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अक्षय नवमी पर आज 30 हजार श्रद्घालु करेंगे झालीधाम की परिक्रमा
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गोंडा। शांति मनोरम तपोवन झालीधाम आश्रम में अक्षय नवमी को होने वाले परिक्रमा की तैयारियां पूरी कर ली गई है। शनिवार को यहां 30 हजार परिक्रमार्थी आश्रम के चारों ओर पांच किलो मीटर की परिक्रमा करेंगे।
खरगूपुर से तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित मनोरम तपोवन झालीधाम आश्रम पर अक्षय नवमी के अवसर पर मेला व परिक्रमा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसमें आस-पास के क्षेत्रों सहित बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती से हजारों परिक्रमार्थी आश्रम की परिक्रमा करने आते हैं।
झालीधाम आश्रम के पौराणिक एवम मनोरम स्थल होने के कारण यहां श्रद्धालु दर्शन को आया करते हैं। मगर अक्षय नवमी पर भारी संख्या में यहां परिक्रमार्थी आते हैं। माना जा रहा है कि इस बार तीस हजार श्रद्धालु परक्रिमा में सम्मिलित होंगे। मेला व परिक्रमा की तैयारियां पूरी कर ली गयी है।
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आश्रम के सेवादार आशीष त्रिपाठी ने बताया कि यहां साफ सफाई, प्रकाश, पेयजल आदि का कार्य हो चुका है। जिससे श्रद्धालुओं को कोई समस्या न हो। इस बार परिक्रमा में 30 हजार से अधिक परिक्रमार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रभारी निरीक्षक सतानंद पांडेय ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्य गेट, मन्दिर परिसर व परिक्रमा के दौरान पर्याप्त उपनिरीक्षक व महिला पुरुष आरक्षियों की ड्यूटी लगाई गई है।
झालीधाम आश्रम का क्षेत्र प्रचीन काल में जंगल से घिरा हुआ था और यह क्षेत्र पहले बेलचकरा के नाम से जाना जाता था। स्वामी राम मिलन दास महराज बहराइच जिले के मुंडेरवा सरहदी गांव के रहने वाले थे। उनकी बचपन से भजन कीर्तन व ईश्वर की सेवा में विशेष रुचि थी।
स्वामी राम मिलन महराज ने यहां कई वर्षों तक ईश्वर की सेवा में लीन होकर तपस्या की थी। इसके बाद उन्होंने यहीं पर 21 वर्षों तक समाधि में रहकर तपस्या की। उसी के बाद उनका देहांत हो गया।
आश्रम में महराज की स्मृति में उनकी समाधि का निर्माण कराया गया। जहां आज भी सुबह शाम उनकी ईश्वर के साथ पूजा होती है। यहां भगवान श्रीराम व सीता के साथ ही स्वामी राम मिलन दास की मूर्ति बनाई गयी है। परिसर में शबरी की मूर्ति लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
यहां आश्रम में एक कामधेनु गाय है जो बिना प्रजनन की क्रिया से गुजरे हमेशा दूध देती है। उसी दूध से आश्रम में पूजा की जाती है। महराज के बाद अब आश्रम के महंत स्वामी नृसिंह दास महराज हैं।
मन्दिर के सामने एक विशाल सरोवर है। जिसमें पहले बड़े बड़े कछुए पाले गए थे, लेकिन अब सरोवर के मध्य कुंतेश्वर महादेव मन्दिर का निर्माण हो रहा है। यहां महाभारत काल अज्ञातवास के दौरान जंगल में पांचो पांडव अपनी माता कुंती के साथ रहते थे। उसी समय भीम ने एक राक्षस का वध किया था। माता कुंती की स्मृति में सरोवर में कुंतेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हो रहा है।
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खरगूपुर से तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित मनोरम तपोवन झालीधाम आश्रम पर अक्षय नवमी के अवसर पर मेला व परिक्रमा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसमें आस-पास के क्षेत्रों सहित बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती से हजारों परिक्रमार्थी आश्रम की परिक्रमा करने आते हैं।
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झालीधाम आश्रम के पौराणिक एवम मनोरम स्थल होने के कारण यहां श्रद्धालु दर्शन को आया करते हैं। मगर अक्षय नवमी पर भारी संख्या में यहां परिक्रमार्थी आते हैं। माना जा रहा है कि इस बार तीस हजार श्रद्धालु परक्रिमा में सम्मिलित होंगे। मेला व परिक्रमा की तैयारियां पूरी कर ली गयी है।
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आश्रम के सेवादार आशीष त्रिपाठी ने बताया कि यहां साफ सफाई, प्रकाश, पेयजल आदि का कार्य हो चुका है। जिससे श्रद्धालुओं को कोई समस्या न हो। इस बार परिक्रमा में 30 हजार से अधिक परिक्रमार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रभारी निरीक्षक सतानंद पांडेय ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्य गेट, मन्दिर परिसर व परिक्रमा के दौरान पर्याप्त उपनिरीक्षक व महिला पुरुष आरक्षियों की ड्यूटी लगाई गई है।
झालीधाम आश्रम का क्षेत्र प्रचीन काल में जंगल से घिरा हुआ था और यह क्षेत्र पहले बेलचकरा के नाम से जाना जाता था। स्वामी राम मिलन दास महराज बहराइच जिले के मुंडेरवा सरहदी गांव के रहने वाले थे। उनकी बचपन से भजन कीर्तन व ईश्वर की सेवा में विशेष रुचि थी।
स्वामी राम मिलन महराज ने यहां कई वर्षों तक ईश्वर की सेवा में लीन होकर तपस्या की थी। इसके बाद उन्होंने यहीं पर 21 वर्षों तक समाधि में रहकर तपस्या की। उसी के बाद उनका देहांत हो गया।
आश्रम में महराज की स्मृति में उनकी समाधि का निर्माण कराया गया। जहां आज भी सुबह शाम उनकी ईश्वर के साथ पूजा होती है। यहां भगवान श्रीराम व सीता के साथ ही स्वामी राम मिलन दास की मूर्ति बनाई गयी है। परिसर में शबरी की मूर्ति लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
यहां आश्रम में एक कामधेनु गाय है जो बिना प्रजनन की क्रिया से गुजरे हमेशा दूध देती है। उसी दूध से आश्रम में पूजा की जाती है। महराज के बाद अब आश्रम के महंत स्वामी नृसिंह दास महराज हैं।
मन्दिर के सामने एक विशाल सरोवर है। जिसमें पहले बड़े बड़े कछुए पाले गए थे, लेकिन अब सरोवर के मध्य कुंतेश्वर महादेव मन्दिर का निर्माण हो रहा है। यहां महाभारत काल अज्ञातवास के दौरान जंगल में पांचो पांडव अपनी माता कुंती के साथ रहते थे। उसी समय भीम ने एक राक्षस का वध किया था। माता कुंती की स्मृति में सरोवर में कुंतेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हो रहा है।