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Gonda News: अचार के कारोबार ने जीवन में घोली खुशहाली की मिठास
Fri, 06 Jun 2025 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 06 Jun 2025 11:47 PM IST
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वजीरगंज के कन्नीपुर में अचार तैयार करतीं मीरा तिवारी। स्रोत: स्वयं
गोंडा। व्यवसाय के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है...? अच्छा व्यवसाय केवल पुरुष ही कर सकते हैं। इसका जवाब वजीरगंज निवासी मीरा तिवारी के पास मिल जाएगा। जिन्होंने मात्र 500 रुपये की पूंजी से आचार का कारोबार शुरू किया जो आज पांच लाख रुपये सालाना तक पहुंच गया है। उनके साथ जुड़कर गांव की आठ अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार कर रही हैं।
वजीरगंज विकासखंड के कन्नीपुर निवासी मीरा तिवारी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार में आय के बहुत ही सीमित साधन थे। मीरा कुछ काम करके परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं। हाईस्कूल तक पढ़ीं मीरा के मन में विचार आया कि अचार बनाकर बेचा जाए तो कुछ आमदनी हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में रक्षाबंधन पर उन्हें भाई ने 1100 रुपये दिए थे। इसमें से 600 रुपये खर्च हो गए और 500 रुपये से आम और खड़ा मसाला लाकर अचार बनाया। गांव के कुछ लोगों को बेचा, जिससे 700 रुपये मिले। उन्हें 200 रुपये का मुनाफा हुआ। इससे उत्साह बढ़ा और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2022 में गुलाब आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाकर कारोबार बढ़ाना शुरू किया। तत्कालीन सीडीओ एम. अरुन्मोली का सहयोग मिला और मीरा अरगा ब्रांड से जुड़कर अचान बेचने लगीं। मौजूदा समय में उनके समूह से गांव की आठ महिलाएं जुड़कर स्वरोजगार कर रही हैं।
नौ प्रकार के अचार बनाती हैं मीरा
मीरा नौ प्रकार के अचार तैयार कर आधा किलो व एक किलो की पैकिंग में बेचती हैं। वह आम, लहसुन, मिक्स, चटनी, आंवला, अमरख, पपीता, भरुआ मिर्च और गाजर का अचार तैयार करती हैं। आधा किलो के डिब्बे की कीमत 120 से लेकर 180 रुपये तक होती है। एक किलो आचार की शुरूआत 230 रुपये किलो से होती है। मीरा के आचार शहर के तीन शॉपिंग मार्ट में बिकते हैं। विकास भवन स्थित शक्ति कैफे, अयोध्या की कई दुकानों पर भी उनका अचार बिकता है। प्रति वर्ष करीब पांच लाख रुपये के अचार की बिक्री होती है। जिसमें करीब एक लाख 80 हजार रुपये की बचत होती है।
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वजीरगंज विकासखंड के कन्नीपुर निवासी मीरा तिवारी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार में आय के बहुत ही सीमित साधन थे। मीरा कुछ काम करके परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं। हाईस्कूल तक पढ़ीं मीरा के मन में विचार आया कि अचार बनाकर बेचा जाए तो कुछ आमदनी हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में रक्षाबंधन पर उन्हें भाई ने 1100 रुपये दिए थे। इसमें से 600 रुपये खर्च हो गए और 500 रुपये से आम और खड़ा मसाला लाकर अचार बनाया। गांव के कुछ लोगों को बेचा, जिससे 700 रुपये मिले। उन्हें 200 रुपये का मुनाफा हुआ। इससे उत्साह बढ़ा और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2022 में गुलाब आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाकर कारोबार बढ़ाना शुरू किया। तत्कालीन सीडीओ एम. अरुन्मोली का सहयोग मिला और मीरा अरगा ब्रांड से जुड़कर अचान बेचने लगीं। मौजूदा समय में उनके समूह से गांव की आठ महिलाएं जुड़कर स्वरोजगार कर रही हैं।
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नौ प्रकार के अचार बनाती हैं मीरा
मीरा नौ प्रकार के अचार तैयार कर आधा किलो व एक किलो की पैकिंग में बेचती हैं। वह आम, लहसुन, मिक्स, चटनी, आंवला, अमरख, पपीता, भरुआ मिर्च और गाजर का अचार तैयार करती हैं। आधा किलो के डिब्बे की कीमत 120 से लेकर 180 रुपये तक होती है। एक किलो आचार की शुरूआत 230 रुपये किलो से होती है। मीरा के आचार शहर के तीन शॉपिंग मार्ट में बिकते हैं। विकास भवन स्थित शक्ति कैफे, अयोध्या की कई दुकानों पर भी उनका अचार बिकता है। प्रति वर्ष करीब पांच लाख रुपये के अचार की बिक्री होती है। जिसमें करीब एक लाख 80 हजार रुपये की बचत होती है।
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