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ग्रामीणों ने लगाया जाम
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:03 AM IST
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जाम लगाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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बुधवार को बस्ती जिले में पुलिस व बदमाशों के बीच हुआ इनकाउंटर सवालों के घेरे में आ गया। गुरुवार को गुस्साए परिवारीजनों व ग्रामीणों ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए अयोध्या-कटरा शिवदयालगंज मार्ग जाम कर दिया।
बस्ती जिले की छावनी थाना क्षेत्र के गौरिया नयन गांव में बुधवार को हुई मुठभेड़ मेें वहां की पुलिस ने यहां के नवाबगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर रामकुमार यादव को मार गिराया था।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के दुर्गागंज माझा गांव के निवासी रामकुमार यादव के इनकाउंटर की खबर सुनते ही गुरुवार को परिवारीजनाें व ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए कटरा शिवदयालगंज-अयोध्या
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मार्ग पर बडे़ पुराने पुल के निकट जाम लगा दिया।
जाम लगा रहे परिवारीजनों का आरोप था कि मुठभेड़ फर्जी है, रामकुमार यादव को उसके खेत से उठा लिया गया और ले जाकर गोली मार दी गई। यही नहीं उसकी लाश भी परिवारीजनों को नहीं सौंपी गई,बल्कि उसे वहीं पर जलवा दिया गया।
जाम लगने की सूचना पर सीओ अमित किशोर सहित अन्य थानों की पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंचे। परिवारीजनों ने मामले की जांच कराने, मृतक के पत्नी व बेटी के भरणपोषण की व्यवस्था कराने सहित अन्य मांगें रखी। ग्रामीण मांगों को पूरा करने को लेकर ठोस आश्वासन देने की जिद पर ही अड़े रहे।
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बस्ती जिले की छावनी थाना क्षेत्र के गौरिया नयन गांव में बुधवार को हुई मुठभेड़ मेें वहां की पुलिस ने यहां के नवाबगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर रामकुमार यादव को मार गिराया था।
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के दुर्गागंज माझा गांव के निवासी रामकुमार यादव के इनकाउंटर की खबर सुनते ही गुरुवार को परिवारीजनाें व ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए कटरा शिवदयालगंज-अयोध्या
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मार्ग पर बडे़ पुराने पुल के निकट जाम लगा दिया।
जाम लगा रहे परिवारीजनों का आरोप था कि मुठभेड़ फर्जी है, रामकुमार यादव को उसके खेत से उठा लिया गया और ले जाकर गोली मार दी गई। यही नहीं उसकी लाश भी परिवारीजनों को नहीं सौंपी गई,बल्कि उसे वहीं पर जलवा दिया गया।
जाम लगने की सूचना पर सीओ अमित किशोर सहित अन्य थानों की पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंचे। परिवारीजनों ने मामले की जांच कराने, मृतक के पत्नी व बेटी के भरणपोषण की व्यवस्था कराने सहित अन्य मांगें रखी। ग्रामीण मांगों को पूरा करने को लेकर ठोस आश्वासन देने की जिद पर ही अड़े रहे।