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मंडल में 1000 धार्मिक स्थल बने रास्तों की चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:41 AM IST
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सिटी मॉल के पास रोड पर बना मंदिर।
- फोटो : rajesh kumar
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गोरखपुर मंडल में भी तमाम सड़कों, बाजारों समेत कई सार्वजनिक स्थलों पर बने करीब एक हजार अवैध धार्मिक स्थल रास्तों के लिए चुनौती बने हुए हैं। इनमें से सर्वाधिक अवैध धार्मिक स्थल देवरिया में और फिर गोरखपुर में पाए गए हैं। कुशीनगर और महराजगंज में इनकी संख्या सौ से कम है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद 2011 में ही प्रशासन की तरफ से चलाए गए एक बड़े अभियान में इन धार्मिक स्थलों को चिह्नित किया गया था। मगर तब से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। कमिश्नर पी गुरु प्रसाद का कहना है कि इसके बाद से कोई नया निर्माण नहीं हुआ है। पुलिस और प्रशासन निरंतर इसकी निगरानी करती है। जहां भी ऐसी सूचना मिलती है तत्काल कार्रवाई की जाती है।
इस बीच में सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं में कई बार सख्ती की मगर इंतजामिया ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि 2011 के बाद से कोई भी अवैध धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं होने पाए। मगर प्रशासन के दावों के विपरीत शहरों में तो नहीं मगर ग्रामीण इलाकों और हाईवे आदि के किनारे खामोशी से कुछ निर्माण हो गए। अब हाई कोर्ट ने भी सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर अवैध धार्मिक स्थल को लेकर सख्ती की है तो लोगों की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं।
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कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति ने सभी जिलोें में अभियान चलवाकर अवैध धार्मिक स्थलों को चिह्नित कराया था। शहरों में नगर निगम और नगर पालिका को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी तो ग्रामीण इलाकों में नगर पंचायतों और पंचायत आदि महकमों से यह काम कराया गया।
कमिश्नर की तरफ से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक मंडल में कुल 1055 अवैध धार्मिक स्थल चिह्नित किए गए जिनमें देवरिया में 465, गोरखपुर में 405, कुशीनगर में 94 और महराजगंज में 89 अवैध धार्मिक स्थल शामिल हैं। गोरखपुर में चिह्नित किए गए अवैध धार्मिक स्थलों में से आधे से अधिक तो शहरी क्षेत्र में हैं। इनमें ज्यादातर सड़कों व उनकी पटरियों पर बने हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद 2011 में ही प्रशासन की तरफ से चलाए गए एक बड़े अभियान में इन धार्मिक स्थलों को चिह्नित किया गया था। मगर तब से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। कमिश्नर पी गुरु प्रसाद का कहना है कि इसके बाद से कोई नया निर्माण नहीं हुआ है। पुलिस और प्रशासन निरंतर इसकी निगरानी करती है। जहां भी ऐसी सूचना मिलती है तत्काल कार्रवाई की जाती है।
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इस बीच में सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं में कई बार सख्ती की मगर इंतजामिया ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि 2011 के बाद से कोई भी अवैध धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं होने पाए। मगर प्रशासन के दावों के विपरीत शहरों में तो नहीं मगर ग्रामीण इलाकों और हाईवे आदि के किनारे खामोशी से कुछ निर्माण हो गए। अब हाई कोर्ट ने भी सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर अवैध धार्मिक स्थल को लेकर सख्ती की है तो लोगों की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं।
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कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति ने सभी जिलोें में अभियान चलवाकर अवैध धार्मिक स्थलों को चिह्नित कराया था। शहरों में नगर निगम और नगर पालिका को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी तो ग्रामीण इलाकों में नगर पंचायतों और पंचायत आदि महकमों से यह काम कराया गया।
कमिश्नर की तरफ से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक मंडल में कुल 1055 अवैध धार्मिक स्थल चिह्नित किए गए जिनमें देवरिया में 465, गोरखपुर में 405, कुशीनगर में 94 और महराजगंज में 89 अवैध धार्मिक स्थल शामिल हैं। गोरखपुर में चिह्नित किए गए अवैध धार्मिक स्थलों में से आधे से अधिक तो शहरी क्षेत्र में हैं। इनमें ज्यादातर सड़कों व उनकी पटरियों पर बने हैं।