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पांच चुनावों में आरक्षित न होने वाली 519 पंचायतें होंगी आरक्षित
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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के लिए आरक्षण की तैयारी चल रही है। आरक्षण की कवायद के साथ ही चुनाव लड़ने वालों की धड़कने भी बढ़ रही हैं। पांच चुनावों में आरक्षित न होने वालीं पंचायतों का आरक्षित होना तय है। जिले की 1214 पंचायतों में 519 को आरक्षित किया जाना है।
इसके अलावा जिन पंचायतों में अभी तक सामान्य महिलाओं को अवसर नहीं मिला है उनके लिए 226 सीटें रिजर्व होंगी। पहली मार्च तक जिलाधिकारी आरक्षण का प्रस्ताव तैयार करा लेंगे। तीन मार्च को आपत्ति के लिए आरक्षण की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
जिले में 1214 प्रधान पदों के लिए निर्वाचन होने हैं। इसके लिए आरक्षण की प्रक्रिया हो रही है। इस बार शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जो पंचायतें आज तक आरक्षित नहीं हुईं हैं वे पहले आरक्षित की जाएंगी। इसके साथ ही आरक्षण में नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
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71 पंचायतों की सूची तैयार हो रही है जो अनुसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही 127 पंचायतें चिन्हित की जा रही हैं जो अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित की जाएंगी।
इसी तरह 112 पंचायतों को अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए सूची बद्घ किया जा रहा है। वहीं 209 पंचायतों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। इससे साफ हो गया हैं कि इन पंचायतों में आरक्षण का बदलाव बड़े स्तर पर होगा। वर्ग के आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के साथ ही सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण हो रहा है।
जिन पंचायतों में महिलाओं को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला है या फिर महिलाओं के लिए वे पंचायतें आरक्षित नहीं हुई हैं, ऐसी 226 पंचायतों को आरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए आरक्षण चार्ट तैयार कर लिया गया है और पांच बार के चुनावों का रिकार्ड तैयार किया गया है।
25 सालों के पंचायतों के इतिहास में बड़े परिवर्तन होने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही सामान्य वर्ग के लिए 469 पंचायतें होंगे। इसमें भी ऐसी पंचायतों को शामिल किया जा रहा है जो आरक्षित होती रही हैं। यह अलग बात है कि इन पंचायतों में सभी वर्ग के प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे।
त्रिस्तरीय पंचायतों के आरक्षण के लिए दो दिनों के प्रशिक्षण में आरक्षण का फामूर्ला अफसरों को बताया गया है। शासन की ओर से तय तिथियों तक ब्लाक के अधिकारियों को आरक्षण की प्रक्रिया पूूरी कर प्रस्ताव जिलाधिकारी को देना है। आरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार करने का कार्य शनिवार से शुरू हो गया है।
एक मार्च तक प्रधानों के आरक्षण के साथ ही ग्राम पंचायत, जिला व क्षेत्र पंचायत के सदस्य पदों के आरक्षण का प्रस्ताव जिलाधिकारी तैयार करेंगे। 2 से 3 मार्च के बीच आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी कर दी जाएगी।
इसके बाद आम लोगों को 4 मार्च से 8 मार्च तक आपत्तियां देने का अवसर मिलेगा। जिसका निस्तारण 12 मार्च तक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। 14 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित कर दी जाएगी और इसके बाद गांवों में चुनावी दंगल तेज हो जाएंगे।
पंचायतों के पदों का आरक्षण तैयार कर रहे अधिकारियों पर प्रशासन की विशेष नजर है। 16 ब्लाकों में नोड़ल अधिकारी नामित किए गए हैं जो निगरानी में कोई कमी नही रखेगी। इसके अलावा जिलाधिकारी की पूरी नजर प्रक्रिया पर है। आरक्षण तैयार कर रहे अधिकारियों को इस बात का शपथ पत्र भी देना है कि उनकी तरफ से पूरी निष्पक्षता के साथ आरक्षण की सूची तैयार की गई है।
उनकी ओर से कोई गड़बड़ी नही की गई है। माना जा रहा है कि आरक्षण में कोई कमी आपत्तियों के जरिए प्रशासन के पास पहुंचेगी और निस्तारण के दौरान मामला पकड़ में आ जाएगा। ऐसे में अधिकारियों को काफी सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
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इसके अलावा जिन पंचायतों में अभी तक सामान्य महिलाओं को अवसर नहीं मिला है उनके लिए 226 सीटें रिजर्व होंगी। पहली मार्च तक जिलाधिकारी आरक्षण का प्रस्ताव तैयार करा लेंगे। तीन मार्च को आपत्ति के लिए आरक्षण की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
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जिले में 1214 प्रधान पदों के लिए निर्वाचन होने हैं। इसके लिए आरक्षण की प्रक्रिया हो रही है। इस बार शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जो पंचायतें आज तक आरक्षित नहीं हुईं हैं वे पहले आरक्षित की जाएंगी। इसके साथ ही आरक्षण में नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
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71 पंचायतों की सूची तैयार हो रही है जो अनुसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही 127 पंचायतें चिन्हित की जा रही हैं जो अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित की जाएंगी।
इसी तरह 112 पंचायतों को अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए सूची बद्घ किया जा रहा है। वहीं 209 पंचायतों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। इससे साफ हो गया हैं कि इन पंचायतों में आरक्षण का बदलाव बड़े स्तर पर होगा। वर्ग के आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के साथ ही सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण हो रहा है।
जिन पंचायतों में महिलाओं को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला है या फिर महिलाओं के लिए वे पंचायतें आरक्षित नहीं हुई हैं, ऐसी 226 पंचायतों को आरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए आरक्षण चार्ट तैयार कर लिया गया है और पांच बार के चुनावों का रिकार्ड तैयार किया गया है।
25 सालों के पंचायतों के इतिहास में बड़े परिवर्तन होने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही सामान्य वर्ग के लिए 469 पंचायतें होंगे। इसमें भी ऐसी पंचायतों को शामिल किया जा रहा है जो आरक्षित होती रही हैं। यह अलग बात है कि इन पंचायतों में सभी वर्ग के प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे।
त्रिस्तरीय पंचायतों के आरक्षण के लिए दो दिनों के प्रशिक्षण में आरक्षण का फामूर्ला अफसरों को बताया गया है। शासन की ओर से तय तिथियों तक ब्लाक के अधिकारियों को आरक्षण की प्रक्रिया पूूरी कर प्रस्ताव जिलाधिकारी को देना है। आरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार करने का कार्य शनिवार से शुरू हो गया है।
एक मार्च तक प्रधानों के आरक्षण के साथ ही ग्राम पंचायत, जिला व क्षेत्र पंचायत के सदस्य पदों के आरक्षण का प्रस्ताव जिलाधिकारी तैयार करेंगे। 2 से 3 मार्च के बीच आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी कर दी जाएगी।
इसके बाद आम लोगों को 4 मार्च से 8 मार्च तक आपत्तियां देने का अवसर मिलेगा। जिसका निस्तारण 12 मार्च तक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। 14 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित कर दी जाएगी और इसके बाद गांवों में चुनावी दंगल तेज हो जाएंगे।
पंचायतों के पदों का आरक्षण तैयार कर रहे अधिकारियों पर प्रशासन की विशेष नजर है। 16 ब्लाकों में नोड़ल अधिकारी नामित किए गए हैं जो निगरानी में कोई कमी नही रखेगी। इसके अलावा जिलाधिकारी की पूरी नजर प्रक्रिया पर है। आरक्षण तैयार कर रहे अधिकारियों को इस बात का शपथ पत्र भी देना है कि उनकी तरफ से पूरी निष्पक्षता के साथ आरक्षण की सूची तैयार की गई है।
उनकी ओर से कोई गड़बड़ी नही की गई है। माना जा रहा है कि आरक्षण में कोई कमी आपत्तियों के जरिए प्रशासन के पास पहुंचेगी और निस्तारण के दौरान मामला पकड़ में आ जाएगा। ऐसे में अधिकारियों को काफी सतर्कता बरतनी पड़ रही है।