौका था इसलिए बख्श दिया गया मगर आगे ऐसा हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका इशारा सदर तहसीलदार से हुई अभद्रता वाली घटना की तरफ था।
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एसडीएम सदर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए
सदर तहसीलदार पर कार्रवाई को लेकर चल रही वार्ता के ही क्रम में अधिवक्ताओं ने एसडीएम सदर राहुल पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई फैसले विधि संगत नहीं है। इसपर डीएम ने कहा कि अधिवक्ता जब चाहेंगे, वह खुद एसडीएम सदर के डायस पर मौजूद रहकर वादों की सुनवाई की मॉनीटरिंग कर सकते हैं। निगरानी के दौरान पता चल जाएगा कि एसडीएम कीतरफ से विधि संगत सुनवाई की जा रही है या नहीं।